मैडम कलेक्टर! आपके आदेश को 'ठेंगा' दिखा रही KCC कंपनी; जर्जर बीहर पुल पर भारी वाहनों का तांडव, जनता ने खोला मोर्चा
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले में फोरलेन निर्माण का जिम्मा संभाल रही KCC कंपनी अब विवादों के घेरे में है। बीहर नदी के पुराने पुल को विशेषज्ञों ने 'अति संवेदनशील' घोषित कर रखा है, लेकिन कंपनी के भारी-भरकम वाहन इस चेतावनी को नजरअंदाज कर धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। प्रशासन ने जहाँ आम जनता के लिए रूट डायवर्ट किया है, वहीं कंपनी के डंपर नियमों को कुचलते हुए अपना रास्ता बना रहे हैं।
खतरनाक दरार और धंसाव: मौत के मुहाने पर खड़ा बीहर पुल
बीहर नदी के इस पुराने पुल की हालत इतनी जर्जर है कि इसके गर्डर में गहरी दरारें आ चुकी हैं और पुल 3 से 4 इंच तक धंस गया है। पियर कैप पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश थे कि पुल पर अतिरिक्त भार किसी भी स्थिति में नहीं डाला जाएगा। इसके बावजूद, केसीसी कंपनी के निर्माण सामग्री से लदे वाहन इस पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं, जो किसी भी समय एक भीषण त्रासदी का कारण बन सकता है।
आम जनता के लिए 'नो एंट्री', कंपनी के लिए 'खुली छूट'?
स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों में इस 'दोहरे मापदंड' को लेकर भारी आक्रोश है। आम आदमी को किलोमीटरों का चक्कर लगाकर डायवर्जन रूट से जाना पड़ रहा है, लेकिन कंपनी के लिए कोई रोक-टोक नहीं है। आरोप तो यहाँ तक हैं कि कंपनी की आड़ में कई अन्य निजी भारी वाहन भी सांठगांठ कर इसी खतरनाक पुल का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्या प्रशासन का हंटर सिर्फ गरीब जनता पर चलता है?
MPRDC और प्रशासन की भूमिका पर खड़े हुए गंभीर सवाल
कलेक्टर ने इस प्रतिबंध को लागू कराने की जिम्मेदारी MPRDC (एमपी रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) और स्थानीय पुलिस को सौंपी थी। लेकिन कंपनी के डंपरों का बेखौफ निकलना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं जिम्मेदारों की मौन सहमति या मिलीभगत है। रात के अंधेरे में कंपनी के वाहन सफाई और ढुलाई के नाम पर पुल की क्षमता का परीक्षण कर रहे हैं, जो सीधे-सीधे प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है।
उग्र आंदोलन की पदचाप: जनता ने दी आर-पार की चेतावनी
क्षेत्रीय जनता और स्थानीय संगठनों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। ग्रामीणों और वाहन चालकों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर केसीसी कंपनी के वाहनों का आवागमन बंद नहीं हुआ, तो वे चक्काजाम और उग्र आंदोलन करेंगे। जनता का कहना है कि वे किसी भी कंपनी के मुनाफे के लिए अपनी और अपने बच्चों की जान जोखिम में नहीं डालेंगे।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है प्रशासन?
यह केवल एक नियम का उल्लंघन नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों के साथ किया जा रहा खिलवाड़ है। यदि पुल गिरता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? Rewa News Media प्रशासन से यह सवाल पूछता है कि क्या केसीसी कंपनी कानून से ऊपर है? समय रहते इस मनमानी पर लगाम लगाना अनिवार्य है।