रीवा में लापरवाही की कीमत: क्योंटी जलप्रपात में नहीं रेलिंग, न चेतावनी बोर्ड; मां-बेटी की जान गई
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध क्योंटी जलप्रपात एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना है। तीज पर्व पर स्नान करने पहुंची एक मां और बेटी की पानी के तेज बहाव में बहकर मौत हो गई। दोनों करीब 200 फीट नीचे कुंड में जा गिरीं। यह पूरी घटना मंगलवार शाम की है, जिसका एक लाइव वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मां-बेटी खुद को बचाने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करती दिख रही हैं, लेकिन टमस नदी के तेज बहाव के आगे उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं।
घटना के बाद बुधवार सुबह से ही SDERF (State Disaster Emergency Response Force) की टीम ने खोज अभियान शुरू किया, और दो दिन बाद गुरुवार को दोनों के शव बरामद कर लिए गए। इस हादसे ने एक बार फिर से पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तस्वीरों में देखिए पूरा घटनाक्रम...
कैसे हुआ हादसा? पल भर में जिंदगी खत्म
ग्राम दुलहरा निवासी फूलमती सोंधिया (50) अपनी बेटी कृषा (20) के साथ मंगलवार शाम को क्योंटी जलप्रपात पर नहाने गई थीं। इसी दौरान फूलमती का पैर फिसला और वह टमस नदी के तेज बहाव में बहने लगीं। मां को बचाने के लिए बेटी कृषा तुरंत दौड़ी और खुद भी पानी में गिर पड़ी। पल भर में ही दोनों मां-बेटी तेज बहाव में बहती हुई 50 मीटर दूर जलप्रपात के किनारे पहुंचीं और वहां से 200 फीट नीचे कुंड में समा गईं।
स्थानीय लोगों और एसडीईआरएफ की टीम ने बताया कि तीज के पहले से हो रही लगातार बारिश के कारण जलप्रपात का जलस्तर और बहाव काफी बढ़ गया था। इसी वजह से यह हादसा हुआ। रात होने के कारण मंगलवार को रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका और अगले दिन सुबह शुरू होने के बावजूद शवों को निकालने में काफी मुश्किल आई क्योंकि वे कुंड में फंसे हुए थे।
सुरक्षा पर उठे सवाल: क्या प्रशासन की लापरवाही है जिम्मेदार?
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्योंटी जलप्रपात जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। वहां न तो कोई रेलिंग है, न ही कोई चेतावनी बोर्ड और न ही कोई बचाव दल तैनात किया गया है। लोगों ने बताया कि यह कोई पहला हादसा नहीं है, बल्कि इससे पहले भी यहां कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी भी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
केवल पूर्वा जलप्रपात को छोड़कर, रीवा जिले के किसी भी बड़े झरने पर पर्यटकों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। एसडीईआरएफ की टीम ने खुद भी माना कि जलप्रपात के तेज उफान में रेस्क्यू ऑपरेशन करना उनकी जान को जोखिम में डालने जैसा था। जवानों ने रस्सी के सहारे खाई में उतरकर और कंधे पर शवों को उठाकर बाहर निकाला, जिससे उनके साहस की प्रशंसा हो रही है, लेकिन यह भी दिखाता है कि प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ली।
यह हादसा प्रशासन के लिए एक सबक है। अगर समय रहते सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए तो ऐसे और भी हादसे हो सकते हैं। एक परिवार ने अपनी दो जिंदगियां खो दीं, सिर्फ इसलिए क्योंकि एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल पर लापरवाही बरती गई।