भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: रीवा लोकायुक्त ने महिला उपयंत्री सुधा वर्मा को ₹10,000 की रिश्वत लेते दबोचा
रीवा लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस बार लोकायुक्त की टीम ने शहडोल जिले के नगर परिषद खांड में पदस्थ महिला उपयंत्री (Sub-Engineer) सुधा वर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। भ्रष्टाचार की यह जड़ें इतनी गहरी हैं कि लोकायुक्त की निरंतर कार्रवाइयों के बावजूद अधिकारी सरकारी कार्यों के बदले खुलेआम पैसों की मांग करने से नहीं चूक रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
रीवा के पाण्डेन टोला निवासी ठेकेदार जेके अग्रवाल को नगर परिषद खांड (जिला शहडोल) के खेल मैदान में सीढ़ियों (Stair Case) के निर्माण का टेंडर मिला था। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ठेकेदार ने अपने अंतिम भुगतान (Final Payment) के लिए फाइल आगे बढ़ाई थी। नियमानुसार, भुगतान से पहले कार्य का तकनीकी मूल्यांकन (Evaluation) होना अनिवार्य था। इसी मूल्यांकन के एवज में उपयंत्री सुधा वर्मा ने ठेकेदार से 20,000 रुपये की अवैध मांग की थी।
शिकायत से ट्रैप तक का सफर
परेशान होकर ठेकेदार जेके अग्रवाल ने 7 अप्रैल को एसपी लोकायुक्त रीवा के पास अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की सत्यता जांचने के लिए लोकायुक्त ने रिकॉर्डिंग और अन्य माध्यमों से सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। योजना के अनुसार:
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उपयंत्री ने रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 10,000 रुपये लेकर ठेकेदार को अपने शासकीय आवास पर बुलाया।
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जैसे ही सुधा वर्मा ने रिश्वत की राशि अपने हाथों में ली, पहले से तैनात लोकायुक्त की टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
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केमिकल टेस्ट के दौरान महिला अधिकारी के हाथ गुलाबी हो गए, जिससे घूस लेने की पुष्टि मौके पर ही हो गई।
आरोपी अधिकारी की जानकारी
पकड़ी गई महिला लोकसेवक की पहचान सुधा वर्मा (35 वर्ष) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से ग्राम मड़वास, जिला सीधी की रहने वाली हैं और वर्तमान में नगर परिषद खांड में उपयंत्री के पद पर सेवाएं दे रही थीं। लोकायुक्त ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
कार्रवाई में शामिल टीम
इस सफल ट्रैप कार्रवाई का नेतृत्व निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया ने किया। टीम में अन्य प्रमुख सदस्य शामिल थे:
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निरीक्षक एसराम मरावी
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निरीक्षक आकांक्षा शुक्ला
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उप निरीक्षक और अन्य सहायक कर्मचारी
कुल 12 सदस्यीय टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसमें शासकीय गवाह भी शामिल रहे।
सुशासन के दावों के बीच भ्रष्टाचार की चुनौती
यह कार्रवाई दर्शाती है कि निचले स्तर पर प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। महिला उपयंत्री का इस तरह रंगे हाथों पकड़ा जाना अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है। लोकायुक्त की इस सक्रियता की आम जनता और ठेकेदार संघ ने सराहना की है।