सिस्टम का 'ब्लैक होल' बना रीवा CMHO ऑफिस: जैम पोर्टल से चहेतों को बांटी रेवड़ी, अब कलेक्टर-कमिश्नर के रडार पर 'साहब'

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. यत्नेश त्रिपाठी की पदस्थापना के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला बताया जा रहा है। मार्च 2026 के क्लोजिंग सत्र में बजट को लैप्स होने से बचाने की आड़ में लाखों रुपए की दवाइयां नियम विरुद्ध तरीके से खरीदी गईं।

जैम (GeM) पोर्टल के जरिए चहेती फर्मों को उपकृत करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, जिला स्टोर में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद 'लोकल पर्चेज' के नाम पर लाखों का खेल हुआ। बिना किसी राज्य स्तरीय अनुमति के सीधे जैम पोर्टल के माध्यम से अपनी पसंदीदा फर्मों को क्रय आदेश जारी कर दिए गए।

  • नियमों की अनदेखी: मप्र पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन भोपाल से सप्लाई होने वाली दवाइयों को गुपचुप तरीके से स्थानीय स्तर पर खरीदा गया।
  • बिना लैब टेस्ट भुगतान: खरीदी गई दवाइयों का न तो लैब टेस्ट कराया गया और न ही निर्माता फर्मों का कोई रिकॉर्ड कार्यालय में मौजूद है।
  • फर्जी टेंडर फीडिंग: आरोप है कि पोर्टल पर फर्जी तरीके से टेंडर डेटा फीड कर भुगतान की राह आसान की गई।

स्टोर की रंगाई-पुताई में भी 'कमीशन' का तड़का
भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं हैं। जिला स्टोर की मरम्मत और रंगाई-पुताई के कार्य में भी बिना टेंडर निकाले ठेका दे दिया गया। बजट हेड बदलकर किए गए इस कार्य में स्थिति यह है कि काम अभी अधूरा है, लेकिन स्टोर कीपर ने बिल सत्यापित कर भुगतान करवा दिया है।

दागी अधिकारियों को दोबारा मलाईदार पद पर बिठाया
इस पूरे मामले में स्टोर कीपर रवि प्रकाश दुबे की भूमिका सबसे संदिग्ध है। पूर्व में अनियमितताओं के चलते उन्हें जिला अस्पताल के लिए मुक्त कर दिया गया था, लेकिन नए CMHO ने आते ही उन्हें फिर से जिला स्टोर की जिम्मेदारी सौंप दी।

25 दिन में 'एक फ्लोर' नीचे नहीं उतर पाई जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय संचालक ने 2 अप्रैल 2026 को डॉ. जीएस परिहार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। टीम को 7 दिन में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन 25 दिन बीत जाने के बाद भी जांच ठंडे बस्ते में है। हैरानी की बात यह है कि जांच टीम का कार्यालय प्रथम तल पर है और स्टोर भूतल पर, फिर भी अधिकारी जांच करने नीचे नहीं उतर सके।

कलेक्टर और कमिश्नर तक पहुंची भ्रष्टाचार की गूंज
अधिवक्ता संतोष तिवारी ने अब इस पूरे महा-घोटाले की लिखित शिकायत रीवा कलेक्टर और कमिश्नर से की है। शिकायत में रिद्धि-सिद्धि इंटरप्राइजेज, एसएस साल्यूशन और तिवारी इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के नाम उजागर किए गए हैं, जिनके माध्यम से लगभग 30 से 40 लाख रुपए का बंदरबांट किया गया है।