रीवा में आयुर्वेद इंटर्न चिकित्सकों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी: समान स्टाइपेंड की मांग को लेकर शासन को दिया अंतिम अल्टीमेटम
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य की राजधानी रीवा स्थित शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के इंटर्न चिकित्सकों और छात्र-छात्राओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर आयुर्वेद के भावी चिकित्सकों का धरना-प्रदर्शन आज ग्यारहवें दिन भी पूरी तल्लीनता के साथ जारी रहा। छात्रों की मुख्य मांग मध्य प्रदेश में आयुर्वेद इंटर्न (बीएएमएस) को मिलने वाले मासिक स्टाइपेंड को एलोपैथी (एमबीबीएस) इंटर्न के समकक्ष करने की है। लगातार विरोध के बावजूद शासन स्तर से कोई ठोस लिखित आश्वासन न मिलने से छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्टाइपेंड में भारी खाई: आयुर्वेद और एमबीबीएस के मानदेय का अंतर
आंदोलित छात्रों का तर्क है कि दोनों ही चिकित्सा पद्धतियों के छात्र समान रूप से अस्पतालों में अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन वित्तीय मोर्चे पर उनके साथ लंबे समय से भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में वर्तमान नियमों के तहत आयुर्वेद इंटर्न चिकित्सकों को प्रतिमाह मात्र 9,383 रुपए का स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इसके विपरीत, एमबीबीएस इंटर्न को प्रति माह 21,500 रुपए का भुगतान किया जाता है। समान कार्य, असमान वेतन: छात्रों का कहना है कि वे भी अस्पताल की ओपीडी, इंडोर वार्ड (भर्ती मरीजों की देखभाल), आपातकालीन सेवाएं और नाइट ड्यूटी जैसी तमाम कठिन जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करते हैं, ऐसे में दोनों के स्टाइपेंड में यह भारी अंतर पूरी तरह से अनुचित है।
अनोखे विरोध प्रदर्शन से लेकर डिग्रियां जलाने तक का कदम
जैसे-जैसे आंदोलन के दिन बीतते गए, छात्रों का गुस्सा भी सड़कों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा। पिछले दिनों आंदोलन को उग्र बनाते हुए छात्रों ने कॉलेज परिसर के मुख्य द्वार पर अपनी डिग्रियां तक फूंककर अनोखा और कड़ा विरोध दर्ज कराया था। डिग्री दहन के बाद छात्र जुलूस की शक्ल में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री, आयुष मंत्री और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित ज्ञापन सौंपा। स्टाइपेंड की समानता के अलावा छात्र आयुष चिकित्सा संस्थानों में लंबे समय से लंबित पड़ी नियमित नियुक्तियों को शुरू करने और चयन प्रक्रिया में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं।
16 अक्टूबर की समय-सीमा: भोपाल मंत्रालय घेराव की चेतावनी
आंदोलनकारी छात्रों ने अब शासन और प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने अपनी मांगों पर नीतिगत निर्णय लेने और लिखित आदेश जारी करने के लिए 16 अक्टूबर तक की डेडलाइन तय की है। "यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर शासन स्तर से स्टाइपेंड वृद्धि का लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता है, तो रीवा के ये छात्र चुप नहीं बैठेंगे। इसके बाद भोपाल पहुंचकर वल्लभ भवन (मंत्रालय) के सामने जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।" — (आंदोलित छात्रों की चेतावनी)
फिलहाल, छात्र अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और उग्र आंदोलन के मूड में हैं, और सभी की निगाहें शासन के अगले आधिकारिक रुख पर टिकी हुई हैं।