कलेक्टर साहिबा! यहाँ तो बाइक से बिक रहा 'ब्लैक' में सिलेंडर; रीवा में गैस किल्लत के बीच अवैध धंधे का वीडियो लीक!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर को लेकर ऐसा 'गंदा खेल' शुरू हुआ है कि आम आदमी की रसोई ठंडी पड़ गई है। शहर की सड़कों पर गैस के लिए कतारें नहीं, बल्कि लोगों का आक्रोश दिख रहा है। एक तरफ आम जनता एक-एक सिलेंडर के लिए घंटों धूप में खड़ी है, वहीं दूसरी तरफ रीवा के मोहल्लों में गुपचुप तरीके से गैस की कालाबाजारी (Black Marketing) का धंधा फल-फूल रहा है।
एक्सक्लूसिव वीडियो: बाइक पर 'होम डिलीवरी' या अवैध कमाई का जरिया?
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लाइव वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने रीवा प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे कुछ रसूखदार और बिचौलिए बाइक पर सिलेंडर लादकर गलियों में सप्लाई कर रहे हैं। ये सिलेंडर उन लोगों को नहीं मिल रहे जिन्होंने हफ्तों पहले बुकिंग की थी, बल्कि उन्हें दिए जा रहे हैं जो महंगे दामों (ऊंची कीमतों) पर खरीदने को तैयार हैं। इस वीडियो ने यह साबित कर दिया है कि गैस की किल्लत प्राकृतिक नहीं, बल्कि 'मैन-मेड' है।
एसपी शैलेंद्र सिंह की दो टूक: "अवैध धंधा करने वाले नाप दिए जाएंगे"
वीडियो वायरल होने के बाद रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। एसपी ने पुलिस कप्तानों और थानों को निर्देशित किया है कि जहाँ भी अवैध भंडारण या बाइक से संदिग्ध सप्लाई दिखे, तुरंत घेराबंदी कर कार्रवाई करें। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि अनियमितता करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त से सख्त कानूनी एक्शन लेगी।
कलेक्टर प्रतिभा पाल का एक्शन मोड: एजेंसियों की खैर नहीं!
मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि गैस एजेंसियों को स्टॉक के अनुसार नियमित सप्लाई के आदेश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "अगर कोई एजेंसी संचालक या बिचौलिया कृत्रिम किल्लत पैदा कर रहा है या कालाबाजारी में संलिप्त पाया जाता है, तो उसकी लाइसेंस निरस्त करने से लेकर जेल भेजने तक की कार्रवाई की जाएगी।"
जनता का दर्द: "बच्चे को बाइक पर बिठाकर सिलेंडर ढूंढ रहे हैं"
धरातल पर स्थिति बेहद भयावह है। स्थानीय निवासी आदेश मिश्रा का दर्द सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। उन्होंने बताया, "भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में मेरी पत्नी बाइक पर पीछे सिलेंडर पकड़कर बैठी है और आगे छोटा बच्चा बैठा है। एजेंसी वाले कोई जवाब नहीं दे रहे। लोग कह रहे हैं सिलेंडर नहीं मिलेगा, अब हारकर घर लौट रहा हूँ।"
इसी तरह सोनल पांडेय का कहना है कि वे सुबह 5 बजे से लाइन में लगती हैं, लेकिन दोपहर होते-होते कह दिया जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया। वहीं गृहणी सीमा यादव का चूल्हा पिछले दो दिनों से नहीं जला है। उनका कहना है कि गैस न मिलने से पूरा घर अस्त-व्यस्त हो गया है।
क्या यह प्रशासन की नाकामी है?
रीवा की जनता अब सवाल पूछ रही है कि जब प्रशासन कह रहा है कि स्टॉक पर्याप्त है, तो फिर सिलेंडर ब्लैक में कैसे बिक रहे हैं? बाइक पर अवैध तरीके से सिलेंडर ढोने वालों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मोहल्लों में महंगे दामों पर गैस बेचने की चर्चा आम है, फिर भी सरकारी तंत्र मौन क्यों था?
अब आर-पार की लड़ाई
रीवा में गैस का यह संकट अब केवल एक सुविधा की कमी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा बन चुका है। कलेक्टर और एसपी के कड़े बयानों के बाद अब देखना यह होगा कि क्या वाकई में आम आदमी को राहत मिलती है या फिर 'बाइक वाली सप्लाई' और 'कालाबाजारी का खेल' यूँ ही चलता रहेगा।