सिरमौर चौराहा बना रणक्षेत्र: एसडीएम से तीखी बहस के बाद विधायक अभय मिश्रा गिरफ्तार, समर्थकों में भारी आक्रोश

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य की राजनीति और रीवा के संजय गांधी अस्पताल से जुड़े बहुचर्चित मामलों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मृतका कल्पना मिश्रा के पिता को धरना स्थल से हटाए जाने और अस्पताल भेजे जाने के विरोध में गुरुवार को दोपहर करीब 1 बजे स्थानीय विधायक अभय मिश्रा अपने समर्थकों के साथ प्रमुख सिरमौर चौराहे पर पहुंच गए। चौराहे पर पहले से ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला तैनात था। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब विधायक और अधिकारियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कड़ा कदम उठाते हुए विधायक अभय मिश्रा को वहां से बलपूर्वक हटाकर हिरासत में ले लिया।

सिरमौर चौराहे पर प्रशासनिक जमावड़ा और विधायक की एंट्री
गुरुवार को दोपहर के वक्त अचानक सिरमौर चौराहे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब विधायक अभय मिश्रा अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। पिछले कुछ दिनों से इस चौराहे पर चल रहे अनशन और धरने को लेकर प्रशासन पहले से ही सतर्क था। चौराहे पर पहुंचते ही विधायक ने मौके पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे लोगों को वहां एकत्र होने और बैठने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों और धाराओं को लेकर भी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच गर्मागर्म माहौल बन गया।

एसडीएम और विधायक के बीच तीखी बहस
चौराहे पर मौजूद एसडीएम अनुराग तिवारी और विधायक अभय मिश्रा के बीच काफी देर तक कड़े शब्दों में बहस हुई। प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष था कि सिरमौर चौराहा शहर का अत्यंत व्यस्त और कमर्शियल मार्ग है, जहां इस तरह का जमावड़ा होने से आम नागरिकों और यातायात व्यवस्था पर भारी असर पड़ रहा है। अधिकारियों ने भीड़ को तितर-बितर करने और तुरंत वहां से हटने का निर्देश दिया। बहस के दौरान जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और धक्का-मुक्की की नौबत आई, तो विधायक ने पुलिसकर्मियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि उन्हें बिना वजह हाथ न लगाया जाए। इसके बावजूद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विधायक को मौके से हटा दिया और उनके समर्थकों को भी खदेड़ दिया।

रामशरण मिश्रा का अनशन और पुलिस का पूर्ववर्ती एक्शन
इस पूरे विवाद की जड़ में मृतका कल्पना मिश्रा के पिता रामशरण मिश्रा का वह अनशन है, जो वे 2 सितंबर से सिरमौर चौराहे पर लगातार जारी रखे हुए थे। उनकी मांग थी कि उनकी बेटी और नवजात शिशु की इलाज के दौरान हुई मौत के लिए जिम्मेदार लापरवाह लोगों के खिलाफ तत्काल आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। लगातार 15 दिनों से अन्न-जल त्यागे रहने के कारण उनकी सेहत गंभीर रूप से गिर चुकी थी। इसी को आधार बनाते हुए 16 सितंबर को पुलिस और प्रशासनिक अमले ने बलपूर्वक उनका टेंट उखाड़ दिया और उन्हें उठाकर जिला अस्पताल पहुंचा दिया। प्रशासन ने तर्क दिया था कि उनकी बिगड़ती सेहत और यातायात सुचारू रखने के लिए बिना अनुमति चल रहे इस धरने को समाप्त करना अनिवार्य था।

"परिवार की आवाज को दबाया नहीं जा सकता": विधायक अभय मिश्रा
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले विधायक अभय मिश्रा ने मीडिया और प्रशासन के सामने तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि एक पीड़ित परिवार अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा है, और प्रशासन उनकी जायज मांगों को दबाने का प्रयास कर रहा है। विधायक ने कहा कि जब तक कल्पना मिश्रा के परिवार को पूरी तरह न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे और उनके समर्थक जनता की इस आवाज को यूं ही उठाते रहेंगे। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल उठाए, हालांकि प्रशासन ने अपने स्तर पर कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को उचित ठहराया है।

कल्पना मिश्रा प्रकरण: पृष्ठभूमि और मजिस्ट्रियल जांच
उल्लेखनीय है कि 26 अगस्त को रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसव के दौरान कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घटना के सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और परिवार लगातार उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। इस मामले में पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर मजिस्ट्रियल जांच बिठाए जाने की आधिकारिक जानकारी सामने आ चुकी है। इससे पहले भी विधायक अभय मिश्रा इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर राजधानी भोपाल तक में विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। ताजा घटनाक्रम के बाद शहर में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक चाक-चौबंद कर दी गई है।