4 महीने का गुस्सा और 1 घंटे का तांडव : बिना चेंबर और पार्किंग के चल रहा रीवा का नया कोर्ट, वकीलों ने थाना प्रभारी को धक्के मारकर परिसर से खदेड़ा

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा के नवीन न्यायालय परिसर में सोमवार को उस समय मर्यादा की सारी सीमाएं टूट गईं, जब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने न केवल न्यायिक कार्य ठप किया, बल्कि सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल के साथ भी अभद्रता की। पार्किंग और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर वकीलों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने थाना प्रभारी को धक्के देकर परिसर से बाहर निकाल दिया।

पार्किंग और चेंबर विवाद: 4 महीने से सुलग रही थी आग
नवीन न्यायालय परिसर में शिफ्ट होने के बाद से ही अधिवक्ता कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। वकीलों का आरोप है कि पिछले 4 महीनों से वे चेंबर अलॉटमेंट, अव्यवस्थित पार्किंग, पेयजल और कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। पार्किंग को लेकर रोजाना विवाद होता है, जिससे वकीलों को बैठने और काम करने में भारी असुविधा हो रही है। इसी नाराजगी ने सोमवार को एक उग्र आंदोलन का रूप ले लिया।

थाना प्रभारी के साथ बदसलूकी: "यह हमारा इलाका है, बाहर जाओ"
प्रदर्शन के दौरान सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आया जब अधिवक्ताओं ने वहां मौजूद थाना प्रभारी हितेंद्रनाथ शर्मा को घेर लिया। वकीलों ने दो टूक शब्दों में कहा, "यह न्यायालय परिसर हमारा है, यहां आपका कोई काम नहीं है।" इसके बाद सैकड़ों वकीलों ने जोर लगाकर थाना प्रभारी को धक्का देना शुरू किया और उन्हें बैरिकेड्स पर गिरा दिया। इतना ही नहीं, उन्हें डांटकर और धक्के मारकर परिसर की सीमा से बाहर खदेड़ दिया गया।

प्रधान न्यायाधीश की मांग पर अड़े वकील: प्रतिनिधि की बात ठुकराई
नाराज वकील किसी भी छोटे अधिकारी से बात करने को तैयार नहीं थे। उनकी स्पष्ट मांग थी कि प्रधान न्यायाधीश स्वयं मौके पर आएं और उनकी समस्याओं को सुनें। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश के प्रतिनिधि ने मौके पर पहुँचकर वकीलों को समझाने और समस्याओं के जल्द निराकरण का आश्वासन दिया, लेकिन अधिवक्ताओं ने इसे केवल 'खोखला वादा' बताकर ठुकरा दिया।

मूलभूत सुविधाओं का टोटा: शौचालय और पेयजल की भी समस्या
वकीलों का कहना है कि नवीन परिसर कहने को तो आधुनिक है, लेकिन यहां वकीलों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था तक नहीं है। शौचालय और पीने के साफ पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। चेंबर न होने के कारण कई वकील खुले में बैठने को मजबूर हैं, जिससे उनकी फाइलें और क्लाइंट्स दोनों असुरक्षित हैं।

अधिवक्ताओं ने थाना प्रभारी को धक्के मारकर बाहर किया।

पक्षकारों की बढ़ी मुसीबत: दूर-दराज से आए लोग रहे परेशान
इस हंगामे और काम बंद (Strike) के कारण दूर-दराज से पेशी पर आए पक्षकारों को भारी परेशानी हुई। कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई टल गई, जिससे न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हुई। कोर्ट परिसर में घंटों तक अफरातफरी का माहौल बना रहा और लोग बिना किसी कार्रवाई के घर लौटने को मजबूर हुए।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष: सीएसपी राजीव पाठक का बयान
पूरे विवाद पर सीएसपी राजीव पाठक ने बताया कि न्यायालय के वरिष्ठ अधिकारियों और वकीलों के बीच किसी बात को लेकर आपसी अनबन हुई थी। पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहां मौजूद थी। पार्किंग को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने बड़ा रूप ले लिया। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार कर रही है।

निष्कर्ष: उग्र आंदोलन की चेतावनी
रीवा के अधिवक्ताओं ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में चेंबर अलॉटमेंट और पार्किंग की समस्या का स्थाई समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा। थाना प्रभारी के साथ हुई घटना ने पुलिस और वकीलों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: रीवा कोर्ट में वकीलों ने थाना प्रभारी को क्यों निकाला? उत्तर: वकीलों का मानना था कि न्यायालय परिसर उनका अधिकार क्षेत्र है और वहां पुलिस की मौजूदगी की उन्हें जरूरत नहीं है। इसी दौरान धक्का-मुक्की हुई।
प्रश्न 2: वकीलों की मुख्य मांगें क्या हैं? उत्तर: मुख्य रूप से चेंबर का अलॉटमेंट, व्यवस्थित पार्किंग, कैंटीन, पेयजल और शौचालयों की बेहतर सुविधा।
प्रश्न 3: क्या पुलिस ने वकीलों पर कोई कानूनी कार्रवाई की है? उत्तर: फिलहाल सीएसपी ने इसे आपसी अनबन बताया है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच की जा सकती है।
प्रश्न 4: हड़ताल के कारण अदालती कामकाज का क्या हुआ? उत्तर: सोमवार को कामकाज पूरी तरह ठप रहा, जिससे सैकड़ों पक्षकारों की पेशी नहीं हो सकी और मामले आगे की तारीखों के लिए बढ़ गए।