रीवा: कांग्रेस का 'मौन' शक्ति प्रदर्शन; मनरेगा को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे दिग्गज, सरकार पर साधा निशाना

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो)  रीवा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, उसे बचाने के लिए कांग्रेस ने रीवा की सड़कों पर हुंकार भरी है। रविवार को "मनरेगा बचाओ अभियान" के तहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौन धरना देकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

तख्तियां और मौन: विरोध का गांधीवादी तरीका
शहर के प्रमुख स्थल पर आयोजित इस धरने में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर मनरेगा को बचाने और मजदूरों को हक देने के नारे लिखे थे। बिना किसी शोर-शराबे के, इस 'मौन' धरने के जरिए कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार बहरी हो चुकी है और मजदूरों की चीखें नहीं सुन रही है।

राजेंद्र शर्मा का तीखा हमला: "साजिश के तहत कमजोर हो रही योजना"
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने इस मौके पर कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीबों के सम्मान से जीने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जानबूझकर बजट में कटौती और जटिल नियमों के जरिए इस योजना को खत्म करने की साजिश रच रही है। शर्मा ने कहा, "मजदूरों को समय पर भुगतान न मिलना और काम की मांग करने पर टालमटोल करना इस बात का सबूत है कि सरकार गरीबों की थाली से रोटी छीनना चाहती है।"

महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' की चिंता: बढ़ता पलायन और बेरोजगारी
रीवा महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' ने ग्रामीण इलाकों से हो रहे पलायन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "जब गांव में काम नहीं मिलता, तो मजदूर शहर की ओर भागता है। मनरेगा के कमजोर होने से हमारे जिले के ग्रामीण युवा और मजदूर दूसरे राज्यों में भटकने को मजबूर हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला, तो यह मौन धरना आने वाले समय में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगा।

कांग्रेस की 4 सूत्रीय मांगें
प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं:

  • 100 दिन के रोजगार की गारंटी: साल में कम से कम 100 दिन का काम अनिवार्य रूप से दिया जाए।
  • मजदूरी में वृद्धि: वर्तमान महंगाई दर को देखते हुए मजदूरी को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए।
  • समय पर भुगतान: काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी सीधे खाते में पहुंचे।
  • बजट में बढ़ोत्तरी: योजना के लिए आवंटित फंड में कटौती को तत्काल बंद किया जाए।

निष्कर्ष
रीवा में कांग्रेस का यह 'मौन धरना' इस बात का संकेत है कि विपक्ष अब ग्रामीण मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर चुका है। मनरेगा जैसे बुनियादी मुद्दे को उठाकर कांग्रेस ने सीधे तौर पर ग्रामीण मतदाताओं से जुड़ने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इन मांगों पर क्या संज्ञान लेते हैं।