रीवा के 'विकास' में दरार! 20 साल भी नहीं टिका बीहर का पुल; पॉथ इंडिया ने काटा करोड़ों का टोल, जनता को दिया मौत का रास्ता, कहाँ सो रही है ट्रैफिक पुलिस?

 

रीवा के विकास की चमक अब धुंधली पड़ने लगी है। शहर के बाईपास यानी चोरहटा से रतहरा मार्ग पर बीहर नदी पर बना पुल मौत को दावत दे रहा है। वर्ष 2005 में पॉथ इंडिया कंपनी द्वारा निर्मित इस पुल के गर्डर में बड़ी दरारें आ गई हैं और इसका 'पियर कैप' बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। करोड़ों का टोल वसूलने वाली कंपनी ने कैसा काम किया, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह पुल अपनी निर्धारित उम्र का आधा हिस्सा भी सुरक्षित तरीके से पूरा नहीं कर सका।

टोल वसूली खत्म होते ही जवाब दे गया पुल: पॉथ इंडिया पर उठ रहे सवाल

रीवा बाईपास का निर्माण 2005 में हुआ था। तब से लेकर अब तक पॉथ इंडिया कंपनी यहाँ से गुजरने वाले वाहनों से मोटी रकम वसूलती रही। लेकिन जैसे ही टोल का समय खत्म हुआ और सड़क चौड़ीकरण की बारी आई, कंपनी की असलियत सामने आ गई।

  • खतरनाक दरारें: पुल के मुख्य हिस्से (गर्डर) में आई दरारें इतनी गंभीर हैं कि प्रशासन ने इसे भारी वाहनों के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया है।

  • प्रशासनिक आदेश: सुरक्षा को देखते हुए अपर जिला दंडाधिकारी सपना त्रिपाठी ने आदेश जारी कर 30 अप्रैल तक भारी वाहनों का प्रवेश इस पुल पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।

शहर बना 'ट्रक डिपो': रात भर सड़कों पर मची रही अफरातफरी

बाईपास बंद होने का खामियाजा शहर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात रीवा शहर की मुख्य सड़कों का नजारा किसी 'ट्रक टर्मिनल' जैसा था।

  • लंबा जाम: बाईपास से डायवर्ट किए गए ट्रक शहर के अंदर पुराने नेशनल हाईवे-07 से गुजारे गए। जयस्तंभ से लेकर रतहरा तक वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतार लगी रही।

  • सुरक्षा नदारद: भारी वाहनों के इस रेले के बीच पुलिसकर्मी कहीं नजर नहीं आए, जिससे पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहनों के लिए सड़क पार करना भी मुहाल हो गया। हादसों की आशंका के बीच लोग घंटों फंसे रहे।

नया ट्रैफिक प्लान: इन रास्तों से होकर गुजरेंगे वाहन

यातायात को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों का खाका तैयार किया है:

  1. बेला से प्रयागराज: बेला -> होटल शार्क इन -> बीड़ा -> गोदहा -> सिरमौर -> क्योटी -> कलवारी मार्ग।

  2. बेला से मिर्जापुर: बेला -> बीड़ा -> गोदहा -> सिरमौर होकर रीवा की ओर।

  3. मिर्जापुर/प्रयागराज से बेला: रतहरा -> सिलपरा -> गोविंदगढ़ -> मुकुंदपुर होते हुए बेला।

नोट: सिलपरा और गोविंदगढ़ मार्ग काफी संकरे हैं और वहां निर्माण कार्य भी चल रहा है, इसलिए भारी वाहनों के लिए ये रास्ते पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इसी वजह से ट्रकों को रात के समय शहर से निकालने की अनुमति दी गई है।

एसडीएम हुजूर ने किया मौका मुआयना

पुल की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी ने पुलिस अधिकारियों के साथ क्षतिग्रस्त स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और सेतु निगम के इंजीनियरों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि जब तक तकनीकी टीम पुल को 'फिट' घोषित नहीं करती, तब तक भारी वाहनों का आवागमन बंद रहेगा।

कब तक भुगतेगी जनता?

घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की सजा आज रीवा की सड़कों पर रेंगती गाड़ियां और डर के साये में जी रहे लोग भुगत रहे हैं। पॉथ इंडिया जैसी कंपनियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए जिन्होंने जनता का पैसा तो वसूला लेकिन उन्हें एक सुरक्षित पुल नहीं दे सके। अगर जल्द ही पुल की मरम्मत नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।