आज चोटी उखाड़ी है, कल जिंदा जला दूँगा... रीवा में दबंग की गुंडागर्दी, पीड़ित यादव युवक ने जेब में छिपाई अपनी उखड़ी हुई 'आस्था'!
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सामाजिक समरसता और धार्मिक स्वतंत्रता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के मझिगवां गांव में एक युवक की 7 साल पुरानी आस्था को न केवल अपमानित किया गया, बल्कि शारीरिक बल का प्रयोग कर उसे जड़ से उखाड़ दिया गया।
जाति के नाम पर नफरत: "कल कथा करने भी जाओगे?"
पीड़ित रोहित यादव, जो पेशे से ड्राइवर और सीवर लाइन प्रोजेक्ट में हेल्पर है, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह हनुमान जी का अनन्य भक्त है और पिछले सात वर्षों से श्रद्धावश चोटी रख रहा था। घटना वाले दिन जब वह मशीन के लिए पेट्रोल निकाल रहा था, तभी आरोपी दीपक पांडेय वहां पहुंचा। आरोपी ने रोहित की जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और कहा, "तू यादव है, तुझे चोटी रखने का अधिकार नहीं है। आज चोटी रखी है, कल क्या कथा बांचने जाओगे?"
हैवानियत की हद: जमीन पर पटककर उखाड़ी चोटी
रोहित के अनुसार, आरोपी ने उसे बुरी तरह पीटा और जमीन पर पटक दिया। इसके बाद आरोपी ने रोहित के शरीर पर अपना पैर रखकर पूरी ताकत से उसकी 12 इंच लंबी चोटी खींचकर उखाड़ दी। इस बर्बरता के दौरान रोहित दर्द से कराहता रहा, लेकिन आरोपी का दिल नहीं पसीजा। आरोपी ने उसे जिंदा जलाने की धमकी भी दी।
पुलिस का संवेदनहीन चेहरा: "इसे कूड़ेदान में फेंक दो"
जब पीड़ित न्याय की उम्मीद में अपनी उखड़ी हुई चोटी लेकर बैकुंठपुर थाने पहुंचा, तो वहां मौजूद मुंशी का व्यवहार और भी चौंकाने वाला था। रोहित का आरोप है कि पुलिसकर्मी ने उसकी व्यथा सुनने के बजाय कहा, "इस चोटी को डस्टबिन (कूड़ेदान) में डाल दो।" अपनी आस्था को अपमानित होते देख रोहित ने चोटी को अपनी जेब में छिपा लिया ताकि उसे साक्ष्य (Evidence) के तौर पर इस्तेमाल कर सके।
सिस्टम को मैनेज करने का दावा: आरोपी की खुली चुनौती
आरोपी दीपक पांडेय ने रोहित को डराते हुए दावा किया कि पुलिस और डॉक्टर सब उसकी पहुंच में हैं। उसने कहा कि उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है और कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाया है। इस खौफ के कारण रोहित और उसकी टीम ने सुरक्षा कारणों से मझिगवां गांव का काम रोक दिया है और 20 किमी दूर दूसरे गांव में शिफ्ट हो गए हैं।
सरपंच ने कहा- पूरा गांव शर्मिंदा है
मझिगवां के सरपंच राहुल सिंह ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की जातिवादी मानसिकता ने पूरे गांव की छवि खराब की है। सरपंच ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी परिवार ने अपनी हरकतों में सुधार नहीं किया, तो गांव उनका सामाजिक बहिष्कार करेगा।
निष्कर्ष
यह घटना केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति की धार्मिक आस्था और उसके संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। जहां एक ओर देश 'विकसित भारत' की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जाति के नाम पर आस्था का अपमान सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है। अब देखना यह है कि रीवा पुलिस इस मामले में कितनी निष्पक्षता से कार्रवाई करती है।