रीवा DEO की 'बड़ी कार्यवाही : 'शराबी गुरु' का वीडियो हुआ वायरल, स्कूल में ही लगा ली थी 'महफ़िल', क्या ऐसे शिक्षक बनाएंगे देश का भविष्य?

 

रीवा के मऊगंज में शिक्षक का स्कूल परिसर में शराब पीकर बेहोश होने का वीडियो हुआ था वायरल, विभाग ने सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत लिया एक्शन।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा जिले के मऊगंज विकासखंड में एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जहाँ एक सहायक शिक्षक, अंजनी कुमार साकेत, को स्कूल परिसर में ही शराब के नशे में बेहोशी की हालत में पाया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने के लिए एक कड़ा संदेश है।

वायरल वीडियो ने खोली पोल
यह पूरा मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने सहायक शिक्षक अंजनी कुमार साकेत और उनके एक सहयोगी का वीडियो बनाया। वीडियो में, दोनों स्कूल परिसर के भीतर ही शराब पीकर बेहोशी की हालत में पड़े थे। यह दृश्य न केवल हैरान करने वाला था, बल्कि इसने शिक्षा के पवित्र स्थान की गरिमा को भी ठेस पहुँचाई। स्थानीय लोगों ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद यह जिला शिक्षा विभाग के संज्ञान में आया।

जांच के बाद हुआ निलंबन
वायरल वीडियो की गंभीरता को देखते हुए, जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्र ने तत्काल बीईओ मऊगंज को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया। बीईओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि शिक्षक अंजनी कुमार साकेत वाकई शराब के नशे में थे, जो मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कदाचरण की श्रेणी में आता है। नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी कर्मचारी का इस तरह का आचरण सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर, डीईओ रामराज मिश्र ने बिना देर किए सहायक शिक्षक अंजनी कुमार साकेत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय बीईओ कार्यालय हनुमना नियत किया गया है।

सरकार का कड़ा रुख और भविष्य की चिंता
यह घटना शिक्षकों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक शिक्षक, जिसे समाज में आदर्श माना जाता है, जब खुद इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार में लिप्त होता है, तो यह छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए निराशाजनक होता है। जिला शिक्षा अधिकारी की यह त्वरित और सख्त कार्रवाई यह दर्शाती है कि विभाग इस तरह के मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरतेगा।

यह घटना उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है जो अपने पद की गरिमा का ध्यान नहीं रखते। इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट है कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों से अनुशासन और नियमों के सख्त पालन की अपेक्षा करती है, खासकर जब बात शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की हो।