रीवा APSU का 'कमीशन कांड': प्रैक्टिकल नंबरों के बदले मांगे 15-15 हजार; मना करने पर फाड़ दी मार्कशीट, कुलपति के करीबियों पर गंभीर आरोप

 

सीधी के कॉलेज में रीवा के शिक्षकों की गुंडागर्दी; कुलपति के शोध सहायक की पत्नी भी विवादों में, राजभवन पहुंची भ्रष्टाचार की शिकायत

रीवा का अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला किसी छात्र आंदोलन का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त किए गए उन 'गुरुओं' का है, जिन्होंने परीक्षा की शुचिता को ताक पर रखकर वसूली का अड्डा बना लिया है। सीधी के शिक्षा महाविद्यालय पनवार में प्रैक्टिकल परीक्षा लेने पहुंचे तीन वाह्य परीक्षकों (External Examiners) पर कॉलेज प्रबंधन ने अवैध वसूली, अभद्रता और सरकारी दस्तावेज फाड़ने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

15 हजार दो वरना फेल कर देंगे! सीधी में 'वसूली' का लाइव ड्रामा

घटना 18 मार्च 2025 की है, जब APSU द्वारा नियुक्त तीन शिक्षक बीएड प्रथम और द्वितीय वर्ष की प्रायोगिक परीक्षा लेने सीधी पहुंचे थे।

  • पैसे की डिमांड: आरोप है कि परीक्षा संपन्न होने के बाद जब अंक भरने की बारी आई, तो तीनों शिक्षकों ने कॉलेज प्राचार्य से प्रति शिक्षक 15-15 हजार रुपये की मांग की।

  • दस्तावेज फाड़े: कॉलेज प्राचार्य ने जब इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताई और 7-7 हजार का ऑफर दिया, तो शिक्षक भड़क गए। आरोप है कि अरदेंदु रंजन मिश्रा नामक शिक्षक ने भरे हुए अंक पत्र (पर्ण और प्रतिपर्ण) सबके सामने फाड़ दिए। वहीं, एक महिला शिक्षक अंक पत्र अपने पर्स में रखकर चंपत हो गईं।

कौन हैं ये 'खास' शिक्षक? कुलपति के सचिवालय तक जुड़े तार

इस पूरे कांड के पीछे विश्वविद्यालय के अंदर चल रहे एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। सीधी में जिन तीन शिक्षकों की ड्यूटी लगी थी, उनके नाम हैं:

  1. अरदेंदु रंजन मिश्रा (मुख्य आरोपी)

  2. डॉ. अरुण पाण्डेय

  3. डॉ. शोभा रानी दुबे

बड़ा खुलासा: डॉ. शोभा रानी दुबे, कुलपति डॉ. राजेन्द्र कुड़रिया के साए की तरह साथ रहने वाले शोध सहायक निलिन दुबे की पत्नी हैं। चर्चा है कि रसूख के दम पर निलिन दुबे ने अपनी पत्नी को करीब 25 कॉलेजों में परीक्षक नियुक्त करवाया है, ताकि 'वसूली' का यह खेल बड़े पैमाने पर चल सके।

राजभवन पहुंची शिकायत, लेकिन विवि में पत्र 'गुम'!

सीधी कॉलेज के प्राचार्य मृगेन्द्र सिंह ने इस बदसलूकी और वसूली की लिखित शिकायत कुलसचिव (Registrar) से की है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि ऐसे भ्रष्ट शिक्षकों को दोबारा उनके कॉलेज न भेजा जाए।

  • फाइल दबाने का खेल: शिकायत पत्र 31 मार्च को ही विश्वविद्यालय पहुंच गया था और इसे बाबूलाल साकेत नामक कर्मचारी ने मार्क भी किया। लेकिन जैसे ही खबर कुलपति के करीबियों तक पहुंची, पत्र को 'गायब' करने की कोशिश शुरू हो गई।

  • कुलसचिव का बयान: ताज्जुब की बात यह है कि कुलसचिव नीरजा नामदेव का कहना है कि उन तक अभी ऐसा कोई पत्र पहुंचा ही नहीं है।

कुलपति के कार्यकाल में बढ़ी 'सिंडिकेट' की सक्रियता

विश्वविद्यालय के गलियारों में चर्चा है कि कुलपति डॉ. राजेन्द्र कुड़रिया के आने के बाद से पीएचडी और बीएड परीक्षाओं में बाहरी परीक्षकों की नियुक्ति एक 'बिजनेस' बन गई है। चहेते शिक्षकों को उपकृत करने के लिए नियमों को ताक पर रखकर बार-बार एक ही व्यक्ति को कई कॉलेज आवंटित किए जा रहे हैं। सीधी का यह कांड तो महज एक बानगी है, ऐसे कई मामले रसूख के दम पर दबा दिए जाते हैं।

क्या राजभवन लेगा कड़ा संज्ञान?

शिक्षा के मंदिर में नंबरों की बोली लगाना और प्राचार्य को धमकाना एक गंभीर अपराध है। यदि इस मामले में दोषी शिक्षकों और उनके पीछे खड़े 'सिंडिकेट' पर कार्रवाई नहीं होती, तो विन्ध्य के सबसे बड़े विश्वविद्यालय की साख पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अब देखना यह है कि राजभवन इस 'कांड' पर क्या एक्शन लेता है।