REWA GROUND REPORT : डभौरा के धुरकुच में जल-तांडव; भीषण गर्मी में जहरीला पानी पीने की मजबूरी, जिम्मेदार मौन

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के नगर परिषद डभौरा अंतर्गत आने वाले धुरकुच (वार्ड क्रमांक 7) से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में यह आदिवासी बहुल गांव पिछले एक महीने से अंधेरे में डूबा हुआ है। बिजली न होने के कारण गांव के सरकारी बोरवेल सफेद हाथी साबित हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।

जंगल और सूखी नदी: प्यास बुझाने का आखिरी सहारा
जब गांव के नल सूख गए और प्रशासन ने टैंकर भेजने में कोताही बरती, तो ग्रामीणों के पास जंगल का रुख करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

  • गड्ढा खोदकर जुगाड़: ग्रामीण करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल में स्थित सूखी नदी तक पैदल जाते हैं।
  • बीमारियों का डर: वहां रेत में गड्ढा खोदकर निकलने वाला झिरिया का गंदा और मटमैला पानी पीकर ग्रामीण अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
  • बुजुर्गों और बच्चों की आफत: इस तपती धूप में पानी ढोना बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

केबल चोरी और 'बहरे' अधिकारी: सिस्टम की बड़ी लापरवाही
ग्रामीणों के अनुसार, लगभग एक माह पहले अज्ञात बदमाशों ने बिजली की केबल काट दी थी।

शिकायतों का अंबार: बिजली विभाग से लेकर सीएम हेल्पलाइन 181 तक गुहार लगाई गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
पार्षद का आरोप: वार्ड पार्षद आसमा देवी ने बताया कि बिजली विभाग के जेई (JE) फोन तक नहीं उठाते और नगर परिषद ने भी ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।

कलेक्टर ने बढ़ाया हाथ: क्या सच में बदलेगी तस्वीर?
मामला जब मीडिया के गलियारों से होते हुए प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँचा, तब जाकर नींद टूटी। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया है कि बिजली की केबल जल्द जुड़वाई जाएगी और गांव में पेयजल की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

हालांकि, ग्रामीणों के मन में अब भी वही सवाल है कि क्या यह सिर्फ कागजी आश्वासन है या वाकई उनकी प्यास बुझेगी?