रीवा SP दफ्तर पहुंची महिला बस संचालक: समान थाने के आरक्षक पवन पाठक के खिलाफ खोला मोर्चा, महकमे में हड़कंप, हर महीने मांगते हैं 2 हजार की एंट्री, न देने पर जेल की धमकी

 

रीवा में बस ऑपरेटर संजना शुक्ला ने समान थाने के आरक्षक पवन पाठक पर हर महीने अवैध वसूली और झूठे केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए SP से शिकायत की।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से खाकी को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। न्याय और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस पर ही अब सरेआम धन उगाही और प्रताड़ना के आरोप लग रहे हैं। रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में एक महिला बस ऑपरेटर ने पहुंचकर पुलिस विभाग के ही एक आरक्षक (कॉन्स्टेबल) के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायती पत्र के सामने आते ही रीवा पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

आरोप किसी आम नागरिक ने नहीं, बल्कि क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित बस संचालक ने लगाए हैं, जिनका कहना है कि पुलिस के कुछ कर्मचारी वर्दी की धौंस दिखाकर उनका व्यापार ठप करने पर आमादा हैं। यह घटनाक्रम रीवा शहर के समान थाना क्षेत्र का है, जहाँ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात बीट प्रभारी पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

हर महीने 2 हजार की 'अवैध एंट्री': रतहरा की महिला बस संचालक का दर्द
शिकायतकर्ता संजना शुक्ला, जो रीवा के रतहरा क्षेत्र की निवासी हैं और लंबे समय से परिवहन व्यवसाय (बस संचालन) से जुड़ी हैं, उन्होंने सीधे तौर पर समान थाना क्षेत्र में पदस्थ बीट प्रभारी आरक्षक पवन पाठक को कटघरे में खड़ा किया है। एसपी को सौंपे गए अपने शिकायती आवेदन में संजना शुक्ला ने बेहद सनसनीखेज खुलासे किए हैं।

संजना शुक्ला का आरोप है कि आरक्षक पवन पाठक द्वारा उनके बस स्टाफ और चालकों से हर महीने 2,000 रुपये की 'अवैध एंट्री' यानी अवैध रूप से रुपयों की मांग की जाती है। महिला ऑपरेटर का कहना है कि यह वसूली लंबे समय से अनौपचारिक रूप से दबाव बनाकर की जा रही थी। जब तक पैसे दिए जाते रहे, तब तक गाड़ियां शांति से चलती रहीं, लेकिन जैसे ही इस अवैध उगाही का विरोध शुरू हुआ, पुलिस आरक्षक का रवैया पूरी तरह बदल गया। महिला उद्यमी ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि केवल उनकी बस ही नहीं, बल्कि उस रूट और क्षेत्र में चलने वाले अन्य बस ऑपरेटरों से भी इसी तरह डरा-धमकाकर हर महीने पैसे वसूले जाते हैं।

रूट परमिट होने के बाद भी बसों को रोकने और डराने का खेल
परिवहन नियमों के अनुसार, यदि किसी बस ऑपरेटर के पास क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा जारी वैध रूट परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट और बीमा के दस्तावेज हैं, तो उसे तय मार्ग पर निर्बाध रूप से वाहन चलाने का कानूनी अधिकार है। परंतु, संजना शुक्ला का आरोप है कि आरक्षक पवन पाठक के पास इन नियमों की कोई अहमियत नहीं है।

जब बस ऑपरेटर के स्टाफ ने आरक्षक की महीने की फिक्स 'रिश्वत' देने से साफ इनकार कर दिया, तो बदले की भावना से कार्रवाई शुरू कर दी गई। शिकायत के मुताबिक, आरक्षक द्वारा उनके वैध रूट परमिट वाली बसों के संचालन में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न की जाने लगीं। बसों को बीच रास्ते में बेवजह रोकना, यात्रियों के सामने स्टाफ के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना और समय सारिणी (Time Table) के अनुसार बसों को आगे न बढ़ने देना जैसी हरकतें रोज की बात बन गईं। इससे न केवल बस ऑपरेटर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि बसों में सफर करने वाले आम यात्रियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

झूठे मुकदमों की धमकी से सहमे कर्मचारी: समान थाना क्षेत्र का मामला
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिकायत में आरक्षक पर डराने-धमकाने और अपने पद का दुरुपयोग करने के बेहद संगीन आरोप हैं। संजना शुक्ला ने बताया कि जब उनके ड्राइवर और कंडक्टर ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो आरक्षक पवन पाठक ने उन्हें सीधे तौर पर सलाखों के पीछे भेजने की धमकी दे डाली।

आरक्षक द्वारा कथित तौर पर कहा गया कि यदि हर महीने तय रकम नहीं पहुंची, तो वह बस के स्टाफ को किसी भी झूठे क्रिमिनल केस या अवैध गतिविधि के मामले में फंसा देगा। पुलिस की इस खुली धमकी के बाद से बस ऑपरेटर के कर्मचारियों में भारी डर और दहशत का माहौल है। कई कर्मचारी ड्यूटी पर आने से कतरा रहे हैं, और जो काम कर रहे हैं, वे अत्यधिक मानसिक तनाव और दबाव में हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस का काम जनता और व्यापारियों को सुरक्षा देना है, लेकिन यहाँ पुलिस खुद ही भय का पर्याय बन चुकी है।

एडीशनल एसपी आरती सिंह का बयान: जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
मामला चूंकि सीधे पुलिस विभाग के एक कर्मचारी से जुड़ा था और शिकायत सीधे एसपी कार्यालय पहुंची थी, इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर रीवा की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) आरती सिंह ने आधिकारिक बयान जारी किया है।

एडीशनल एसपी आरती सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए पुष्टि की है कि बस ऑपरेटर संजना शुक्ला की ओर से एक शिकायती आवेदन पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें समान थाने के आरक्षक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, "विभाग में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस शिकायत की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में जो भी तथ्य, सबूत या बयान सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"

रीवा में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर उठते सवाल
रीवा में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है जब जमीनी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों पर अवैध वसूली के आरोप लगे हों। परिवहन व्यवसाय, विशेषकर बस और ऑटो संचालन में 'अवैध एंट्री' का खेल देश के कई हिस्सों में चर्चा का विषय रहता है, लेकिन जब कोई महिला उद्यमी सामने आकर लिखित शिकायत दर्ज कराती है, तो यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

स्थानीय नागरिकों और जागरूक संगठनों का कहना है कि यदि बीट स्तर के अधिकारी और आरक्षक इस तरह सरेआम वसूली करेंगे, तो आम जनता का पुलिस पर से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार जहाँ एक तरफ महिला सशक्तिकरण और महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ रीवा में एक महिला बस ऑपरेटर को अपना व्यवसाय चलाने के लिए पुलिस के सामने गुहार लगानी पड़ रही है। अब देखना यह होगा कि रीवा पुलिस प्रशासन अपने ही विभाग के इस आरक्षक के खिलाफ कितनी तत्परता और पारदर्शिता से जांच पूरी करता है और पीड़ित को कब तक न्याय मिलता है।