अफसरों की दादागिरी पर रीवा में महासंग्राम: यूजीसी रैली से चिढ़े EE ने कर्मचारियों को निकाला, अब आर-पार की जंग में हिला बिजली विभाग!

 

रीवा कलेक्ट्रेट पर आउटसोर्स कर्मचारियों और सवर्ण समाज का अनिश्चितकालीन धरना शुरू। 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा जिले में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों का तानाशाही रवैया और मनमाना आचरण अब जनआक्रोश का रूप ले चुका है। लंबे समय से आम उपभोक्ताओं से लेकर निचले तबके के कर्मचारियों तक को प्रताड़ित कर रहे अफसरों के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का मैदान सज गया है। बिजली महकमे के पश्चिम संभाग में पदस्थ उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर आउटसोर्स कर्मचारियों और सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने रीवा कलेक्ट्रेट के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है।

आंदोलनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक तानाशाह और भ्रष्ट अफसरों को उनके पदों से हटाकर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा। पूर्व में प्रशासनिक स्तर पर दिए गए खोखले आश्वासनों के कारण आंदोलन टलते रहे हैं, परंतु इस बार कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं और यह लड़ाई अंजाम तक पहुंचाई जाएगी।

तानाशाही रवैये और मनमाने फैसलों से भड़का कर्मचारियों तथा सवर्ण समाज का गुस्सा
रीवा शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली विभाग की व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। स्थानीय अधिकारियों की बेलगाम कार्यशैली के कारण न केवल सामान्य विद्युत उपभोक्ता परेशान हैं, बल्कि विभाग के रीढ़ माने जाने वाले आउटसोर्स कर्मचारी भी भारी मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न झेल रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, तबादलों और विभागीय कार्रवाइयों को अब प्रशासनिक आवश्यकता की जगह व्यक्तिगत रंजिश साधने का हथियार बना लिया गया है।

आक्रोश का मुख्य कारण यह भी है कि अधिकारियों ने न केवल कार्यालयीन स्तर पर प्रताड़ना का चक्र चलाया, बल्कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत एवं सामाजिक स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाने का दुस्साहस किया है। हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नीतियों के विरोध में निकाले गए सवर्ण समाज के शांतिपूर्ण जुलूस में कर्मचारियों की सहभागिता को मुद्दा बनाकर उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई शुरू की गई। इसी दोहरे रवैये और दमनकारी नीतियों ने सवर्ण समाज तथा आउटसोर्स कर्मचारियों को एक ही मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है।

आउटसोर्स लाइनमैन दिलीप शर्मा के लगातार उत्पीड़न और साजिशन निष्कासन की पूरी कहानी
पश्चिम संभाग में कार्यरत आउटसोर्स लाइनमैन दिलीप शर्मा की व्यथा इस प्रशासनिक उत्पीड़न का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पश्चिम संभाग के कार्यपालन अभियंता भूपेश विक्रम सिंह द्वारा दिलीप शर्मा को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। मात्र एक वर्ष के भीतर उक्त कर्मचारी का सात से आठ बार अलग-अलग जगहों पर स्थानांतरण कर दिया गया। जब इससे भी अधिकारी का मन नहीं भरा, तो प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए उनका संभाग ही बदल दिया गया।

उत्पीड़न का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। विभागीय पत्राचार के माध्यम से कर्मचारी को वापस पश्चिम संभाग बुलाकर उसका पदावनमन (डिमोशन) कर दिया गया। कुशल लाइनमैन के रूप में कार्य कर रहे कर्मचारी को मीटर रीडर के पद पर धकेल दिया गया। जब पीड़ित कर्मचारी ने इस अनुचित और दुर्भावनापूर्ण पदावनमन आदेश के तहत पदभार ग्रहण करने में असमर्थता जताई, तो अधिकारी ने उसे सीधे नौकरी से निष्कासित करने के लिए पत्र लिख दिया। पुराने अनुभवी कर्मचारियों को योजनाबद्ध तरीके से ब्लैकलिस्ट करके नए लोगों की सशुल्क भर्ती करने का खेल इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की मुख्य वजह बताया जा रहा है।

सवर्ण आंदोलन और सामाजिक कार्यक्रमों से जुड़ने पर बिजली अधिकारियों की बदले की कार्रवाई
बिजली विभाग के अधिकारियों की मनमानी सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों के उत्पीड़न तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने सामाजिक आंदोलनों में भाग लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। विंध्य आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय पदाधिकारी सतीश चौबे को विशेष रूप से निशाने पर लिया गया। सतीश चौबे ने जब लाइनमैन दिलीप शर्मा के समर्थन में आवाज उठाई और निष्कासन की साजिश का विरोध किया, तो कार्यपालन यंत्री ने उनके खिलाफ भी मुख्य अभियंता को शिकायत भेज दी।

अधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र में अजीबोगरीब आरोप लगाए गए कि सतीश चौबे सवर्ण समाज की यूजीसी विरोधी रैली में शामिल हुए थे तथा उन्होंने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आयोजित सांकेतिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था। सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने पर किसी कर्मचारी की आजीविका छीनने का प्रयास करना अधिकारियों के बेलगाम होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसी वजह से अब सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने खुलकर आउटसोर्स कर्मचारियों के समर्थन में कलेक्ट्रेट के सामने मोर्चा संभाल लिया है।

जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की नाकामी से बिजली महकमे में गहराया संकट
रीवा में बिजली महकमे के अफसरों का दुस्साहस इस कदर बढ़ चुका है कि वे स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस और जन-प्रतिनिधियों के निर्देशों की भी परवाह नहीं करते। पूर्व में घटी घटनाओं का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सिरमौर चौराहे पर प्रशासनिक अनुमति से चल रहे एक नागरिक धरना स्थल की बिजली तक अधिकारियों ने काट दी थी। उस समय कलेक्ट्रेट और कमिश्नर कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बावजूद बिजली अफसरों ने बिजली जोड़ने से साफ इनकार कर दिया था।

पूर्व की घटनाओं में पुलिस प्रशासन को गुमराह करके अनशनकारियों पर मामले दर्ज कराने की धमकियां दी गई थीं। हालांकि, तब प्रशासनिक मध्यस्थता से मामला शांत हो गया था, परंतु सुधार के बजाय अधिकारियों की मनमानी और बढ़ती चली गई। अब स्थिति यह हो चुकी है कि आम जनता से लेकर विभागीय कर्मचारी तक इन अफसरों के अड़ियल रवैये से पीड़ित हैं और जिला प्रशासन असहाय नजर आ रहा है।

अधीक्षण और मुख्य अभियंता की अनदेखी से चरमराई रीवा की विद्युत व्यवस्था
पश्चिम संभाग में चल रही इस तानाशाही के पीछे केवल कार्यपालन यंत्री ही नहीं, बल्कि विभाग के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) और मुख्य अभियंता (Chief Engineer) की उदासीनता भी पूरी तरह जिम्मेदार है। उच्च पदों पर बैठे ये अधिकारी अपने मातहतों पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण रखने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। रीवा क्षेत्र में ट्रांसफार्मर जलने, हफ्तों तक बिजली बंद रहने, वोल्टेज की गंभीर समस्या और मनमाने बिजली बिल थमाने की शिकायतें रोज आ रही हैं, परंतु वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।

क्षेत्रीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभिन्न प्रभागों में पदस्थ कनिष्ठ यंत्री (JE), सहायक यंत्री (AE) और कार्यपालन यंत्री (DE) की अवैध वसूली तथा उत्पीड़न की दर्जनों लिखित शिकायतें मुख्य अभियंता के पास लंबित हैं, परंतु राजनीतिक संरक्षण और इच्छाशक्ति की कमी के कारण दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। प्रशासनिक लाचारी का ही परिणाम है कि आज पूरा विद्युत तंत्र बदहाल हो चुका है और आम नागरिक तथा कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

आर-पार के संघर्ष का ऐलान: दोषी अधिकारियों को हटाने तक जारी रहेगा धरना
कलेक्ट्रेट परिसर के समक्ष शुरू हुए इस संयुक्त आंदोलन में विंध्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ और सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने संकल्प लिया है कि जब तक विवादित कार्यपालन यंत्री भूपेश विक्रम सिंह, अधीक्षण अभियंता तथा मुख्य अभियंता को रीवा से स्थानांतरित कर उनके खिलाफ उच्च स्तरीय जांच नहीं बैठाई जाती, तब तक धरना स्थल खाली नहीं किया जाएगा।

इस बार आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी मध्यस्थता या मौखिक आश्वासन के झांसे में नहीं आएंगे। शहर के आम नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी इस लड़ाई में सहयोग की अपील की गई है। बिजली विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्तियों के नाम पर वसूली, मनमाने स्थानांतरण और आम जनता के आर्थिक शोषण के खिलाफ शुरू हुआ यह संघर्ष अब रीवा में एक बड़े जनांदोलन का रूप लेता दिख रहा है।