रीवा अधिवक्ता संघ चुनाव 2026: कचहरी में चुनावी घमासान, सुविधाओं की कमी और 'परिवर्तन' के नारे के साथ मैदान में दिग्गज

 

अधिवक्ता संघ चुनाव में बुनियादी सुविधाओं और भ्रष्टाचार को बनाया मुद्दा। जानें अध्यक्ष पद के दावेदार और चुनावी गणित।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिला अधिवक्ता संघ के आगामी चुनाव को लेकर न्यायालय परिसर में चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि कल है, जिसके चलते सुबह से ही संभावित प्रत्याशियों और उनके समर्थकों का हुजूम उमड़ रहा है। इस बार का चुनाव केवल पद की लड़ाई नहीं, बल्कि नवीन न्यायालय भवन (New Court Building) में व्याप्त अव्यवस्थाओं के खिलाफ एक 'जनादेश' माना जा रहा है।

वर्तमान सचिव देवी शंकर ओझा का विद्रोह: अध्यक्ष पद के लिए ठोकी ताल 
संघ के वर्तमान सचिव देवी शंकर ओझा ने इस बार सीधे अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर मुकाबले को रोचक बना दिया है। ओझा का सीधा आरोप है कि संघ का वर्तमान नेतृत्व 'स्वेच्छाचारिता' का शिकार है। उन्होंने खुलासा किया कि उनके कार्यकाल में टेबल-कुर्सी की व्यवस्था के लिए सांसद और विधायक निधि से कुल ₹65 लाख की व्यवस्था की गई थी, लेकिन संघ की आंतरिक राजनीति और स्वार्थ के कारण यह पैसा लेप्स हो गया.

ओझा ने साफ कहा कि इस बार "परिवर्तन निश्चित है" और वे वकीलों के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं।

चुनावी मुद्दे: पानी, सफाई और बैठने की जगह का अकाल 
इस चुनाव में किसी राजनीतिक विचारधारा से ज्यादा 'बुनियादी सुविधाएं' हावी हैं। प्रत्याशियों ने प्रचार के दौरान निम्नलिखित प्रमुख समस्याओं को उजागर किया है:

  • जल आपूर्ति: भीषण गर्मी में वकीलों को पाइपों के पास खड़ा होना पड़ता है।
  • शौचालय की स्थिति: शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
  • बैठक व्यवस्था: वकीलों के बैठने के लिए पर्याप्त शेड और फर्नीचर नहीं है।
  • लिफ्ट की खराबी: नवीन भवन में लिफ्ट अक्सर खराब रहती है, जिससे वरिष्ठ अधिवक्ताओं को परेशानी होती है।

महिला अधिवक्ताओं की बढ़ती सक्रियता: अनामिका और पूनम के इरादे 
रीवा अधिवक्ता संघ के इतिहास में इस बार महिला वकीलों की भागीदारी बहुत प्रभावी दिख रही है। अनामिका ओझा (कार्यकारिणी सदस्य प्रत्याशी) का कहना है कि वे युवा महिला वकीलों की आवाज बनेंगी और कोर्ट कैंपस में उनके अधिकारों और सुविधाओं की बात करेंगी। वहीं, पूनम पटेल ने भी कार्यकारिणी पद के लिए नामांकन भरा है और उनका मुख्य उद्देश्य न्यायालय की अव्यवस्थाओं के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाना है।

अध्यक्ष पद के 'रणबांकुरे': कौन किस पर भारी?
अध्यक्ष पद के लिए रीवा के कई नामचीन चेहरे मैदान में हैं:
| उम्मीदवार का नाम | पृष्ठभूमि / टिप्पणी |

  • | राजेंद्र पांडेय | वर्तमान अध्यक्ष | 
  • | अशोक कुमार शुक्ला | वरिष्ठ अधिवक्ता |
  • | विजेंद्र सिंह | वरिष्ठ अधिवक्ता |
  • | श्रीकांत तिवारी | पूर्व अध्यक्ष, अनुभवी चेहरा |
  • | प्रभात कुमार मिश्रा | पूर्व पदाधिकारी, मजबूत पकड़ |
  • | देवी शंकर ओझा | वर्तमान सचिव, परिवर्तन के समर्थक |
  • | वीरेंद्र कुमार द्विवेदी | लोकप्रिय अधिवक्ता |
  • | कामता प्रसाद तिवारी | वरिष्ठ अधिवक्ता |

अन्य पदों पर भी कड़ा मुकाबला 
केवल अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि अन्य पदों के लिए भी कांटे की टक्कर है:

  • उपाध्यक्ष पद : शारदा सिंह, राजकिशोर चतुर्वेदी, नुरूल हसन खान,
  • सचिव पद: धीरेन्द्रनाथ चतुर्वेदी, सुलभ पांडे,मनीष सोहगौरा,दिनेश सेन और अन्य बीच मुकाबला।
  • सह-सचिव पद: इंद्रेश मिश्रा (राजा गौतम), विवेक कुमार पांडे और अनुराग प्रताप सिंह और अन्य हैं।
  • कोषाध्यक्ष पद: राममणि मिश्रा,अशोक कुमार द्विवेदी,राजेंद्र कुमार जायसवाल और अन्य मैदान में हैं।
  • ग्रंथपाल पद: शत्रुघ्न तिवारी ,सत्येंद्र अग्निहोत्री ने अपनी दावेदारी पेश की है।

₹6500 की वसूली और भ्रष्टाचार का आरोप 
वर्तमान सचिव देवी शंकर ओझा ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं से ₹6500 की राशि ली गई थी, जिसका सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने संकल्प लिया है कि यदि गलत भुगतान हुआ है तो उसकी वसूली की जाएगी और अधिवक्ताओं का पैसा उन्हें सुविधाओं के रूप में वापस मिलेगा।

मतदान और परिणाम की तिथि 
चुनाव प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। नामांकन की प्रक्रिया कल समाप्त हो रही है। जानकारी के अनुसार, 25 तारीख को मतदान संपन्न होगा। दो दिनों तक चलने वाली इस चुनावी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा कि रीवा के अधिवक्ता किस पर भरोसा जताते हैं।

रीवा अधिवक्ता संघ का भविष्य
यह चुनाव रीवा के अधिवक्ता समुदाय के लिए एक निर्णायक मोड़ है। वकीलों का गुस्सा साफ़ तौर पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर है। वर्तमान सचिव का बागी रुख और महिला प्रत्याशियों का उत्साह इस बार कुछ बड़े उलटफेर के संकेत दे रहा है।