कलेक्टर साहब देखिये! रीवा में 'मौत के सौदागर' बने नामी स्कूल और अस्पताल! बिना फायर NOC के चल रहे हैं सैकड़ों संस्थान, क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है?
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर में हाल के दिनों में हुई आगजनी की घटनाओं ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, लेकिन इसके बावजूद शहर के निजी संस्थान सबक लेने को तैयार नहीं हैं। शहर के दर्जनों स्कूल, प्राइवेट अस्पताल, कोचिंग सेंटर और बीयर बार वर्तमान में मौत के जाल की तरह संचालित हो रहे हैं। यहाँ फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा) के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि कई जगहों पर आग बुझाने वाले सिलेंडर या तो एक्सपायर हो चुके हैं या फिर उन्हें केवल सजावट के तौर पर टांगा गया है।
संकरी गलियों में 'मौत का सौदागर' बने संस्थान
रीवा की तंग और संकरी गलियों में जिस तरह से बहुमंजिला इमारतों में स्कूल और कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, वह किसी बड़ी त्रासदी को निमंत्रण दे रहे हैं।
इमरजेंसी एग्जिट का अभाव: अधिकांश इमारतों में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता है।
तकनीकी खामियां: स्प्रिंकलर सिस्टम और फायर अलार्म जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं तो जैसे यहाँ के शब्दकोश में ही नहीं हैं।
बढ़ता जोखिम: हजारों छात्रों और मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे है, क्योंकि आपात स्थिति में इन गलियों तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुँचना लगभग नामुमकिन है।
बिना फायर NOC के धड़ल्ले से संचालन
नियमों के मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक संस्थान को चलाने के लिए फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य है। लेकिन रीवा में रसूख और सेटिंग के खेल में बिना किसी वैध दस्तावेज के इन संस्थानों का संचालन जारी है। जानकारों का कहना है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ है।
नगर निगम आयुक्त के कड़े तेवर: अब होगी सीधी कार्रवाई
इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम आयुक्त सौरभ सोनवड़े ने साफ कर दिया है कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि:
- शहर के हर व्यापारिक और शैक्षणिक संस्थान की सघन जांच की जाए।
- जिन संस्थानों के पास वैध फायर NOC नहीं है, उन्हें तत्काल नोटिस दिया जाए।
- मानकों को पूरा न करने वाली बिल्डिंगों को सील करने की कार्रवाई की जाए।
प्रशासन और जनता को मिलकर जगना होगा
हादसे बताकर नहीं आते। रीवा न्यूज़ मीडिया प्रशासन से मांग करता है कि यह अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो जो दूसरों के लिए नजीर बने।