रीवा में 13 करोड़ का नशा जब्त होने के बाद डिप्टी सीएम की हाईलेवल मीटिंग: क्या अब सच में हरकत में आएगी पुलिस और सुधरेगी बदहाल ट्रैफिक?

 

रीवा में नशीली सिरप और अवैध ड्रग्स के खिलाफ डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दिए कड़े निर्देश Rewa Drug Crackdown Update

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य क्षेत्र के प्रमुख व्यावसायिक और सांस्कृतिक केंद्र रीवा में अवैध नशीली सिरप और विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री एक बेहद गंभीर सामाजिक चुनौती बनकर उभरी है। शहर के अलग-अलग मोहल्लों, खाली मैदानों और सुनसान गलियों में प्रतिबंधित कोरेक्स सिरप की खाली शीशियां बिखरी मिलना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण रहा है कि नशे का यह जाल भीतर तक फैला हुआ है। इस भयावह स्थिति को ध्यान में रखते हुए शासन और प्रशासन ने अब इस अवैध कारोबार की जड़ पर प्रहार करने की पूरी तैयारी कर ली है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की विशेष पहल पर शहर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पुलिस और प्रशासनिक अमले को स्पष्ट शब्दों में यह संदेश दे दिया गया है कि नशे के सौदागरों के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाए।

सरकार का मानना है कि नशीली सिरप की आपूर्ति श्रृंखला को जब तक पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाएगा, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। हाल के दिनों में बाजार में नशीली सिरप की कीमतों में हुई भारी वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पुलिस की लगातार दबिश के कारण इसकी आपूर्ति में भारी कमी आई है। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ा यह अंतर यह दर्शाता है कि पुलिस की रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि जब तक रीवा जिले से नशीली सिरप का एक भी कतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक यह लड़ाई अधूरी है। इसी संकल्प के साथ अब विंध्य क्षेत्र को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने का महाअभियान शुरू किया जा चुका है।

डिप्टी सीएम की समीक्षा बैठक और नशामुक्ति की ठोस रणनीति
रीवा के सर्किट हाउस स्थित नवीन भवन सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की। बैठक में क्षेत्र में चलाए जा रहे नशामुक्त भारत अभियान की गहन प्रगति समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी उच्च अधिकारियों को निर्देशित किया कि केवल धरातल पर नशीली सिरप बेचने वाले छोटे पेडलर्स तक सीमित रहने के बजाय उन बड़े माफियाओं, उत्पादकों और मुख्य सप्लायरों पर शिकंजा कसा जाए जो दूसरे राज्यों या जिलों से इसकी खेप यहां भेजते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सप्लाई नेटवर्क के मुख्य आकाओं को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा, तब तक इस अवैध व्यापार पर पूर्ण विराम लगाना संभव नहीं होगा।

इस उच्चस्तरीय बैठक में पुलिस और प्रशासन के शीर्ष अधिकारी एक साथ मौजूद रहे। रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत, पुलिस उपनिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भावना मरावी, संजय मिश्रा, राजीव पाठक तथा नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति में रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों से कहा कि कड़े दंडात्मक कदमों के साथ-साथ समाज के प्रभावित वर्ग को सही राह पर लाना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए कानून व्यवस्था के पालन के साथ सामाजिक सुधार और मानवीय दृष्टिकोण को शामिल करते हुए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है।

रीवा संभाग में नशे के खिलाफ पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
रीवा संभाग में पिछले 18 महीनों के दौरान चलाए गए विशेष अभियानों के अंतर्गत पुलिस विभाग ने मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत द्वारा बैठक में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे संभाग में 1615 नशे के सौदागरों को गिरफ्तार करके जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पुलिस की इस आक्रामक रणनीति से नशे के अवैध सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। इस समयावधि में पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी करके भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप, गांजा, एमडी ड्रग्स, हेरोइन और नशीली गोलियां जब्त की हैं।

जब्त किए गए मादक पदार्थों का कुल मूल्य 13 करोड़ 17 लाख 39 हजार 600 रुपये आंका गया है। इसमें 5,535 किलोग्राम से अधिक गांजा, 97,665 शीशी प्रतिबंधित कोरेक्स सिरप, 4,13,310 नग नशीली गोलियां व कैप्सूल तथा अफीम के 450 हरे पौधे शामिल हैं। इसके अलावा रीवा संभाग में पहली बार सिंथेटिक और महंगे नशे के खिलाफ भी बड़ी सफलता मिली है, जिसके तहत 123.6 ग्राम हेरोइन, 206.54 ग्राम स्मैक, 244 ग्राम ब्राउन शुगर और 3 किलो 87 ग्राम एमडी ड्रग्स की बरामदगी की गई है। पुलिस की इन चौतरफा कार्यवाहियों से यह साफ हो गया है कि रीवा में नशे का नेटवर्क चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, उसे समूल नष्ट करने के लिए प्रशासन पूरी तरह कटिबद्ध है।

करोड़ों के वाहन जब्त और अवैध शराब नेटवर्क पर कड़ा प्रहार
नशे की तस्करी में लगे अपराधियों के आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए रीवा पुलिस ने उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को भी बड़े पैमाने पर जब्त किया है। तस्कर अक्सर माल परिवहन के लिए दोपहिया और चारपहिया वाहनों का सहारा लेते हैं। पिछले डेढ़ साल में पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त 181 दोपहिया वाहन और 131 चारपहिया लग्जरी वाहन जब्त किए हैं। इन जब्त वाहनों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 10 करोड़ 41 लाख 70 हजार रुपये है। वाहनों की इतनी बड़ी जब्ती से तस्करों की लॉजिस्टिक क्षमता पूरी तरह टूट चुकी है और वे बैकफुट पर आ गए हैं।

मादक पदार्थों के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार पर भी पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। आबकारी एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने संभाग भर में अवैध शराब की बिक्री और परिवहन के खिलाफ 11,998 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए हैं। इन मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए 12,199 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की टीमों ने छापेमारी के दौरान 35,890 लीटर अवैध देशी शराब और 22,807 लीटर जहरीली व अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है, जिसकी कुल बाजार कीमत 3 करोड़ 97 लाख 53 हजार 333 रुपये है। इस प्रकार कुल मिलाकर अरबों रुपये की अवैध सामग्री और वाहनों की जब्ती ने नशे के तस्करों की रीढ़ तोड़ दी है।

नशे की लत के शिकार लोगों का पुनर्वास और सामाजिक सुधार
दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ समीक्षा बैठक में इस बात पर भी विशेष बल दिया गया कि नशे के दलदल में फंस चुके युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना बेहद जरूरी है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने निर्देश दिए कि पुलिस जहां तस्करों को सलाखों के पीछे भेजे, वहीं प्रशासन नशे से पीड़ित लोगों के उपचार और मानसिक पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करे। इसके लिए जिला स्तर पर नशामुक्ति केंद्रों को पूरी तरह सक्रिय और सर्वसुविधायुक्त बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर को जिम्मेदारी दी गई है कि वे ऐसे पीड़ित व्यक्तियों की सूची तैयार कराएं जिन्हें तुरंत चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता है।

बैठक में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने आश्वस्त किया कि इसी सप्ताह शहर के 50 ऐसे व्यक्तियों को चिह्नित किया जाएगा जो अत्यधिक नशे की गिरफ्त में हैं और उन्हें पुनर्वास के लिए नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया जाएगा। कोरेक्स सिरप और अन्य घातक दवाओं की चपेट में आए युवाओं को नया जीवन देने के लिए रीवा की प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जा रहा है। काउंसलिंग, उचित इलाज और वोकेशनल ट्रेनिंग के माध्यम से इन युवाओं को पुनः समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा ताकि वे दोबारा इस लत का शिकार न बनें।

शहर की यातायात व्यवस्था और भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्त निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने केवल नशे के मुद्दे तक सीमित न रहते हुए रीवा शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर भी अधिकारियों की क्लास ली। रीवा शहर की सड़कों पर दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाम की समस्या, चौराहों पर बेतरतीब खड़े रहने वाले ठेले-रेहड़ी और रात के समय शहर के भीतर नो-एंट्री का उल्लंघन कर प्रवेश करने वाले भारी वाहनों के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इन जनसमस्याओं को संज्ञान में लेते हुए डिप्टी सीएम ने पुलिस प्रशासन को अविलंब कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि रात में शहर के अंदर भारी वाहनों के अनधिकृत प्रवेश को हर हाल में रोका जाए और इसके लिए प्रमुख सीमाओं पर चेकपोस्ट मजबूत किए जाएं। मुख्य चौराहों और व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्रों से अवैध रूप से सड़क घेरे ठेले वालों को व्यवस्थित वेंडर जोन में शिफ्ट कराया जाए ताकि आवागमन सुगम हो सके। उप मुख्यमंत्री के इन सख्त निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रीवा की पुलिस और नगर निगम की टीम हरकत में आएगी, जिससे शहरवासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी और यातायात व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।