रीवा में हवाई सेवा के नाम पर मजाक: 72 की जगह भेजा 'टेंपो' जैसा विमान, 15 यात्री बीच रास्ते छूटे : युवती का डुबोया करियर, सिस्टम की नींद कब खुलेगी?

 
रीवा में अलायंस एयर की बड़ी लापरवाही, 72 की जगह भेजा 48 सीटर विमान, कंफर्म टिकट के बाद भी 15 यात्री दिल्ली नहीं जा सके। 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा के नवनिर्मित एयरपोर्ट पर रविवार की रात एक ऐसी घटना घटी जिसने एयरलाइन प्रबंधन और एयरपोर्ट अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलायंस एयर (Alliance Air) की दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में 15 यात्रियों को सिर्फ इसलिए बोर्डिंग से रोक दिया गया क्योंकि एयरलाइन ने अपनी क्षमता से छोटा विमान भेज दिया था।

72 की जगह आया 48 सीटर विमान: पूरी प्लानिंग फेल
आमतौर पर रीवा से दिल्ली मार्ग पर 72 सीटर विमान का संचालन किया जाता है। इसी आधार पर एयरलाइन ने सीटों की बुकिंग भी की थी। लेकिन रविवार रात करीब 9 बजे जब बोर्डिंग का समय आया, तो यात्रियों को पता चला कि जो विमान रनवे पर खड़ा है, वह मात्र 48 सीटर है। इसका सीधा मतलब था कि 24 यात्रियों के लिए जगह ही नहीं थी। अंततः 15 यात्रियों को एयरपोर्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

हंगामे की 3 तस्वीरें…

कन्फर्म टिकट होने के बावजूद 15 यात्रियों को बोर्डिंग से रोका।

यात्रियों ने जब एयरपोर्ट प्रशासन से इस बारे में जानना चाहा तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

शिवानी को इंटरव्यू देने के लिए दिल्ली जाना था, उन्हें भी विमान में नहीं बैठने दिया गया।

शिवानी जैन का इंटरव्यू छूटा: कौन भरेगा इस नुकसान की भरपाई?
इस लापरवाही की सबसे बड़ी शिकार अमरपाटन की रहने वाली शिवानी जैन हुईं। शिवानी को सोमवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण जॉब इंटरव्यू देना था। उन्होंने बताया:

"मेरे पास कंफर्म टिकट था। मैं 2 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुँच गई थी। पहले मुझे रोका गया और फिर कहा गया कि सिस्टम में मेरा नाम नहीं है। एक घंटे बाद सच बताया गया कि विमान छोटा है इसलिए जगह नहीं है। मेरा इंटरव्यू छूट गया, मेरा पूरा साल और मेहनत बर्बाद हो गई।"

बिना सूचना विमान बदला, सिस्टम को बनाया ढाल
यात्रियों का आरोप है कि एयरलाइन ने विमान बदलने की कोई भी पूर्व सूचना (SMS या ईमेल) नहीं दी थी। जब यात्री गेट पर पहुंचे, तो कर्मचारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि "सिस्टम में आपका डेटा शो नहीं कर रहा है।" यह साफ तौर पर अपनी गलती छुपाने का एक तरीका था।

देर रात तक चलता रहा हंगामा
जब यात्रियों को बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया गया, तो यात्रियों और उनके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। एयरपोर्ट परिसर में जमकर नारेबाजी हुई। यात्रियों का कहना है कि उन्होंने हजारों रुपये देकर टिकट खरीदी थी, लेकिन मौके पर उन्हें 'बेचारा' बनाकर छोड़ दिया गया। अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि जब बुकिंग 72 सीटों की थी, तो 48 सीटर विमान क्यों भेजा गया।

एयरपोर्ट प्रबंधन की नींद नहीं खुली
सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि "पैसे देने के बाद भी मजाक बना है।" रीवा एयरपोर्ट को क्षेत्र के विकास का प्रतीक बताया जा रहा था, लेकिन इस तरह की कुप्रबंधन की घटनाएं इसकी छवि को धूमिल कर रही हैं। अधिकारियों ने यह तो मान लिया कि 15 यात्री वापस गए हैं, लेकिन मुआवजे या वैकल्पिक व्यवस्था पर अभी तक कोई ठोस आधिकारिक बयान नहीं आया है।

है।

बाद में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि छोटा विमान आने के कारण सीटें कम पड़ गईं।

DGCA के नियम क्या कहते हैं?
भारत के विमानन नियामक (DGCA) के अनुसार, यदि किसी यात्री को कंफर्म टिकट होने के बावजूद 'डिनाइड बोर्डिंग' (Denied Boarding) का सामना करना पड़ता है, तो एयरलाइन को:

  • यात्री के लिए वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था करनी चाहिए।
  • यदि वैकल्पिक फ्लाइट 24 घंटे के भीतर नहीं है, तो उचित मुआवजा (टिकट की कीमत का 200% से 400% तक) देना होता है।
  • यात्रियों को भोजन और रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराना अनिवार्य है