रीवा में दावों की फुस्स हवा: अस्पताल से गांव तक बिछा बाढ़ का जाल, ड्रम के सहारे अंतिम संस्कार को मजबूर हुए परिजन, अधिकारियों में मचा हड़कंप
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से इंसानियत और प्रशासनिक दावों को शर्मसार करने वाली एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के जवा जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रौली में बाढ़ के प्रकोप के बीच एक परिवार को अपने स्वजन की अंतिम यात्रा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष करना पड़ा।
संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) रीवा में इलाज के दौरान रौली निवासी मोतीलाल तिवारी का निधन हो गया था। जब परिजन अस्पताल से शव लेकर अपने गांव पहुंचे, तो चारों तरफ फैले बाढ़ के पानी के कारण गांव को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न और बंद थे। प्रशासनिक सहायता न मिलने की स्थिति में ग्रामीणों और परिजनों ने मजबूरीवश प्लास्टिक के खाली ड्रमों को आपस में बांधकर एक अस्थायी नाव तैयार की। इसी जुगाड़ के सहारे उफनते पानी के बीच शव को रखकर जलधारा पार कराई गई और तत्पश्चात घर ले जाकर अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।
प्रशासनिक संवेदनहीनता और ग्रामीणों का आक्रोश
इस मार्मिक घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्थानीय व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संकट के समय जब उन्होंने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों से सहायता मांगी, तो उन्हें दोटुक जवाब दे दिया गया।
- मदद से इनकार: परिजनों ने रौली ग्राम पंचायत की महिला सरपंच, उनके प्रतिनिधियों और रोजगार सहायक विवेक तिवारी से संपर्क कर जलभराव के बीच शव को घर तक पहुंचाने के लिए बोट या अन्य आपातकालीन परिवहन की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था।
- संवेदनहीन रवैया: ग्रामीणों के अनुसार, जिम्मेदार कर्मचारियों ने "यह हमारा काम नहीं है" कहकर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया।
- अंतिम यात्रा का अपमान: ग्रामीणों ने इस रवैये को बेहद असंवेदनशील बताते हुए कहा कि आपदा के समय किसी नागरिक के अंतिम संस्कार जैसी व्यवस्था में भी पंचायत और स्थानीय अमले का हाथ खड़े कर देना जमीनी हकीकत को बयां करता है।
उफान पर नदियां और ग्राउंड जीरो की जमीनी हकीकत
जवा जनपद का यह तराई अंचल भौगोलिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। वर्तमान में क्षेत्र से गुजरने वाली तमस (टोंस), बेलन और महाना नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
- संपर्क मार्ग ठप: नदियों का जलस्तर बढ़ने से रौली सहित आसपास के कई गांवों का संपर्क जिला व तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है।
- दैनिक जीवन प्रभावित: ग्रामीणों को न केवल आपातकालीन परिस्थितियों में बल्कि राशन, दवाइयों और दैनिक जरूरतों के सामान के लिए भी जान जोखिम में डालकर उफनते नालों को पार करना पड़ रहा है।
- सुरक्षा उपकरणों का अभाव: बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर आपदा राहत टीम या पर्याप्त नावों की तैनाती न होना बड़ी प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करता है।
कलेक्टर की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
मामला उजागर होने और वीडियो वायरल होने के बाद रीवा जिला प्रशासन हरकत में आया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान नागरिकों को हर संभव सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यदि रौली ग्राम पंचायत स्तर पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा सहायता देने में लापरवाही या असंवेदनशीलता बरती गई है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तराई अंचल के बाढ़ प्रभावित गांवों में ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्थायी नावों और मोटरबोट की व्यवस्था तुरंत की जाए, ताकि किसी अन्य परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम विदाई में इस तरह की अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े।