रीवा में उबाल! कल्पना मिश्रा मौत के मामले में बिहर नदी के पानी में उतरे अनशनकारी, FIR की मांग पर महासंग्राम
संजय गांधी अस्पताल की कथित लापरवाही के खिलाफ पिता का 11 दिनों से अनशन जारी; न्याय न मिलने पर बाबा घाट पर नदी में उतरकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य के प्रमुख केंद्र रीवा जिले में चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ आक्रोश लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। बहुचर्चित कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब शांत होने के बजाय एक बड़े आंदोलन में तब्दील हो चुका है। न्याय की आस में बैठे परिजनों और स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर अब अनोखे लेकिन कड़े विरोध का रास्ता अपना लिया है। इसी कड़ी में रीवा की बिहर नदी के ऐतिहासिक बाबा घाट पर अनशनकारियों ने पानी में उतरकर 'जल सत्याग्रह' शुरू कर दिया है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
बाबा घाट पर बिहर नदी में उतरे अनशनकारी, 11 दिनों से जारी है संघर्ष
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब मृतका कल्पना मिश्रा के बुजुर्ग पिता न्याय की मांग को लेकर लगातार 11 दिनों से अनशन पर बैठे रहे। इसके बावजूद जब जिम्मेदार विभागों या शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक कार्रवाई सामने नहीं आई, तो आंदोलनकारियों का सब्र जवाब दे गया। अनशनकारियों ने कड़ाके की ठंड और तमाम प्रशासनिक चेतावनियों को दरकिनार करते हुए सीधे बिहर नदी के ठंडे पानी में उतरकर मोर्चा संभाल लिया। उनका साफ और दो टूक कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कानूनी रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की जाती, तब तक यह जल सत्याग्रह किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं किया जाएगा।
परिजनों और प्रदर्शनकारियों के गंभीर आरोप एवं मुख्य मांगें
शुरुआत से ही इस पूरे प्रकरण में संजय गांधी अस्पताल (SGMH) के चिकित्सकों और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि अस्पताल में हुई घोर चिकित्सकीय लापरवाही के कारण ही एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया, लेकिन लीपापोती का दौर जारी है। परिजनों की मुख्य मांग है कि:
- घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जा रहे संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।
- आरोपियों के चिकित्सकीय लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के दर्द से न गुजरना पड़े।
- स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी आकर इस मामले में पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष जांच का आश्वासन दें।
प्रशासनिक अमला मुस्तैद: SDRF की तैनाती और सुरक्षा प्रबंध
बिहर नदी में चल रहे इस खतरनाक और संवेदनशील जल सत्याग्रह की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति के किसी भी अप्रिय मोड़ पर पहुंचने की आशंका को भांपते हुए बाबा घाट पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम को रेस्क्यू बोट और लाइफ सपोर्ट जैकेट के साथ तैनात किया गया है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार घाट पर मौजूद रहकर आंदोलनकारियों को समझाइश देने और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में जुटे हुए हैं, हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही पर खड़े होते गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने रीवा की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब स्वास्थ्य व्यवस्था की देखरेख और मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार मंत्री से लेकर तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारी प्रदेश में मौजूद हैं, तो फिर एक आम परिवार को अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने के लिए नदी के ठंडे पानी में उतरकर सत्याग्रह करने की मजबूरी क्यों उठानी पड़ रही है?
अनशन के 11 दिन बीत जाने के बाद भी यदि पीड़ित परिवार को न्याय के नाम पर केवल आश्वासन ही मिल रहा है, तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। फिलहाल, बाबा घाट पर तनावपूर्ण लेकिन गहमागहमी का माहौल बना हुआ है और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस गंभीर संकट से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।
नोट: इस प्रकरण में चिकित्सकीय लापरवाही और अन्य गंभीर आरोप मृतका के परिजनों एवं प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए हैं। समाचार प्रकाशन के समय तक संबंधित अस्पताल या आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक और विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।