रक्षाबंधन पर ज़हर परोसने की तैयारी? रीवा की डेयरियों पर छापा, झाड़ियों में छिपा मिला भारी मावा, रोसर से नेहरू नगर तक छापेमारी, नकली मावा देखकर उड़े होश

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) त्योहारों के आगमन के साथ ही बाजार में मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। रक्षाबंधन के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश के रीवा जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ एक बड़ा और सघन अभियान शुरू कर दिया है। जिला कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों पर अमल करते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित डेयरी प्रतिष्ठानों और मावा कारखानों में अचानक दबिश दी।

इस व्यापक कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य रक्षाबंधन पर आम नागरिकों को शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। त्योहारों के मौसम में अक्सर अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटी और रासायनिक मावा एवं पनीर बाजार में खपाने का प्रयास किया जाता है। रीवा प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से मिलावटखोरी के इस संगठित कारोबार से जुड़े संचालकों में हड़कंप मच गया है।

रोसर की रम्पत डेयरी में बड़ा ड्रामा: झाड़ियों में छिपाया गया मावा
कार्रवाई के दौरान सबसे नाटकीय घटनाक्रम रोसर स्थित रम्पत डेयरी के कारखाने में देखने को मिला। जब खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम औचक निरीक्षण के लिए रोसर पहुंची, तो कारखाना संचालक रामपति यादव ने टीम को देखते ही चालाकी दिखाने की कोशिश की। संचालक ने जांच अधिकारियों को मुख्य दरवाजे पर ही उलझाए रखा और बाहर रोक दिया।

इतनी देर में संचालक ने कारखाने के अंदर रखे संदिग्ध मावे की बड़ी खेप को चोरी-छिपे परिसर के पिछले हिस्से में ले जाकर कटीली झाड़ियों के बीच छिपा दिया। हालांकि, अधिकारियों को संचालक की गतिविधियों और हरकतों पर तुरंत संदेह हो गया। टीम ने बिना कोई समय गंवाए अंदर प्रवेश किया और बारीकी से तलाशी शुरू की।

सघन जांच के बाद कारखाने के पीछे कंटीली झाड़ियों में छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में संदिग्ध मावा बरामद कर लिया गया। पहली नज़र में ही मावा की गुणवत्ता अत्यधिक संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद पूरी खेप को मौके पर ही ज़ब्त कर लिया गया। इसके साथ ही टीम ने कारखाने में तैयार हो रहे मावे और दही के विधिक नमूने (Formal Samples) सील कर आगे की जांच के लिए ले लिए।

कुठुलिया मोड़ और नेहरू नगर में भी छापेमारी: पनीर व मावा ज़ब्त
रोसर के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग का दस्ता शहर के अन्य व्यस्त व्यापारिक इलाकों की ओर बढ़ा। निरीक्षण अभियान के तहत टीम कुठुलिया मोड़ स्थित शगुन डेयरी पहुंची। यहां टीम ने स्टॉक में रखे गए पनीर और मावे की गुणवत्ता की जांच की और दोनों उत्पादों के नमूने एकत्र किए।

इसके पश्चात, टीम ने नेहरू नगर स्थित बालकृष्ण डेयरी में दबिश दी। यहां जांच के दौरान अधिकारियों को मावे का बड़ा स्टॉक रखा मिला। जब डेयरी संचालक सच्चिदानंद पांडे से इस स्टॉक के स्रोत के बारे में कड़ी पूछताछ की गई, तो उन्होंने दावा किया कि यह मावा स्थानीय स्तर पर उनके कारखाने में तैयार नहीं किया गया है, बल्कि इसे रक्षाबंधन की मांग को पूरा करने के लिए मानिकपुरा के व्यापारी मातादीन से खरीदकर लाया गया था। खाद्य अधिकारियों ने इस दावे के बाद भी कोई छूट न देते हुए उपलब्ध मावे के नमूने लिए और उन्हें सील बंद प्रक्रिया के तहत औपचारिक जांच का हिस्सा बनाया।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमरीश दुबे का सख्त बयान
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमरीश दुबे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि रक्षाबंधन पर्व के दौरान लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ रोकने के लिए पूरे रीवा जिले में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

"रोसर की रम्पत डेयरी में निरीक्षण के दौरान संचालक द्वारा मावा छिपाने का प्रयास किया गया था, जिसे टीम ने तत्परता से ढूंढकर ज़ब्त कर लिया है। शहर की विभिन्न डेयरियों से मावा, पनीर और दही के सैंपल एकत्र किए गए हैं। इन सभी नमूनों को राज्य स्तरीय प्रमाणित प्रयोगशाला (Food Testing Laboratory) में त्वरित जांच के लिए भेजा जा रहा है। लैब से रिपोर्ट प्राप्त होते ही संबंधित संचालकों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI Rules) के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" — अमरीश दुबे, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगामी दिनों में भी जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित डेयरी कारखानों और मिठाई दुकानों पर लगातार छापेमारी की जाएगी।

त्योहारों में मिलावटी मावा-पनीर की पहचान कैसे करें?
रक्षाबंधन जैसे अवसरों पर बाजार में सिंथेटिक और रासायनिक मावा-पनीर की बिक्री बढ़ जाती है। आम उपभोक्ता कुछ आसान घरेलू परीक्षणों के जरिए इनकी शुद्धता की जांच कर सकते हैं:

  • आयोडीन टेस्ट (आईओडीन परीक्षण): मावे या पनीर का थोड़ा सा हिस्सा पानी में उबालें। ठंडा होने के बाद इसमें आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालें। यदि रंग नीला हो जाता है, तो इसमें स्टार्च या डिटर्जेंट की मिलावट है।
  • हथेली पर रगड़ना: शुद्ध मावे को हाथ की हथेली पर रगड़ने से घी जैसी महक आती है और वह हल्का चिकना महसूस होता है। मिलावटी मावा रगड़ने पर कड़ा या दानेदार लगता है और उससे रसायन की गंध आती है।
  • तिल के तेल से परीक्षण: थोड़ा सा मावा लेकर उसमें थोड़ी चीनी और तिल का तेल मिलाएं। यदि इसका रंग लाल हो जाता है, तो इसमें वनस्पति घी या अमानक तेल मिलाया गया है।
  • पनीर की लोच (Elasticity): असली पनीर छूने में सॉफ्ट होता है और खींचने पर बिखरता नहीं है। मिलावटी या सिंथेटिक पनीर रबड़ की तरह खिंचता है या फिर आसानी से टूटने लगता है।

मिलावटखोरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का तरीका
यदि आपके क्षेत्र में भी कोई व्यक्ति या डेयरी संचालक अमानक, बदबूदार या मिलावटी खाद्य पदार्थों का निर्माण या बिक्री करता है, तो आप इसकी सूचना सीधे प्रशासन को दे सकते हैं:

  • जिला खाद्य सुरक्षा विभाग: रीवा कलेक्टरेट परिसर स्थित खाद्य सुरक्षा कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
  • सीएम हेल्पलाइन (MP CM Helpline): मध्य प्रदेश सरकार के 181 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके खाद्य पदार्थ में मिलावट की सीधी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
  • FSSAI Food Safety Connect: खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के आधिकारिक मोबाइल ऐप या पोर्टल के जरिए भी आप सीधे बिल/तस्वीर के साथ अपनी शिकायत ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं।