सिस्टम फेल, किसान बेहाल! करहिया खाद केंद्र बना जंग का मैदान; न लाइन, न पुलिस, बस मची है लूटम-लूट! क्या खून बहने के बाद जागेगा रीवा प्रशासन?
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के ग्राम पंचायत करहिया में खाद वितरण के दौरान आज वह मंजर देखने को मिला, जिसने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी। खाद की एक-एक बोरी के लिए किसान इस कदर बेकाबू हुए कि वहां युद्ध जैसी स्थिति निर्मित हो गई। वितरण केंद्र पर न तो कोई कतार थी और न ही सुरक्षा का कोई इंतजाम, जिसके चलते अन्नदाता आपस में ही उलझ गए।
करहिया केंद्र पर भगदड़ और मारपीट का पूरा मंजर
जैसे ही करहिया को खाद वितरण केंद्र घोषित किया गया, आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में किसान वहां पहुंच गए। खाद पाने की होड़ इतनी बढ़ गई कि शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा वितरण कुछ ही मिनटों में हिंसा में बदल गया। किसान एक-दूसरे को धक्का देते हुए आगे निकलने की कोशिश करने लगे, जिससे वहां भगदड़ मच गई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ किसान आपस में भिड़ गए और जमकर मारपीट हुई।
बाल-बाल टली बड़ी जनहानि
मौके पर मौजूद चश्मदीदों का कहना है कि भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि यदि कोई एक भी व्यक्ति नीचे गिर जाता, तो कुचलने से उसकी मौत निश्चित थी। गनीमत रही कि शोर-शराबे और धक्का-मुक्की के बीच कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ, लेकिन प्रशासन की लापरवाही ने कई मासूमों की जान जोखिम में डाल दी थी।
बेअसर प्रशासनिक इंतजाम: किसानों ने उठाए सवाल
रबी सीजन अपने चरम पर है। गेहूं, चना और सरसों की फसलों को इस समय खाद की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद करहिया केंद्र पर:
- सुरक्षा बल की कमी: वहां एक भी पुलिसकर्मी या गार्ड तैनात नहीं था।
- लाइन व्यवस्था का अभाव: टोकन या क्रमिक वितरण की कोई योजना नहीं बनाई गई।
- सीमित संसाधन: किसानों की संख्या हजारों में थी, जबकि वितरण करने वाले कर्मचारी और संसाधन बेहद सीमित थे।
कृषि ज्ञान: कब और कैसे डालें यूरिया? (विशेषज्ञों की सलाह)
किसानों की इस भीड़ का मुख्य कारण 'यूरिया' की भारी मांग है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:
- पहली सिंचाई का महत्व: रबी फसलों (विशेषकर गेहूं) में बुवाई के 25 से 45 दिन बाद जब पहली या दूसरी सिंचाई की जाती है, तब यूरिया का उपयोग सबसे अधिक प्रभावी होता है।
- तापमान और नमी: यूरिया हमेशा शाम के समय या हल्की नमी में डालना चाहिए ताकि वह सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचे। इसी वैज्ञानिक समय चक्र के कारण दिसंबर-जनवरी में खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है।
किसानों का अल्टीमेटम: "टोकन दो या वितरण बंद करो"
घटना के बाद आक्रोशित किसानों और स्थानीय संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि:
प्रत्येक केंद्र पर पुलिस बल की तैनाती अनिवार्य हो।
टोकन सिस्टम लागू किया जाए ताकि दूर-दराज से आए किसानों को घंटों खड़ा न होना पड़े।
ग्राम पंचायत स्तर पर केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि एक ही जगह भीड़ एकत्रित न हो।