रीवा कोर्ट में गूंजा एक ही नाम! राजेंद्र पांडे का 'सप्तक' पूरा, फिर बने अधिवक्ता संघ के बेताज बादशाह : विरोधियों के उड़े होश
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। जिला न्यायालय परिसर में आयोजित जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि स्थानीय अधिवक्ताओं के बीच राजेंद्र पांडे का नेतृत्व कितना प्रभावशाली है। अपनी लोकप्रियता और प्रशासनिक पकड़ के दम पर राजेंद्र पांडे ने अध्यक्ष पद पर एक ऐसी जीत हासिल की है, जो आने वाले कई वर्षों तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।
राजेंद्र पांडे का अटूट रिकॉर्ड: एक हार से सात जीतों का महासफर
राजेंद्र पांडे की यह जीत केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि उनके अटूट धैर्य और सेवा का प्रतीक है। उनके करियर की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही थी; अपने पहले चुनाव में उन्हें दिग्गज अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह से पराजय का सामना करना पड़ा था।
हालांकि, उस हार ने उनके संकल्प को और मजबूत किया। उसके बाद से आज तक राजेंद्र पांडे ने मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने एक के बाद एक लगातार सात चुनाव जीते हैं। रीवा अधिवक्ता संघ के इतिहास में लगातार सात बार अध्यक्ष निर्वाचित होना एक ऐसा अनूठा कीर्तिमान है, जो उनकी अटूट साख को दर्शाता है।
नवनिर्वाचित कार्यकारिणी: टीम 2026 का उदय
चुनाव परिणामों की घोषणा के साथ ही संघ की नई कार्यकारिणी का स्वरूप भी स्पष्ट हो गया है। इस बार की टीम में अनुभव और युवा ऊर्जा का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला है:
- अध्यक्ष: वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र पांडे (ऐतिहासिक सातवीं जीत)।
- उपाध्यक्ष: अनुभवी नेतृत्व के धनी कमलेश्वर तिवारी को उपाध्यक्ष चुना गया है।
- सचिव: प्रशासनिक कार्यों के सफल संचालन के लिए सुलभ पांडे ने जीत दर्ज की।
- सह सचिव: युवा अधिवक्ताओं की आवाज के रूप में अनिल तिवारी 'बिल्लू' को जिम्मेदारी मिली है।
- कोषाध्यक्ष: संघ के वित्तीय प्रबंधन के लिए नीलम चतुर्वेदी को निर्वाचित किया गया।
- ग्रंथपाल: शोध और पुस्तकालय प्रबंधन की कमान रामणि मिश्रा के हाथों में दी गई है।
चुनावी रण: 278 मतों का निर्णायक अंतर
इस वर्ष का चुनाव काफी गहमागहमी भरा रहा। मुख्य मुकाबला राजेंद्र पांडे और उनके प्रतिद्वंद्वी अशोक शुक्ला के बीच था। शुरुआती दौर की मतगणना से ही राजेंद्र पांडे ने अपनी बढ़त बनानी शुरू कर दी थी, जो अंत तक निरंतर बढ़ती रही।
अंतिम परिणाम घोषित होने पर राजेंद्र पांडे ने अशोक शुक्ला को 278 मतों के विशाल अंतर से पराजित किया। इतने बड़े मार्जिन से जीत यह स्पष्ट करती है कि संघ के सदस्यों के बीच वर्तमान नेतृत्व के प्रति कोई संशय नहीं है और वे पांडे की कार्यशैली पर पूर्ण विश्वास रखते हैं।
भविष्य की राह: अधिवक्ताओं के हितों का संरक्षण
नवनिर्वाचित टीम के कंधों पर अब बड़ी जिम्मेदारियां हैं। राजेंद्र पांडे और उनकी टीम ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता अधिवक्ताओं की सुरक्षा, कोर्ट परिसर में बेहतर सुविधाएं और युवा अधिवक्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाना होगा। इस जीत के बाद न्यायालय परिसर में जश्न का माहौल है और समर्थकों ने फूल-मालाओं के साथ विजयी प्रत्याशियों का स्वागत किया।