रीवा में विनीत सिंह नामक ठेकेदार बाईपास के किनारे अघोषित अवैध शराब की दुकान खुलवाकर कर रहा था बिक्री, विश्वविद्यालय पुलिस ने दी दबिस, मौके से पकड़ी गई अवैध शराब
ऋतुराज द्विवेदी (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले में आबकारी नियमों को ताक पर रखकर अवैध शराब बेचने का एक नया मामला सामने आया है। पड़ोसी जिले मैहर में हुई कड़ी कार्रवाई के बाद भी शराब कारोबारियों के हौसले पस्त होते नहीं दिख रहे हैं। रीवा के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र अंतर्गत हाइवे के किनारे बिना लाइसेंस की अघोषित दुकान चलाए जाने की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की है। हालांकि, इस पूरी कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग की सुस्ती और पुलिस की कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मैहर पैटर्न पर रीवा हाइवे के किनारे अवैध दुकान
हाल ही में मैहर जिले में हाइवे के किनारे अवैध रूप से संचालित शराब दुकानों के खिलाफ आबकारी और स्थानीय प्रशासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की थी। इस कड़े कदम के बावजूद रीवा में भी वही 'मैहर मॉडल' दोहराया जा रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, रीवा के मुख्य हाइवे के किनारे एक अघोषित दुकान (बिना लाइसेंस का अहाता या बिक्री केंद्र) संचालित किया जा रहा था। यहाँ दिन-रात खुलेआम अवैध रूप से शराब बेची जा रही थी। स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए यह केंद्र सिरदर्द बना हुआ था, लेकिन आबकारी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी।
विश्वविद्यालय पुलिस की रेड: वायरल वीडियो और जब्ती का सच
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो और गुप्त सूचना के आधार पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हाइवे किनारे स्थित इस ठिकाने पर दबिश दी। मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त की और एक संदिग्ध तस्कर को भी हिरासत में लिया।
नोट / डिस्क्लेमर: यह पूरी खबर सोशल मीडिया पर प्रसारित वायरल वीडियो और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। रीवा न्यूज मीडिया इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
'घटती शराब' और पुलिस पर उठे सवाल
दबिश के बाद यह मामला उस वक्त और अधिक चर्चा में आ गया जब जब्ती की मात्रा को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
- मौके पर जब्ती: स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के दावों के अनुसार, पुलिस रेड के दौरान मौके से लगभग 6 से 7 पेटी अवैध शराब पकड़ी गई थी।
- थाने पहुँचते ही बदलाव: आरोप है कि मामला विश्वविद्यालय थाने पहुँचते-पहुँचते कागजों में मात्र ढाई पेटी में तब्दील हो गया।
क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि जब्ती की मात्रा को कम दिखाने के लिए थाने के भीतर ही गणित बैठाया जा रहा था। इस 'गुणाभाग' को लेकर पुलिस की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ठेकेदार पर मेहरबानी या अभयदान? विनीत सिंह का नाम आया सामने
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जिस तस्कर को रंगे हाथों पकड़ा, उसने पूछताछ के दौरान एक मुख्य व्यक्ति का नाम उजागर किया है।
तस्कर के बयानों और वायरल दावों के मुताबिक, यह पूरा अवैध कारोबार विनीत सिंह नाम के व्यक्ति (या संबंधित ठेकेदार से जुड़े व्यक्ति) के इशारे पर चलाया जा रहा था। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने केवल छोटे तस्कर को मोहरा बनाकर आरोपी बना दिया, जबकि मुख्य शराब ठेकेदार या पर्दे के पीछे बैठे प्रभावशाली व्यक्तियों को अभयदान दे दिया गया है।
आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
हाइवे के किनारे बिना किसी खौफ के अघोषित शराब दुकान का चलना सीधे तौर पर आबकारी विभाग की नाकामी या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
- आबकारी पुलिस की गश्त और निरीक्षण व्यवस्था कहाँ थी?
- क्या मुख्य मार्ग पर चल रहे इस अवैध कारोबार की जानकारी क्षेत्रीय आबकारी अमले को नहीं थी?
- क्यों हर बार आबकारी विभाग के बजाय स्थानीय पुलिस को ही दबिश देनी पड़ती है?
यह घटना स्पष्ट करती है कि राजस्व की आड़ में शराब कारोबारी नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।
क्या रीवा में भी रद्द होगा शराब ठेकेदार का लाइसेंस?
मैहर जिले में जब इसी तरह का अवैध आउटलेट पकड़ा गया था, तो जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित शराब ठेकेदार का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। अब रीवा में मामला सामने आने के बाद जनता यह सवाल पूछ रही है:
क्या रीवा जिला प्रशासन और आबकारी आयुक्त इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर दोषी ठेकेदार के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने की कठोर कार्रवाई करेंगे? या फिर यह मामला भी केवल कागजी कार्रवाई और 'गुणाभाग' तक ही सीमित रह जाएगा?