अधिकारियों की फौज लेकर जमीन पर उतरे रीवा कलेक्टर: नॉन-एसी बस से पहुंचे टिकुरी गांव, चौपाल में ग्राउंड जीरो पर सुनीं समस्याएं
रीवा। जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में उस वक्त एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी खुद तामझाम छोड़कर बेहद सादगी के साथ ग्रामीण अंचलों का हाल जानने निकले। गंगेव जनपद पंचायत के टिकुरी गांव में आयोजित विकास चौपाल में शामिल होने के लिए कलेक्टर किसी वीआईपी गाड़ी से नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट से 42 विभागीय अधिकारियों को अपने साथ लेकर एक साधारण नॉन-एसी बस में सवार होकर पहुंचे। गांव पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों के वीआईपी कल्चर को किनारे करते हुए सभी को ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठाया और सीधे जनता से संवाद शुरू किया।
ग्राम पंचायत परिसर में आयोजित इस विशेष चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने अपनी बुनियादी समस्याओं को लेकर प्रशासनिक अमले के सामने खुलकर बात रखी। चौपाल में मुख्य रूप से जमीन विवाद, खस्ताहाल सड़कें, पेयजल संकट, प्रधानमंत्री आवास और आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन में आ रही विसंगतियों के मुद्दे छाए रहे।
लापरवाही पर कड़ा एक्शन: नायब तहसीलदार को नोटिस, सुपरवाइजर सस्पेंड
कलेक्टर ने मौके पर ही राजस्व मामलों की फाइलों को खंगाला। सीमांकन (जमीन की पैमाइश) के लंबित मामलों में अत्यधिक देरी पाए जाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित क्षेत्र के नायब तहसीलदार को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, ग्रामीणों द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र के समय पर न खुलने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित सुपरवाइजर को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया और सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस थमा दिया।
रास्ता विवाद सुलझाने और नल-जल योजना को गति देने के निर्देश
गांव के भीतर संकरी सड़कों और आपसी रास्ता विवाद की शिकायतों पर कलेक्टर ने मातहत अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर पैमाइश करने तथा सड़क चौड़ीकरण की बाधाओं को दूर करने के लिए पाबंद किया। उन्होंने कहा कि गांव में ही विभागीय शिविर लगाकर सभी लंबित फाइलों का निपटारा किया जाए, ताकि ग्रामीणों को मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें।
चौपाल में अन्य प्रमुख योजनाओं पर भी कड़े फैसले लिए गए:
- पीएम आवास योजना: जिन हितग्राहियों ने पहली किस्त मिलने के बाद भी मकान का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है, उनके आवास पात्रता को निरस्त करने की कार्यवाही के निर्देश दिए गए।
- पेयजल संकट: नल-जल योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने पर पीएचई (PHE) के उपयंत्री (सब-इंजीनियर) और स्थानीय रोजगार सहायक को नोटिस जारी किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने सुचारू जलापूर्ति के बदले पानी का नियमित शुल्क देने पर भी रजामंदी जताई।
- बिजली व स्वरोजगार: विद्युत विभाग को गांव के हर घर में अविलंब बिजली मीटर लगाने और टंट्या मामा योजना के तहत पात्र युवाओं के स्वरोजगार ऋण प्रकरणों को जल्द स्वीकृत कराने को कहा गया।
अधिकारियों को दो टूक चेतावनी
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने चौपाल के समापन पर सभी जिला और खंड स्तरीय अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि इस चौपाल के बाद भी टिकुरी गांव की कोई समस्या जिला स्तर की जनसुनवाई में पहुंचती है, तो इसे संबंधित अधिकारी की अक्षमता माना जाएगा और उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
इस औचक जमीनी निरीक्षण और चौपाल के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मेहताब सिंह गुर्जर, जनपद सीईओ प्राची चतुर्वेदी सहित तमाम विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।