₹11 हजार तय, मिले सिर्फ ₹500? रीवा में विधायक नरेंद्र प्रजापति पर पुजारी के आरोप से मचा बवाल!

 
रीवा के मनगवां से भाजपा विधायक नरेंद्र प्रजापति और पुजारी अखिलेश पांडे के बीच नवरात्रि पूजा दक्षिणा विवाद की पूरी सच्चाई, आरोप और बचाव के मुख्य बिंदु।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले की राजनीति इन दिनों एक अनोखे और गरमाए हुए विवाद की वजह से चर्चा में है। रीवा जिले के अंतर्गत आने वाली महत्वपूर्ण मनगवां विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक नरेंद्र प्रजापति पर नवरात्रि के दौरान एक मंदिर में पूजा संपन्न कराने वाले पुजारी द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह पूरा मामला दक्षिणा (पूजा पारिश्रमिक) के लेनदेन से जुड़ा हुआ है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस लेख में हम इस पूरे विवाद के सभी पहलुओं, दोनों पक्षों के दावों और मंदिर के आचार्यों के बयानों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।

मनगवां विधानसभा सीट और विधायक नरेंद्र प्रजापति का परिचय
मनगवां रीवा जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है, जहां राजनीतिक गतिविधियां हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा विधायक नरेंद्र प्रजापति कर रहे हैं। क्षेत्र में उनके द्वारा लगातार धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जाता है। हाल ही में संपन्न हुए नवरात्रि पर्व के दौरान भी उनके द्वारा रीवा के प्रसिद्ध मुंबा देवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का कार्यक्रम आयोजित कराया गया था। हालांकि, यह धार्मिक आयोजन अब राजनीतिक और व्यक्तिगत बयानों के चलते विवादों के घेरे में आ गया है।

मुंबा देवी मंदिर विवाद: पूरा मामला क्या है?
नवरात्रि का पर्व पूरे देश के साथ-साथ रीवा में भी बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मुंबा देवी मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय अनुष्ठान के दौरान पूजा-पाठ संपन्न कराने के लिए स्थानीय पुजारियों को आमंत्रित किया गया था। अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, अचानक से तब विवाद खड़ा हो गया जब एक पुजारी का वीडियो सामने आया जिसमें दक्षिणा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब एक तरफ पुजारी ने तय राशि से बहुत कम पैसे मिलने का दावा किया, वहीं दूसरी तरफ मंदिर के मुख्य आचार्यों ने इसे विधायक की छवि धूमिल करने का एक राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया।

पुजारी अखिलेश पांडे के आरोप और वीडियो का वायरल होना
मुंबा देवी मंदिर में पूजा कराने वाले पुजारी अखिलेश पांडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पुजारी ने दावा किया है कि:

  • अनुष्ठान शुरू होने से पहले पूजा कराने के एवज में कुल 11,000 रुपये की राशि तय की गई थी।
  • पूजा और अनुष्ठान पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न होने के बाद उन्हें तय राशि देने के बजाय केवल 500 रुपये थमाए गए।
  • पुजारी का यह भी आरोप है कि अन्य पुजारियों को उनकी पूरी तय राशि मिली है, जबकि उनके साथ भेदभाव किया गया।
  • इस वीडियो के सामने आने के बाद रीवा जिले के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

मुख्य आचार्य पंडित संजीव उर्मालिया और विष्णु देव कुशवाहा का पक्ष
पुजारी के आरोपों के सामने आने के बाद मंदिर के मुख्य प्रबंधन और अन्य वरिष्ठ लोगों ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी और स्थिति को स्पष्ट किया:

मुख्य आचार्य पंडित संजीव उर्मालिया का बयान: मंदिर के मुख्य आचार्य पंडित संजीव उर्मालिया ने पुजारी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विधायक नरेंद्र प्रजापति की तरफ से संबंधित पुजारी को हर दिन 500 रुपये की राशि दी जाती थी। इस हिसाब से नौ दिनों के अनुष्ठान के दौरान कुल 4,500 रुपये की राशि दी जा चुकी थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरा नवरात्रि कार्यक्रम बेहद धूमधाम और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ था।

विष्णु देव कुशवाहा का बयान: स्थानीय निवासी और सहयोगी विष्णु देव कुशवाहा ने इन तमाम आरोपों को विधायक के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया। उन्होंने कहा कि यह सब विधायक की साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने का एक प्रयास मात्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक प्रतिदिन ब्राह्मण पूजन के बाद पारंपरिक रीति-रिवाज और भेंट स्वरूप 500 रुपये प्रतिदिन की दर से दक्षिणा दे रहे थे, जिसे अब गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

विधायक नरेंद्र प्रजापति की सफाई और निराधार बयान
मामले के तूल पकड़ने के बाद विधायक नरेंद्र प्रजापति की ओर से भी आधिकारिक बयान सामने आया है। विधायक ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और झूठा बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा से ब्राह्मणों और धार्मिक अनुष्ठानों का पूर्ण सम्मान किया है। नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर इस तरह के झूठे आरोप लगाना केवल उनकी लोकप्रियता को गिराने और राजनीतिक लाभ लेने की एक साजिश है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक हलचल
जैसे ही पुजारी अखिलेश पांडे का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ, रीवा और आसपास के क्षेत्रों में यह चर्चा का विषय बन गया। जनता और विभिन्न सोशल मीडिया यूजर्स इस मामले पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं: एक धड़ा जहां पुजारियों के मानद सम्मान और तयशुदा रकम के भुगतान की बात कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे बिना वजह तूल देने और राजनीतिक रोटियां सेकने का प्रयास मान रहा है। इस प्रकार के छोटे स्थानीय विवाद भी सोशल मीडिया के दौर में बहुत जल्दी बड़े राजनीतिक मुद्दों का रूप ले लेते हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों की छवि पर असर पड़ता है।

रीवा के मनगवां विधानसभा क्षेत्र में मुंबा देवी मंदिर के भीतर उपजा यह दक्षिणा विवाद वर्तमान में जांच और चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां पुजारी अखिलेश पांडे ₹11,000 की बात पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्य आचार्य पंडित संजीव उर्मालिया और विधायक पक्ष के लोगों ने 9 दिनों तक प्रतिदिन ₹500 (कुल ₹4,500) देने की बात कहकर इस मामले को अलग मोड़ दे दिया है। इस तरह के मामलों में दोनों पक्षों के दावों के बीच का अंतर यह सिखाता है कि धार्मिक आयोजनों में आर्थिक लेन-देन और मान-सम्मान के विषयों को पहले ही बेहद स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से सुलझा लेना चाहिए ताकि ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।