रीवा में 'शिक्षा माफिया' के आगे DEO नतमस्तक! डंडों से ऐंठते रहे बच्चे, पर अफसरों को नहीं दिखा खेत में चलता यह अवैध स्कूल, क्या शिक्षा विभाग ने बेच दी अपनी नैतिकता?

 
रीवा में 'कसाई' बनी शिक्षिका: दूसरी क्लास के मासूमों को बेरहमी से डंडों से कूटा, खेत में चल रहे बिना मान्यता वाले स्कूल का भंडाफोड़!

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का कलेजा कांप जाए। एक निजी स्कूल में कक्षा 2 के नन्हे बच्चों को लाइन में खड़ा कर एक शिक्षिका इस कदर डंडों से पीट रही है कि बच्चे दर्द से ऐंठ रहे हैं। मंगलवार की इस घटना का वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया है।

खेत के बीच चल रहा 'खतरनाक' स्कूल
गुढ़ तहसील के रेरुआ गांव में संचालित यह स्कूल किसी बिल्डिंग में नहीं, बल्कि खुले खेत के बीच चल रहा है। यहाँ न तो बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम हैं और न ही सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल। सबसे शर्मनाक बात यह है कि स्कूल में मासूमों के लिए शौचालय (Toilet) तक की व्यवस्था नहीं है। यह स्कूल पूरी तरह से शैक्षणिक गाइडलाइन को दरकिनार कर माफिया की तरह चलाया जा रहा है।

DEO की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
आखिर जिला शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सो रहे थे? बिना मान्यता और बिना बुनियादी सुविधाओं के खेतों में स्कूल कैसे खुल गए? क्या विभागीय अधिकारियों की नाक के नीचे यह भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमित निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है, जिसका खामियाजा इन मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने खोला मोर्चा
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक पीएन पांडेय ने इस मामले को लेकर तीखा विरोध जताया है। उन्होंने कहा, "निजी स्कूलों की यह मनमानी बच्चों के भविष्य और जान के साथ खिलवाड़ है। बिना सुविधाओं के चल रहे इन स्कूलों को तत्काल बंद किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।"

जांच का आश्वासन या सिर्फ खानापूर्ति?
मामला तूल पकड़ते ही शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी या फिर उन 'शिक्षा माफियाओं' पर बुलडोजर चलेगा जो बच्चों की जिंदगी से व्यापार कर रहे हैं?