यातायात विभाग पूरी तरह फेल! रीवा की सड़कों पर सुपरबाइक्स के जानलेवा धमाके, आंखें मूँदकर तमाशा देख रहे जिम्मेदार!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य की सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहचान रखने वाला रीवा शहर इन दिनों एक नए प्रकार के सामाजिक उपद्रव से जूझ रहा है। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर शांत रिहायशी कॉलोनियों तक, मॉडिफाइड साइलेंसर लगी मोटरसाइकिलों का कानफोड़ू शोर और जानलेवा स्टंटबाज़ी आम नागरिकों के मानसिक सुकून पर सीधा हमला कर रही है। रफ्तार के शौकीन युवा अपनी मोटरसाइकिलों में कंपनी के मानक साइलेंसरों को निकालकर अवैध रूप से बाजार में मिलने वाले "पटाखा साइलेंसर" लगवा रहे हैं, जो थ्रॉटल खींचते ही किसी बम या गोली के चलने जैसी भीषण आवाज पैदा करते हैं।
इस समस्या ने अब रीवा की सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सुबह की सैर पर निकलने वाले वरिष्ठ नागरिकों से लेकर स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों और मरीजों तक, हर वर्ग इन हुड़दंगियों की हरकतों से त्रस्त हो चुका है। सड़कों पर खुलेआम हो रही इस मनमानी से न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण अपने चरम पर पहुँच रहा है, बल्कि राहगीरों के लिए हर पल दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
सरेराह खतरनाक स्टंटबाज़ी: रफ्तार के शौकीनों की सनक से सहमे राहगीर
शहर के कुछ चिन्हित रास्तों जैसे कॉलेज चौराहा, सिरमौर चौराहा, अस्पताल मार्ग, विश्वविद्यालय रोड और बायपास क्षेत्र में शाम ढलते ही मॉडिफाइड बाइक्स का जमघट शुरू हो जाता है। बिना किसी सुरक्षा उपकरण या हेलमेट के, दर्जनों युवा भारी-भरकम बाइक्स को एक पहिए पर उठाकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में लहराते हुए निकालते हैं। चलती गाड़ियों के बीच अचानक तेज ब्रेक लगाकर बाइक को सरेराह घसीटना और ज़िग-ज़ैग पैटर्न में वाहन चलाना इन स्टंटबाज़ों का रोज़मर्रा का शगल बन चुका है। केवल इंस्टाग्राम और फेसबुक पर व्यूज़ और लाइक्स पाने के चक्कर में ये सिरफिरे बाइकर्स अपनी और दूसरों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। कई बार रील बनाने के लिए पूरा दस्ता सड़क का रास्ता रोककर रेस लगाता दिखाई देता है।
अचानक तेज धमाके से बिगड़ रहा गाड़ियों का संतुलन: बड़े हादसों का मंडराता खतरा
जब कोई वाहन चालक सड़क पर पूरी सतर्कता के साथ अपनी लेन में गाड़ी चला रहा होता है, तब अचानक उसके ठीक बगल से कोई मॉडिफाइड बुलेट तेज़ गड़गड़ाहट और "पटाखे" की आवाज़ छोड़ते हुए गुज़रती है। इस आकस्मिक शोर का प्रभाव किसी मानसिक झटके से कम नहीं होता।
घटना/असर प्रभाव का दायरा जोखिम का स्तर
चालक का ध्यान भटकना दोपहिया व ई-रिक्शा चालक अत्यधिक गंभीर (हादसे की संभावना)
बुजुर्गों में घबराहट पैदल राहगीर व हृदय रोगी स्वास्थ्य के लिए घातक
जानवरों का भड़कना सड़क पर मौजूद मवेशी अचानक अनियंत्रित होना
कानों पर असर आसपास मौजूद नागरिक बहरेपन और तनाव का कारण
अचानक हुए धमाके से घबराकर कई बार नए या महिला चालक संतुलन खो देते हैं, जिससे गाड़ियाँ आपस में टकरा जाती हैं। रीवा की संकरी और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर यह पटाखा साइलेंसर किसी चलत-फिरते खतरे जैसा साबित हो रहा है।
अस्पतालों और रिहायशी कॉलोनियों में मरीजों-बुजुर्गों की नींद हराम
रीवा शहर विंध्य क्षेत्र का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है, जहाँ संजय गांधी अस्पताल सहित दर्जनों सुपर-स्पेशलिटी और निजी अस्पताल संचालित हैं।
नियमानुसार अस्पताल, कोर्ट और शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का शोर पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। इसके बावजूद स्टंटबाज़ सिरमौर चौराहा, सिविल लाइन, पुराना कोर्ट कैंपस, शिल्पी प्लाजा, फ़ूड पार्क, अटल पार्क,अस्पताल चौराहों के पास जानबूझकर एक्सीलेटर खींचकर धमाके करते हैं। आईसीयू और एनआईसीयू में भर्ती नवजात बच्चों और दिल की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह तीखा शोर बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। विंध्य बिहार कॉलोनी, नीलकंठ कॉलोनी, द्वारका नगर और पद्मधर कॉलोनी जैसे शांतिपूर्ण इलाकों में भी रात 10 बजे के बाद ये बाइकर्स पटाखे फोड़ते हुए फर्राटा भरते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और लोगों की नींद पूरी तरह बाधित हो रही है।
ट्रैफिक डीएसपी सत्य प्रकाश मिश्रा का कड़ा रुख: जप्त होंगे वाहन, कटेगा भारी चालान
सड़कों पर फैल रही इस अराजकता का कड़ा संज्ञान लेते हुए यातायात डीएसपी सत्य प्रकाश मिश्रा ने स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। पुलिस प्रशासन ने ऐसे मनचलों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त वैधानिक अभियान छेड़ने की रूपरेखा तैयार कर ली है। "यातायात नियमों से खिलवाड़ और आम जनता की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने वाले वाहन स्वामियों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ वाहनों को सीधे जप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। स्टंटबाज़ी करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा भी की जाएगी।" — सत्य प्रकाश मिश्रा, डीएसपी (यातायात), रीवा
मैकैनिकों और ऑटो पार्ट्स दुकानों पर शिकंजा कसना क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि केवल वाहन चालकों पर चालान काटने से यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी। जब तक उन दुकानों और गैरेज पर शिकंजा नहीं कसा जाएगा, जहाँ ये साइलेंसर बेचे और फिट किए जाते हैं, तब तक इस पर पूर्ण प्रतिबंध संभव नहीं है।
अवैध मॉडिफिकेशन गैरेज पर दबिश: पुलिस को उन लोकल मैकैनिकों को भी चेतावनी देनी होगी जो चंद रुपयों के लालच में स्टॉक साइलेंसर निकालकर अवैध पाइप और पटाखा मशीनें फिट करते हैं।
ऑटो पार्ट्स दुकानों की जाँच: शहर में बिक रहे अवैध आफ्टर-मार्केट चाइनीज़ और मॉडिफाइड साइलेंसरों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए व्यापारिक प्रतिष्ठानों की औचक जाँच आवश्यक है।
अभिभावकों की जवाबदेही: कई मामलों में नाबालिग और कॉलेज पढ़ने वाले युवा इन गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं। माता-पिता को भी ध्यान देना होगा कि उनका बच्चा गाड़ी में क्या बदलाव करवा रहा है और सड़क पर कैसे वाहन चला रहा है।