बेऊज धर्मशाला से निकलेगी भव्य शिव बारात, 31 फीट ऊंचे त्रिशूल के दर्शन करेंगे भक्त, पचमठा आश्रम में होगा शिव-पार्वती विवाह
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। इस वर्ष महाशिवरात्रि के उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 551 किलोग्राम वजनी और लगभग 31 फीट लंबा विशाल त्रिशूल होगा। यह दिव्य अस्त्र भगवान भोलेनाथ की शक्ति और त्रिगुणों (सत, रज, तम) के संतुलन का प्रतीक है। इसे विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि भक्त इसके दर्शन कर सकें। शोभायात्रा के दौरान यह त्रिशूल पूरी बारात की शोभा बढ़ाएगा, जिसे देखने के लिए पड़ोसी जिलों से भी लोगों के आने की उम्मीद है।
बेऊज धर्मशाला से पचमठा तक का 'भक्ति पथ'
शिव बारात का शुभारंभ सुबह 9 बजे बेऊज धर्मशाला से होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने बताया कि बारात शहर के हृदय स्थलों से होकर गुजरेगी:
रूट: खजरा चौराहा ➔ स्टेच्यू चौक ➔ साई मंदिर ➔ टक्कर चौराहा ➔ रीत सेंटर ➔ राठौर मोहल्ला ➔ शिल्पी प्लाजा ➔ ब्लॉक रोड ➔ स्वागत भवन ➔ प्रकाश चौक ➔ सिरमौर चौक ➔ फोर्ट रोड।
गंतव्य: अंत में बारात श्रमकल्याण केंद्र के पास स्थित ऐतिहासिक पचमठा आश्रम पहुंचेगी, जहाँ शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न कराया जाएगा।
108 स्थानों पर होगा 'महादेव' का भव्य स्वागत
पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। शहर के व्यापारियों और रहवासियों द्वारा मार्ग में 108 स्थानों पर पुष्पवर्षा और जलपान की व्यवस्था की जाएगी।
बारात की मुख्य झांकियां:
- महाकाल की शाही पालकी और डमरू दल।
- केदारनाथ मंदिर और नरसिंह अवतार की जीवंत झांकी।
- राधा-कृष्ण की रासलीला और शिव-पार्वती के सजीव रूप।
- झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़े और बैंड की गूंज।
- अखाड़ा प्रदर्शन और पारंपरिक लोकनृत्य।
सांस्कृतिक उत्सव और प्रसाद का वितरण
पचमठा आश्रम में विवाह की रस्मों के बाद उत्सव का स्वरूप और भी भव्य हो जाएगा।
- कलाकारों की प्रस्तुति: देश के प्रख्यात कलाकार भजन संध्या में अपनी प्रस्तुति देंगे। यहाँ राजस्थानी घूमर और कृष्ण लीला के साथ सांस्कृतिक नृत्यों का संगम होगा।
- विशाल भंडारा: दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की व्यवस्था की गई है।