सांस फूलने पर बेटे को लेकर डॉक्टर के पास पहुंची मां, मिर्गी की दवा मिलने का आरोप; कलेक्टर तक पहुंचा मामला

 
रीवा में बेटे के इलाज को लेकर महिला ने डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए। कलेक्टर ने एसजीएमएच अधीक्षक को बच्चे का उपचार कराने और मामले की जांच के निर्देश दिए।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा में सोमवार देर शाम एक महिला अपने बेटे के इलाज से जुड़ी शिकायत लेकर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के पास पहुंची। महिला ने एक निजी डॉक्टर पर बच्चे के इलाज में कथित लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। महिला के अनुसार, उसके बेटे को मुख्य रूप से सांस फूलने की परेशानी थी और इसी समस्या को लेकर वह डॉक्टर के पास गई थी। महिला ने कलेक्टर के सामने इलाज से संबंधित अपनी बात रखी और डॉक्टर के क्लीनिक से जुड़ा एक वीडियो भी सौंपा। शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्चे का इलाज कराने के लिए संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) के अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिए। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर किए जाने की बात कही गई है।

सांस फूलने की समस्या लेकर डॉक्टर के पास पहुंची थी महिला
महिला का कहना है कि उसके बेटे को सांस लेने में परेशानी और सांस फूलने जैसी समस्या हो रही थी। इसी परेशानी के कारण वह बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर गई थी। महिला के मुताबिक, बच्चे की जांच के बाद डॉक्टर की ओर से उसे मिर्गी से संबंधित दवा लिखी गई। महिला ने इस उपचार को लेकर सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि बच्चे की प्रमुख परेशानी सांस फूलना थी, जबकि उसे जिस बीमारी से संबंधित दवा दी गई, उसे लेकर वह संतुष्ट नहीं थी। हालांकि, यह महिला की ओर से लगाया गया आरोप है। इस संबंध में वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

मिर्गी की दवा लिखे जाने पर उठे सवाल
शिकायत करने वाली महिला के अनुसार, बच्चे की जांच के बाद उसे मिर्गी की दवा लिखी गई। महिला का कहना है कि उसे यह समझ नहीं आया कि सांस फूलने की शिकायत के बावजूद बच्चे को इस तरह की दवा क्यों दी गई। महिला ने अपनी शिकायत में उपचार को लेकर असहमति जताई और मामले की जांच कराने की मांग की। दूसरी ओर, संबंधित डॉक्टर ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि बच्चे के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं की गई। इसलिए फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चे की जांच और उपचार किस चिकित्सकीय आधार पर किया गया था।

एसजीएमएच की रिपोर्ट और MRI की सलाह का जिक्र
महिला ने बताया कि बच्चे को पहले संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में भी दिखाया गया था। उसके मुताबिक, वहां बच्चे की ECG जांच सामान्य आने की जानकारी मिली थी। इसके बाद महिला दोबारा संबंधित डॉक्टर के पास पहुंची। शिकायत के अनुसार, इसी दौरान बच्चे की MRI कराने की सलाह दी गई। महिला ने इन सभी घटनाओं को अपने बेटे के उपचार से जोड़ते हुए कलेक्टर के सामने अपनी शिकायत रखी। प्रशासन की ओर से अब मामले के तथ्यों की जांच कराए जाने की बात कही गई है।

MRI और ECG को लेकर क्या है महिला का दावा?
महिला के अनुसार, बच्चे की ECG रिपोर्ट सामान्य बताई गई थी। इसके बाद भी आगे की जांच के तौर पर MRI की सलाह दी गई। महिला ने इसी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति कलेक्टर के सामने दर्ज कराई। यहां यह समझना जरूरी है कि किसी जांच की आवश्यकता या उपचार की उपयुक्तता का अंतिम निर्धारण चिकित्सकीय रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच के आधार पर ही किया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने अभी मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

इलाज पर करीब 2500 रुपये खर्च होने का आरोप
महिला ने इलाज के दौरान हुए खर्च का भी जिक्र किया है। उसके अनुसार, डॉक्टर से परामर्श के दौरान दो अलग-अलग मौकों पर करीब 600-600 रुपये फीस ली गई। इसके अलावा महिला ने लगभग 1500 रुपये की दवाएं लिखे जाने की बात कही है। इस तरह महिला के अनुसार, बच्चे के उपचार के दौरान उसका कुल खर्च करीब 2500 रुपये रहा।
महिला ने इलाज की प्रक्रिया और खर्च दोनों को लेकर कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखी। प्रशासन की जांच में मेडिकल रिकॉर्ड, पर्चे, जांच रिपोर्ट और अन्य संबंधित तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

कलेक्टर को सौंपा डॉक्टर के क्लीनिक का वीडियो
शिकायत के दौरान महिला ने डॉक्टर के क्लीनिक से संबंधित बताया जा रहा एक वीडियो भी कलेक्टर को सौंपा। महिला का आरोप है कि वीडियो में डॉक्टर की ओर से मीडिया को लेकर कुछ टिप्पणियां की गई हैं। वीडियो की वास्तविकता, संदर्भ और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है। इसलिए वीडियो में दिखाई या सुनाई देने वाली सामग्री को जांच के बाद ही प्रमाणित तथ्य माना जा सकता है। महिला ने इस वीडियो को अपनी शिकायत के समर्थन में कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किया है।

कलेक्टर ने एसजीएमएच अधीक्षक को दिए निर्देश
महिला की शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मामले में तत्काल बच्चे के उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके लिए संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया। प्रशासन की ओर से मामले की जांच के बाद तथ्य सामने आने पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। इससे फिलहाल यह स्पष्ट है कि शिकायत को लेकर प्रशासन ने संज्ञान लिया है और बच्चे के उपचार को प्राथमिकता देते हुए अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं।

डॉक्टर वीरभान सिंह ने आरोपों को बताया निराधार
महिला की शिकायत के बाद संबंधित डॉक्टर वीरभान सिंह ने लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। डॉक्टर का कहना है कि बच्चे के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं की गई। डॉक्टर के अनुसार, शिकायत में लगाए गए आरोपों में सच्चाई नहीं है और मामले की जांच होने पर पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस तरह मामले में शिकायतकर्ता महिला और डॉक्टर, दोनों पक्षों की अलग-अलग बातें सामने आई हैं। प्रशासनिक जांच के बाद उपलब्ध दस्तावेजों और चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

जांच के बाद सामने आएगा पूरा मामला
फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है। प्रशासन ने बच्चे के उपचार के लिए एसजीएमएच अधीक्षक को निर्देश दिए हैं और मामले की जांच की बात कही है। जांच के दौरान बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री, डॉक्टर की ओर से की गई जांच, लिखी गई दवाएं, उपलब्ध रिपोर्ट, MRI की सलाह और इलाज से संबंधित अन्य दस्तावेजों को देखा जा सकता है।

महिला की ओर से सौंपे गए वीडियो की भी आवश्यकता पड़ने पर जांच की जा सकती है। इसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि उपचार में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं। अभी तक किसी जांच के अंतिम निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले में आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय प्रशासनिक और चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।

बच्चे के उपचार को लेकर प्रशासन का रुख
मामले में प्रशासन का पहला कदम बच्चे के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करना बताया गया है। इसके लिए एसजीएमएच को निर्देश दिए गए हैं। वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई का निर्णय लिए जाने की बात कही गई है। इससे मामले को दो हिस्सों में देखा जा सकता है—पहला बच्चे का वर्तमान उपचार और दूसरा डॉक्टर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित उपचार प्रक्रिया में कोई कमी थी या नहीं।

रीवा में बच्चे के इलाज को लेकर सामने आई शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। महिला ने डॉक्टर पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को अपनी शिकायत और क्लीनिक से संबंधित एक वीडियो सौंपा। महिला का दावा है कि बच्चे को सांस फूलने की समस्या थी, जबकि उसे मिर्गी से संबंधित दवा दी गई और बाद में MRI कराने की सलाह दी गई। दूसरी ओर, डॉक्टर वीरभान सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। कलेक्टर ने बच्चे का उपचार कराने के लिए एसजीएमएच अधीक्षक को निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है। अब जांच के निष्कर्ष से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।