रात के अंधेरे में रीवा टोल प्लाजा बना अखाड़ा : 3 गाड़ियों में आए बदमाशों ने मैनेजर की करी जमकर कुटाई, नकदी और चेन छीनकर फरार : तलाश जारी 

 

रीवा के खड्डा टोल प्लाजा पर मैनेजर से मारपीट और लूट, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल अंतर्गत रीवा जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। रीवा-शहडोल मार्ग या मुख्य संपर्क मार्ग पर स्थित खड्डा टोल प्लाजा अचानक अखाड़ा बन गया, जब देर रात दर्जनों दबंगों ने टोल बूथ परिसर पर धावा बोल दिया। बेखौफ बदमाशों ने टोल प्लाजा के मैनेजर को निशाना बनाते हुए उनके साथ जमकर धक्का-मुक्की और हिंसक मारपीट की। अचानक हुए इस हमले से टोल बूथ पर तैनात अन्य कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।

सोमवार की देर रात घटी इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे और उन्होंने आते ही टोल मैनेजर पर हमला बोल दिया। अचानक हुई इस अप्रत्याशित हिंसा के चलते मैनेजर को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घटना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन को तुरंत सूचित किया गया, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शुरुआती पंचनामा व पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की।

घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी के मुताबिक, हमलावर किसी एक वाहन से नहीं बल्कि तीन अलग-अलग चारपहिया वाहनों में सवार होकर आए थे। गाड़ियों से उतरते ही करीब आधा दर्जन से अधिक युवकों ने टोल प्लाजा कार्यालय और केबिन के आसपास घेराबंदी कर ली। इसके बाद उन्होंने सीधे मैनेजर को अपने निशाने पर लिया और गालियां देते हुए ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

टोल प्लाजा परिसर में लगे उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में यह पूरी वारदात कैद हो गई है। मंगलवार की सुबह जब इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, तो देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से बेखौफ दबंग टोल मैनेजर को घेरकर पीट रहे हैं और वहां मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मी असहाय नजर आ रहे हैं। यह फुटेज सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन पर जल्द से जल्द कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

पीड़ित टोल मैनेजर ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में न केवल शारीरिक मारपीट का आरोप लगाया है, बल्कि संगीन आपराधिक धाराओं के तहत लूटपाट की बात भी कही है। पीड़ित के अनुसार, जब हमलावर उनके साथ मारपीट कर रहे थे, उसी दौरान उनमें से कुछ बदमाशों ने उनकी जेब में रखे नकदी (कैश) और गले में पहनी हुई सोने की चेन जबरन छीन ली।

लूटपाट की इस घटना ने मामले की गंभीरता को और अधिक बढ़ा दिया है। टोल अधिकारियों का कहना है कि यह केवल टोल टैक्स देने से बचने या मामूली कहासुनी का मामला नहीं लगता, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई गुंडागर्दी और डकैती जैसी वारदात प्रतीत होती है। लूट गए कैश और गहनों की अनुमानित कीमत के संबंध में भी पुलिस बयान दर्ज कर रही है, ताकि FIR में उपयुक्त धाराएं जोड़ी जा सकें।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस तुरंत खड्डा टोल प्लाजा पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने सबसे पहले सीसीटीवी फुटेज के रिकॉर्डर (DVR) को अपने कब्जे में लिया और बारीकी से विश्लेषण शुरू किया। पुलिस का कहना है कि वीडियो में हमलावरों के चेहरे स्पष्ट नजर आ रहे हैं, साथ ही वे जिन वाहनों से आए थे, उनकी नंबर प्लेट खंगालने का प्रयास भी किया जा रहा है।

क्षेत्रीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि "हमलावरों की पहचान लगभग तय की जा रही है। आसपास के क्षेत्रों, टोल नाकों और संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। सीसीटीवी फुटेज में दिख रही गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए वाहन स्वामियों का पता लगाया जा रहा है। जल्द ही इस घटना में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।" पुलिस मारपीट और स्नेचिंग (छीनझपट) दोनों ही पहलुओं पर गहनता से जांच आगे बढ़ा रही है।

रीवा जिले के विभिन्न टोल प्लाजा पर आए दिन विवाद, कहासुनी और मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं। खड्डा टोल प्लाजा पर हुई यह ताज़ा घटना इस बात का गवाह है कि टोल बूथों पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा रामभरोसे है। राजमार्गों से गुजरने वाले दबंग और असमाजिक तत्व अक्सर टोल टैक्स देने से मना करते हैं और विरोध करने पर हिंसा पर उतारू हो जाते हैं।

इस घटना के बाद से स्थानीय टोल कर्मचारियों में भारी रोष और भय देखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि टोल प्लाजा पर 24 घंटे पुलिस गश्त या स्थायी सुरक्षा बल की तैनाती नहीं की गई, तो उनके लिए अपनी ड्यूटी निभाना काफी जोखिम भरा हो जाएगा। रीवा-शहडोल मार्ग पर भारी वाहनों और वीआईपी आवाजाही के कारण सुरक्षा इंतजाम हमेशा पुख्ता होने चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आती है।

फिलहाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस हिंसक हमले और लूटपाट के पीछे का मुख्य कारण क्या था? शुरुआती जांच में कुछ संभावित पहलू सामने आ रहे हैं:

टोल टैक्स छूट को लेकर विवाद: क्या हमलावर स्थानीय होने का दावा कर मुफ्त में गाड़ियां निकालने की जिद्द कर रहे थे?
पुरानी रंजिश: क्या टोल प्रबंधन या मैनेजर के साथ हमलावरों का कोई पुराना विवाद या रंजिश थी?
अचानक हुआ रोड रेज: क्या सड़क पर ओवरटेक करने या लाइन में लगने को लेकर कोई तात्कालिक कहासुनी हुई थी जो हिंसक रूप ले बैठी?

पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि असली वजह का खुलासा आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ के बाद ही संभव हो पाएगा। पुलिस फिलहाल मामले को निष्पक्षता से देख रही है ताकि कोई भी निर्दोष न फंसे और वास्तविक दोषी बचकर न निकल पाएं।