"हर प्लेट पर मुंह मारता है..." रीवा जिला पंचायत CEO पर भड़के MLA अभय मिश्रा; सीईओ को कहा लुटेरा,CM मोहन यादव तक पहुँचा मामला!

 

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल सामने आई है। यहाँ के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने प्रशासनिक व्यवस्था पर निशाना साधते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के खिलाफ बेहद तीखे और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया है। विधायक ने खुले मंच से जिला पंचायत सीईओ को 'टपोरी' और 'हर प्लेट पर मुंह मारने वाला टॉमी' (कुत्ता) तक कह डाला।

विधायक के इस बयान के बाद रीवा के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में भूचाल आ गया है। अभय मिश्रा ने केवल जुबानी हमला ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वह इस भ्रष्ट अधिकारी की शिकायत सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव से करेंगे ताकि इस 'एक गंदी मछली' को पूरे तालाब को प्रदूषित करने से रोका जा सके।

विधायक अभय मिश्रा के गंभीर आरोप: 'टपोरी' और 'टॉमी' से की तुलना
रीवा में विधायक और सीईओ का विवाद क्या है और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग क्यों हुआ?
कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने रीवा जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर को आड़े हाथों लेते हुए उनकी तुलना एक ऐसे जीव से कर दी जो हर जगह लालच में मुंह मारता है।

विधायक अभय मिश्रा का बयान:
"रीवा में बाकी सभी प्रशासनिक अधिकारी जैसे कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और आईजी गौरव राजपूत बहुत ही शानदार और ईमानदारी से काम कर रहे हैं। लेकिन जिला पंचायत में बैठा यह अधिकारी किसी टपोरी से कम नहीं है। यह केवल यहाँ लूटपाट मचाने और पैसे कमाने के उद्देश्य से आया है।" विधायक ने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारियों की वजह से पूरी सरकार और जिले की प्रशासनिक छवि धूमिल हो रही है, इसलिए इनका इलाज होना बेहद जरूरी है।

रीवा कलेक्टर और सीईओ के बीच क्या विवाद है और विधायक ने क्या दावा किया?
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह है कि विधायक अभय मिश्रा जहाँ जिला पंचायत सीईओ पर हमलावर हैं, वहीं वे जिले के कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी की ईमानदारी के कसीदे पढ़ रहे हैं। पिछले दिनों रीवा कलेक्ट्रेट और जिला पंचायत के कर्मचारियों के बीच एक बड़ा गतिरोध देखने को मिला था, जहाँ कर्मचारी कलेक्टर की सख्ती के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन पर उतर आए थे।

अभय मिश्रा ने इस पूरे प्रदर्शन को जिला पंचायत सीईओ का एक सुनियोजित षड़यंत्र करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी एक बेहद ईमानदार अधिकारी हैं जो जिले में नियम-कानून का राज चाहते हैं। चूंकि जिला पंचायत सीईओ की भ्रष्ट नीतियां कलेक्टर की वजह से बाधित हो रही थीं, इसलिए उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को भड़काकर कलेक्टर के खिलाफ खड़ा कर दिया।

जिला पंचायत में भ्रष्टाचार की शिकायत कैसे करें और वहाँ किस तरह का खेल चल रहा है?
विधायक अभय मिश्रा ने केवल व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की, बल्कि जिला पंचायत के भीतर चल रहे कथित वित्तीय घोटालों और कमीशनखोरी के तंत्र का भी भंडाफोड़ किया। उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • निजी एजेंटों की तैनाती: सीईओ ने आधिकारिक काम-काज को संभालने के लिए अपने कुछ खास निजी एजेंट रख छोड़े हैं। आम जनता या जनप्रतिनिधियों का कोई भी काम सीधे नहीं होता।
  • हर फाइल पर कमीशन: जिला पंचायत के तहत आने वाली हर छोटी-बड़ी विकास योजना, निर्माण कार्य और पंचायत फंड की फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए निश्चित प्रतिशत में कमीशन वसूला जा रहा है।
  • जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा: इस एजेंट राज और भारी भ्रष्टाचार के कारण न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि क्षेत्र के सरपंच, जनपद सदस्य और खुद विधायक जैसे जनप्रतिनिधियों को भी अपने काम कराने के लिए अपमानित होना पड़ रहा है।

रीवा जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह कौन हैं और इस विवाद पर उनका क्या पक्ष है?
इस बेहद गंभीर और अपमानजनक बयानबाजी के बाद जब मीडिया जगत ने रीवा जिला पंचायत के सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उन्होंने इस पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। अधिकारी का यह मौन प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोगों का मानना है कि सरकारी सेवा नियमावली के तहत वे इस राजनीतिक बयानबाजी में सीधे नहीं कूदना चाहते, जबकि विपक्ष इसे आरोपों की मूक स्वीकृति के रूप में देख रहा है।

दूसरी ओर, रीवा के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर अंदरूनी नाराजगी है कि एक जनप्रतिनिधि ने प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी के लिए 'टपोरी' और 'टॉमी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे सिविल सेवा की गरिमा को ठेस पहुंची है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव से शिकायत कब होगी और इसका क्या परिणाम आ सकता है?
चूंकि अभय मिश्रा कांग्रेस के विधायक हैं और मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, ऐसे में यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। मिश्रा ने कहा है कि वे जल्द ही भोपाल जाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करेंगे और जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ लिखित शिकायत सौंपेंगे।

यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। यदि सरकार इस अधिकारी के खिलाफ कोई एक्शन लेती है, तो यह कांग्रेस विधायक की बड़ी जीत मानी जाएगी। लेकिन यदि सरकार अधिकारी के बचाव में उतरती है, तो आने वाले दिनों में रीवा की धरती पर एक बड़ा राजनीतिक आंदोलन देखने को मिल सकता है।