रीवा लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: ब्यौहारी तहसील का घूसखोर बाबू लल्लू प्रजापति ₹75,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

 

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम के तहत रीवा लोकायुक्त पुलिस की टीम ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। इस बार लोकायुक्त के निशाने पर शहडोल जिले की ब्यौहारी तहसील कार्यालय में पदस्थ एक लोकसेवक आया है। लोकायुक्त की विशेष टीम ने तहसील कार्यालय के बुड़वा वृत्त में पदस्थ खंड लेखक (बाबू) लल्लू प्रसाद प्रजापति को ₹75,000 की मोटी घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी बाबू ने एक पीड़ित से अनुविभागीय अधिकारी (SDM) न्यायालय से उसके पक्ष में फैसला करवाने के एवज में ₹1 लाख की डिमांड की थी, जिसके बाद लोकायुक्त ने यह जाल बिछाया।

एसडीएम कोर्ट से पक्ष में फैसला कराने के नाम पर मांगी थी 1 लाख की घूस
यह पूरा सनसनीखेज मामला शहडोल जिले के ब्यौहारी तहसील अंतर्गत आने वाले बुड़वा वृत्त का है। लोकायुक्त एसपी कार्यालय रीवा में पीड़ित रमेश रजक (44 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक 3, बाणसागर देवलांद ने एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि ब्यौहारी तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू लल्लू प्रसाद प्रजापति ने उससे संपर्क साधा था।

बाबू ने रमेश से कहा था कि "तुम्हारा जो मामला ब्यौहारी एसडीएम कोर्ट में चल रहा है, उसे मैं संभाल लूंगा और एसडीएम साहब से कहकर तुम्हारे पक्ष में ही आदेश करवा दूंगा।" इस काम को अंजाम देने के लिए भ्रष्ट बाबू लल्लू प्रजापति ने पीड़ित से ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की मांग की थी। पीड़ित इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ था, लिहाजा काफी मिन्नतें करने के बाद सौदा ₹75,000 में तय हुआ। रमेश रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने सीधे रीवा लोकायुक्त की शरण ली।

दुकान खाली कराने के विवाद से शुरू हुआ था पूरा मामला
इस पूरे रिश्वतकांड की जड़ एक दुकान के कब्जे को खाली कराने के विवाद से जुड़ी हुई है। शिकायतकर्ता रमेश रजक के नाम पर खेर माता रोड (वार्ड नंबर 9) में एक व्यावसायिक दुकान स्थित है। इस दुकान को रमेश ने साल 2017 में दिलीप सोनी नाम के एक व्यक्ति को किराए पर दिया था, जहाँ दिलीप सोने-चांदी के जेवरात की दुकान संचालित कर रहा था।

जब रमेश ने अपनी दुकान खाली करानी चाही, तो किराएदार दिलीप सोनी ने मना कर दिया, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद काफी बढ़ गया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि जनवरी 2026 में दोनों पक्षों ने देवलोंद थाने पहुंचकर एक-दूसरे के खिलाफ एफआईआर (FIR) भी दर्ज करा दी। चूंकि मामला पूरी तरह से राजस्व और जमीन-जायदाद के विवाद से जुड़ा हुआ था, इसलिए पुलिस ने इसका अंतिम निराकरण करने के लिए फाइल को ब्यौहारी तहसील न्यायालय भेज दिया। इसी बात का फायदा उठाकर तहसील के बाबू लल्लू प्रजापति ने पीड़ित को अपने जाल में फंसाना चाहा।

लोकायुक्त की जाल में कैसे फंसा घूसखोर खंड लेखक? फोटोकॉपी दुकान पर हुई कार्रवाई
रमेश रजक की शिकायत मिलने के बाद रीवा लोकायुक्त एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन शिकायत का सत्यापन (Verification) कराया। लोकायुक्त के अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से बाबू और पीड़ित की बातचीत को रिकॉर्ड करवाया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि शत-प्रतिशत सही साबित हुई। इसके तुरंत बाद लोकायुक्त की एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया।

योजना के मुताबिक, 2 जून 2026 की दोपहर को लोकायुक्त टीम ने पीड़ित रमेश को केमिकल युक्त ₹75,000 की नकदी देकर बाबू के पास भेजा। शातिर बाबू लल्लू प्रजापति ने पीड़ित को तहसील कार्यालय के अंदर न बुलाकर, ब्यौहारी एसडीएम ऑफिस के ठीक बाहर स्थित एक फोटोकॉपी की दुकान पर बुलाया था ताकि किसी को शक न हो। जैसे ही रमेश रजक ने फोटोकॉपी दुकान के भीतर पहुंचकर बाबू लल्लू प्रजापति को ₹75,000 सौंपे और बाबू ने पैसे अपने पास रखे, वैसे ही आसपास सादे कपड़ों में तैनात लोकायुक्त की टीम ने धावा बोल दिया। टीम ने आरोपी बाबू को रंगे हाथों पकड़ लिया और पानी में उसके हाथ धुलवाए गए, जिससे उसके हाथ गुलाबी हो गए।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज, शहडोल संभाग में हड़कंप
लोकायुक्त की इस अचानक हुई छापेमारी से ब्यौहारी तहसील कार्यालय और एसडीएम कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। लोकायुक्त की टीम ने आरोपी खंड लेखक लल्लू प्रसाद प्रजापति को हिरासत में लेकर वहीँ पर कागजी कार्रवाई शुरू की। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया गया है।

इस बड़ी कार्रवाई के बाद शहडोल संभाग के राजस्व अमले और अन्य सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि शासकीय दफ्तरों में जनता को परेशान करने वाले और रिश्वतखोरी को बढ़ावा देने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ित नागरिक बिना किसी डर के ऐसे भ्रष्ट लोकसेवकों की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं।