रीवा बिजली विभाग का 'महा-घोटाला': रसूखदारों के तलवे चाट रहे जिम्मेदार, CityKart Mall में मौत को दावत

 
रसूखदारों की गुलामी में झुका बिजली विभाग; बिना ट्रांसफार्मर 60KW की लूट, सिटी कार्ड मॉल में सुरक्षा शून्य, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। शहर के अमहिया रोड पर स्थित श्री महेश टावर (सिटी कार्ड मॉल) सिर्फ एक व्यावसायिक इमारत नहीं, बल्कि बिजली विभाग के भ्रष्टाचार का 'स्मारक' बन चुका है। यहाँ जो खेल खेला गया है, उसने न केवल सरकारी राजस्व को चूना लगाया है, बल्कि रीवा की जनता की जान को भी दांव पर लगा दिया है। बिजली विभाग के साहबों ने अपनी जेबें गरम करने के चक्कर में नियमों को 'शराब की दुकान' के पास गिरवी रख दिया है।

60 किलोवाट का 'पावर गेम': नियमों की लाश पर खड़ा है यह मॉल
सुनिए रीवा वालों! जिस सिटी कार्ड मॉल में आप सपरिवार शॉपिंग करने जाते हैं, उसकी बुनियाद ही भ्रष्टाचार पर टिकी है। नियमानुसार जिस बिल्डिंग को 60 किलोवाट बिजली चाहिए, उसे अपना खुद का भारी-भरकम ट्रांसफार्मर लगाना था। लेकिन विभाग के 'करमचंदों' ने रसूखदार मालिक को फायदा पहुँचाने के लिए 60KW के लोड को कागजों पर 30-30 किलोवाट के दो टुकड़ों में काट दिया।

यह सीधे तौर पर विभाग की आँखों में धूल झोंकना है। क्या साहब को नहीं दिखा कि बिल्डिंग एक है, मालिक एक है, तो कनेक्शन दो क्यों? जवाब साफ है— "जब ऊपर तक पहुँचती है माया, तो नियम बन जाते हैं साया।"

सरकारी ट्रांसफार्मर पर 'डकैती': आपकी बिजली चुरा रहा है रसूखदार!
आम आदमी का एक पंखा एक्स्ट्रा चल जाए तो विभाग विजिलेंस भेज देता है, लेकिन यहाँ खुलेआम डकैती पड़ रही है। शराब दुकान के पास लगे शासकीय ट्रांसफार्मर पर इस पूरी मल्टीप्लेक्स का बोझ डाल दिया गया है।

  • नतीजा: आसपास के मोहल्लों में लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रांसफार्मर फुंकने की समस्या।
  • हकीकत: जनता अंधेरे में रहे, लेकिन साहब के 'खास' का मॉल जगमगाना चाहिए।

सावधान रीवा! सिटी कार्ड मॉल जाना मतलब जान जोखिम में डालना
दैनिक रीवा न्यूज़ का यह खुलासा आपकी रूह कंपा देगा। ग्राउंड प्लस 4 मंजिला यह इमारत बिना फायर एनओसी (Fire NOC) के चल रही है।

सोचिए: अगर ओवरलोडिंग की वजह से किसी तार में चिंगारी भड़की, तो क्या होगा? न यहाँ आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम हैं, न विभाग ने इसकी सुध ली। लिफ्ट से लेकर एसी प्लांट तक सब 'अवैध जुगाड़' पर चल रहा है। क्या बिजली विभाग और नगर निगम किसी बड़े 'उपहार कांड' (दिल्ली) का इंतजार कर रहे हैं?

साहब भागे-भागे फिर रहे, मैडम बोलीं- 'खबर लिखो तब देखेंगे'
जब हमारे संवाददाता ने शहर कार्यपालन यंत्री अभिषेक शुक्ला को इस भ्रष्टाचार के सबूत दिखाए, तो साहब बगलें झांकने लगे। उनकी चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि दाल पूरी की पूरी काली है। वहीं मुख्य अभियंता प्रमा पाण्डेय का कहना है कि "खबर लिखो तो जांच करेंगे।"

अजीब बात है! बिना शिकायत के साहबों को करोड़ों की बिल्डिंग में बिजली चोरी नहीं दिखती? क्या विभाग अंधा हो चुका है या नोटों की गड्डियों ने उनकी आँखों पर पट्टी बाँध दी है?

जनता से अपील: भ्रष्टाचारियों का बहिष्कार करें!
रीवा की जागरूक जनता को अब जागना होगा। जो मॉल आपकी सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहा है और जो विभाग आपके टैक्स के पैसे की बंदरबांट कर रहा है, उनसे सवाल पूछिए। जब तक इस अवैध कनेक्शन पर बुलडोजर नहीं चलता और दोषी अधिकारियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक रीवा की सुरक्षा खतरे में है।

साहबों कान खोलकर सुन लो— यह जनता की अदालत है, यहाँ हिसाब बराबर होकर रहेगा!