रीवा ब्रेकिंग: छुहिया घाटी में शहडोल के दंपती से लूट, गोविंदगढ़ पुलिस ने 24 घंटे में तीनों को सिखाया सबक

 

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली वारदात सामने आई है। रीवा संभाग के अंतर्गत आने वाले गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र की प्रसिद्ध और दुर्गम छुहिया घाटी में आधी रात को एक दंपती के साथ सरेराह लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर हाइवे सुरक्षा और रात के समय यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में गोविंदगढ़ थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के चंद घंटों के भीतर ही तीनों मुख्य आरोपियों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

इस लूटकांड की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह रही कि आधुनिकता और सोशल मीडिया के दौर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने लूटपाट करते समय अपने स्वयं के मोबाइल फोन से वारदात का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। बदमाशों का यह अति-आत्मविश्वास ही आखिरकार उनके गले का फंदा बन गया और पुलिस ने इसे सबसे अचूक डिजिटल सबूत के तौर पर इस्तेमाल कर उन्हें रिमांड के बाद जेल भेज दिया है। आइए इस पूरी वारदात, पुलिस की तफ्तीश और आरोपियों की पृष्ठभूमि का सिलसिलेवार विश्लेषण करते हैं।

रीवा से शहडोल लौट रहे दंपती के साथ आधी रात को क्या हुआ?
यह पूरी घटना 31 मई की देर रात (यानी 1 जून की अलसुबह) की बताई जा रही है। पीड़ित रूप सिंह गोंड अपनी पत्नी पिंकी गोंड के साथ रीवा जिला मुख्यालय से एक निजी बस में सवार होकर अपने गृहग्राम जैतपुर, जिला शहडोल की ओर लौट रहे थे। रीवा से शहडोल जाने वाला यह मार्ग छुहिया घाटी से होकर गुजरता है, जो अपनी घुमावदार सड़कों, घने जंगलों और पहाड़ी भूगोल के लिए जाना जाता है। रात के सन्नाटे में बस अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी, लेकिन तभी नियति को कुछ और ही मंजूर था।

रात के करीब 2:00 बज रहे थे, जब बस आमचुआ मंदिर के आगे पहुंची थी। इसी दौरान अचानक रूप सिंह की पत्नी पिंकी गोंड की तबीयत बेहद खराब हो गई। उन्हें उल्टी और घबराहट की शिकायत होने लगी। एक संवेदनशील और परेशान पति होने के नाते रूप सिंह ने तुरंत बस के चालक और परिचालक से गाड़ी रोकने का अनुरोध किया। चलती बस से उतरना और आधी रात को सुनसान घाटी में रुकना बेहद जोखिम भरा था, लेकिन पत्नी की बिगड़ती सेहत के आगे पीड़ित पति के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। बस रुकवाई गई और दंपती नीचे उतर गए, जिसके बाद बस आगे के लिए रवाना हो गई।

पत्नी की अचानक बिगड़ी तबीयत और अंधेरे का फायदा उठाकर आए लुटेरे
दंपती बस से उतरकर मुख्य सड़क के किनारे, झाड़ियों के पास बैठकर पिंकी की स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे थे। चारों तरफ घाना अंधेरा और सन्नाटा पसरा हुआ था। तभी अचानक मोटरसाइकिल की रोशनी चमकी और एक बाइक पर सवार तीन युवक वहां आकर रुके। रूप सिंह को लगा कि शायद कोई राहगीर मदद के लिए रुका है, लेकिन उनके मंसूबे बेहद खौफनाक थे। बाइक से उतरते ही तीनों युवकों ने दंपती को चारों तरफ से घेर लिया।

बदमाशों ने धारदार हथियार या पत्थरों का डर दिखाकर रूप सिंह को धमकाना शुरू कर दिया। चीख-पुकार मचाने पर जान से मारने की धमकी दी गई। घबराए हुए रूप सिंह ने अपनी और अपनी बीमार पत्नी की सुरक्षा के लिए विरोध नहीं किया। बदमाशों ने तलाशी लेते हुए रूप सिंह के पास रखे करीब ₹4,500 की नकदी और उनके अत्यंत महत्वपूर्ण पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी) जबरन छीन लिए। जब पीड़ित दंपती गिड़गिड़ाते रहे, तब भी उन बेरहम लुटेरों का दिल नहीं पघला। लूटपाट को अंजाम देने के बाद तीनों बदमाश मोटरसाइकिल पर सवार होकर छुहिया पहाड़ी के सघन अंधेरे रास्तों की ओर भाग निकले।

जुर्म का डिजिटल सबूत: बदमाशों ने खुद क्यों बनाया लूट का वीडियो?
इस लूटकांड की जांच के दौरान पुलिस के हाथ जो सबसे बड़ा और अप्रत्याशित सुराग लगा, वह था वारदात का लाइव वीडियो। आजकल के अपराधियों में अपराध करने के साथ-साथ उसका प्रदर्शन करने या उसे रिकॉर्ड करने की एक अजीब और आत्मघाती प्रवृत्ति देखी जा रही है। इस केस में भी यही हुआ। जब आरोपी शिव सागर, इसहाक और नीरज दंपती को डरा-धमका रहे थे, तब उनमें से एक आरोपी ने अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर लिया और पूरी लूटपाट की लाइव रिकॉर्डिंग कर ली।

शायद वे इस वीडियो का इस्तेमाल अपने अन्य आपराधिक साथियों के बीच रौब झाड़ने या बाद में पीड़ित को दोबारा ब्लैकमेल करने के लिए करना चाहते थे। लेकिन वे यह भूल गए कि डिजिटल साक्ष्य कभी झूठ नहीं बोलते। पीड़ित की शिकायत पर जब गोविंदगढ़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदेहियों को उठाया, तो उनके मोबाइल की गैलरी खंगालने पर यह वीडियो सीधे पुलिस के हाथ लग गया। पुलिस अधीक्षकों और कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, कोर्ट में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए यह वीडियो 'अकाट्य साक्ष्य' (Irrefutable Evidence) साबित होगा, जिससे आरोपी मुकर नहीं सकते।

गोविंदगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई: कैसे पकड़े गए शातिर अपराधी?
वारदात के बाद बदहवास और डरे हुए रूप सिंह गोंड ने किसी तरह सुबह होते ही गोविंदगढ़ थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई। हाइवे पर दंपती के साथ लूट की खबर मिलते ही रीवा पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में गोविंदगढ़ थाना प्रभारी ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल का मुआयना किया और आमचुआ मंदिर व आसपास के रास्तों के इन-आउट रूट्स पर नजर दौड़ाई।

चूंकि घटना रात के 2:00 बजे की थी, इसलिए पुलिस को अंदेशा था कि लुटेरे स्थानीय या आसपास के गांवों के ही हो सकते हैं, जिन्हें घाटी के भूगोल की अच्छी जानकारी हो। पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और क्षेत्र में रात के समय बिना नंबर या संदिग्ध रूप से घूमने वाले बाइक सवारों की लिस्ट तैयार की। इसी दौरान मड़वा ग्राम के कुछ युवकों पर पुलिस की सुई अटकी। संदेह के आधार पर जब तीन युवकों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया और कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उनकी थ्योरी टूट गई और उन्होंने छुहिया घाटी में की गई इस शर्मनाक वारदात को पूरी तरह स्वीकार कर लिया।

बरामदगी और मसरूका: आरोपियों की पूरी कुंडली
पकड़े गए तीनों आरोपी गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मड़वा के मूल निवासी हैं। इनकी पहचान और उम्र का विवरण इस प्रकार है:

शिव सागर पटेल (उम्र 23 वर्ष): यह इस गैंग का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है, जिसकी उम्र महज़ 23 साल है लेकिन इसके कारनामे शातिर अपराधियों जैसे हैं।
इसहाक खान (उम्र 18 वर्ष): महज 18 वर्ष की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला यह युवक भी इस वारदात में बराबर का साझीदार था।
नीरज यादव (उम्र 21 वर्ष): 21 वर्षीय यह आरोपी भी मड़वा का रहने वाला है और लूट की योजना में शामिल था।

पुलिस ने इन तीनों की निशानदेही पर इनके पास से भारी जब्ती की है, जिसे कानूनी भाषा में 'मसरूका' कहा जाता है। बरामद किए गए सामानों की सूची इस प्रकार है:

नगद राशि: लूटी गई रकम में से ₹3,600 की नकदी बरामद कर ली गई है।
मोबाइल फोन: घटना में इस्तेमाल और वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए प्रयुक्त 2 कीमती स्मार्टफोन जब्त किए गए हैं।
मोटरसाइकिल: वारदात को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की गई काले रंग की मोटरसाइकिल, जिसका पंजीयन क्रमांक MP-17-MD-1618 है, उसे भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
कुल मसरूका मूल्य: पुलिस मूल्यांकन के अनुसार, जब्त की गई मोटरसाइकिल, मोबाइल और नकदी को मिलाकर कुल संपत्ति की कीमत ₹78,600 से अधिक आंकी गई है।

गोविंदगढ़ पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से माननीय न्यायाधीश ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) के तहत रीवा जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया।

रीवा संभाग में बढ़ती आपराधिक घटनाएं और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था
छुहिया घाटी की यह घटना कोई पहली वारदात नहीं है। रीवा, सीधी और शहडोल को जोड़ने वाली यह घाटी लंबे समय से सुनसान मोड़ों और मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण अपराधियों के लिए मुफीद जगह रही है। रात के समय यहां से गुजरने वाले ट्रक चालकों और बस यात्रियों को अक्सर निशाना बनाने की कोशिश की जाती है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि हाइवे पर पुलिस पेट्रोलिंग (Highway Patrol) को और अधिक सघन करने की आवश्यकता है।

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि 'दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया' जैसे जिम्मेदार मंचों के माध्यम से इस प्रकार के मुद्दों को लगातार उठाया जाना चाहिए ताकि प्रशासन जागृत रहे। छुहिया घाटी के संवेदनशील मोड़ों पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने और पुलिस की 'चिट्ठी गश्त' (Point Patrol) को अनिवार्य करने की मांग उठ रही है। अगर समय रहते इन अंधेरे मोड़ों पर सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई, तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना भी घटित हो सकती है। फिलहाल, गोविंदगढ़ पुलिस की मुस्तैदी ने रीवा पुलिस की साख को बचाया है और अपराधियों में खौफ पैदा किया है।