रीवा में 'ट्रैफिक टॉर्चर': बीहर पुल ने तोड़ा दम, शहर बना जाम का जंजाल; 30 अप्रैल तक जनता का बुरा हाल!

 
बीहर नदी के पुराने पुल में आई दरार, 30 अप्रैल तक भारी वाहनों पर रोक; डाइवर्जन के चक्कर में घंटों जाम में फंस रहे लोग।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर इस समय यातायात के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। पिछले 72 घंटों से शहर की मुख्य सड़कों पर वाहनों का सैलाब उमड़ रहा है। बीहर नदी पर बने पुराने पुल के गर्डर में दरार आने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से इसे भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया है। इस एक फैसले ने पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को 'कोमा' में भेज दिया है।

प्रशासन का डाइवर्जन प्लान और सड़कों पर रेंगते वाहन
रविवार से शुरू हुआ यह संकट सोमवार और मंगलवार तक और गहरा गया है। प्रशासन ने 30 अप्रैल तक पुल पर भारी वाहनों की एंट्री बैन की है, जिसके कारण वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है। नतीजा यह है कि जिन सड़कों पर कभी इक्का-दुक्का वाहन दिखते थे, वहां अब सैकड़ों ट्रक और भारी वाहन खड़े नजर आ रहे हैं। शहर के भीतर भी डाइवर्जन का असर साफ दिख रहा है, जहाँ रेंगती गाड़ियाँ लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं।

बीहर पुल की ग्राउंड रिपोर्ट: गर्डर में दरार और पियर कैप डैमेज
तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, पुराने पुल का गर्डर फट चुका है और पियर कैप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता था। प्रशासन ने समय रहते भारी वाहनों को रोका तो सही, लेकिन इसके बदले जो वैकल्पिक व्यवस्था की गई, वह नाकाफी साबित हो रही है। रविवार को जहाँ 3 घंटे तक शहर थमा रहा, वहीं मंगलवार को भी हालात लगभग वैसे ही बने हुए हैं।

एसडीएम हुजूर का निरीक्षण: क्या कागजी निर्देशों से खुलेगा जाम?
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी ने स्वयं मोर्चा संभाला। उन्होंने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के सख्त निर्देश दिए। एसडीएम ने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए पुल पर लोड कम करना अनिवार्य है। हालांकि, धरातल पर पुलिस बल की कमी और संकरी सड़कों के कारण जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है।

वैकल्पिक मार्गों की बदहाली: जनता की मांग और जमीनी हकीकत

आम जनता अब प्रशासन के डाइवर्जन प्लान पर सवाल उठा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने रूट तो बदल दिया, लेकिन वैकल्पिक मार्गों की मरम्मत और वहां पुलिस की तैनाती नहीं की। संकरी गलियों में भारी ट्रक घुसने से न केवल जाम लग रहा है, बल्कि हादसों का डर भी बना हुआ है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि जब तक पुल की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर रास्तों को व्यवस्थित किया जाए।

कब तक मिलेगी जाम से मुक्ति?

फिलहाल 30 अप्रैल तक रीवा वासियों को इस 'ट्रैफिक टॉर्चर' से राहत मिलने के आसार कम ही हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल निर्देश देने के बजाय सड़कों पर उतरकर व्यवस्था को सुगम बनाए। यदि जल्द ही वैकल्पिक मार्गों को चौड़ा और व्यवस्थित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।