Rewa Murder Case: विंध्य बिहार कॉलोनी में सरेराह खूनी खेल, अमित कोल हत्याकांड के तीनों आरोपी दबोचे गए!

 

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विंध्य बिहार (बिंद बिहार) कॉलोनी के पास बीती रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता और एसटी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अमित कोल की सरेराह चाकू गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई।

अमित कोल क्षेत्र के एक बेहद सक्रिय युवा राजनेता थे और उन्होंने वार्ड क्रमांक-4 से पार्षद पद का चुनाव भी लड़ा था। इस खूनी वारदात ने केवल स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर ही सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि पूरे जिले की राजनीतिक और सामाजिक आबोहवा में भारी रोष और आक्रोश पैदा कर दिया है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी सर्विलांस और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी लकी दाहिया, मनु दाहिया और अंकित दाहिया को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों ही आरोपी पूर्व में भी कई आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं और उनका बकायदा पुलिस रिकॉर्ड मौजूद है।

विंध्य बिहार में साथ बैठे दोस्तों के बीच कैसे शुरू हुआ खूनी विवाद?
प्राप्त जानकारी और पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार, घटना वाली रात अमित कोल अपने ही परिचितों—लकी दाहिया, मनु दाहिया और अंकित दाहिया के साथ विंध्य बिहार कॉलोनी क्षेत्र में एक जगह बैठे हुए थे।

  • आपसी कहासुनी और कहा-सुनी का उग्र रूप: शुरुआत में चारों के बीच सामान्य बातचीत चल रही थी, लेकिन देखते ही देखते किसी पुरानी बात या तात्कालिक मुद्दे को लेकर उनके बीच तीखी बहस छिड़ गई।
  • अचानक जानलेवा हमला: विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि आरोपियों ने आपा खो दिया। आरोपियों (लकी, मनु और अंकित) ने पूर्व नियोजित तरीके या तैश में आकर अपने पास मौजूद तेजधार चाकुओं से अमित कोल पर एक के बाद एक ताबड़तोड़ कई वार कर दिए।
  • बचाव का नहीं मिला मौका: हमला इतना तीव्र और अचानक था कि अमित कोल को न तो संभलने का मौका मिला और न ही बचाव का। शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर गहरे जख्म होने के कारण वह अत्यधिक रक्तस्राव से वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़े।
  • अस्पताल में दुखद अंत: स्थानीय नागरिकों और साथियों की मदद से गंभीर अवस्था में अमित को तत्काल संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल (SGMH) ले जाया गया। हालांकि, अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सीसीटीवी फुटेज और आपराधिक रिकॉर्ड से 3 आरोपियों की नाटकीय गिरफ्तारी
वारदात की सूचना मिलते ही रीवा पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में साइबर सेल, फॉरेंसिक टीम और विभिन्न थाना प्रभारियों की अलग-अलग संयुक्त टीमों का गठन किया गया। पुलिस जांच की चरणबद्ध प्रक्रिया इस प्रकार रही:

  • CCTV फुटेज खंगालना: घटनास्थल के आसपास के वाणिज्यिक भवनों, बैंकों और दुकानों के सीसीटीवी कैमरों की डिजिटल फुटेज एकत्र कर हमलावरों के चेहरे और भागने के रूट की स्पष्ट पहचान की गई।
  • क्रिमिनल हिस्ट्री चेक: संदेही लकी दाहिया, मनु दाहिया और अंकित दाहिया का पूर्व में 2 से 3 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड सामने आया, जिससे पुलिस को उनकी ट्रैकिंग में काफी आसानी हुई।
  • दबिश और गिरफ्तारी: सिविल लाइन थाना पुलिस ने सटीक इनपुट के आधार पर विंध्य बिहार (बिंद बिहार) कॉलोनी के पास घेराबंदी करके तीनों आरोपियों को दबोच लिया।
  • पूछताछ और साक्ष्य जुटान: आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर हत्या में प्रयुक्त हथियार (चाकू) और अन्य महत्वपूर्ण सबूत एकत्र किए जा रहे हैं।

पिता के संन्यास (रिटायरमेंट) से 2 दिन पहले पसरा मातम: एक पारिवारिक त्रासदी
इस जघन्य हत्याकांड का सबसे दर्दनाक और भावुक पहलू मृतक की पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। अमित कोल के पिता मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में कार्यरत हैं और वर्तमान में अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम (राजेंद्र नगर) थाने में थाना प्रभारी (TI) के पद पर पदस्थ हैं।

जीवन का दर्दनाक मोड़:
अमित के पिता मात्र दो दिन बाद (31 जुलाई को) अपनी वर्षों की शासकीय सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त (Retire) होने वाले थे। पूरा परिवार उनके सेवा-निवृत्त होने की खुशियां मनाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन रिटायरमेंट से ठीक दो दिन पहले जवान बेटे की सरेराह हत्या की खबर ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। इस घटना के बाद से ही कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं और संपूर्ण आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है। सभी ने दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।

क्राइम एनालिसिस और प्रमुख अंतर्दृष्टि 

  • सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों की निर्णायक भूमिका: घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों ने आरोपियों की पहचान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पुलिस कुछ ही घंटों में अपराधियों तक पहुंच सकी।
  • हिस्ट्रीशीटरों पर निगरानी की आवश्यकता: तीनों आरोपियों का पूर्व में आपराधिक रिकॉर्ड (2-3 केस दर्ज) होना यह साबित करता है कि अभ्यस्त अपराधियों की नियमित मॉनिटरिंग कितनी जरूरी है।
  • अत्यधिक रक्तस्राव बना मृत्यु का कारण: संजय गांधी अस्पताल पहुंचने से पहले ही अत्यधिक खून बह जाना इस बात का प्रमाण है कि हमलावरों ने कितनी बेरहमी से वार किए थे।
  • अंतर-विभागीय पुलिस समन्वय: पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में साइबर, FSL और थाना टीमों के बेहतर तालमेल ने केस को बिना भटके तुरंत सुलझाने में मदद की।
  • आपसी कहासुनी का खूनी अंजाम: यह मामला दिखाता है कि कैसे छोटी-मोटी कहासुनी या पुराने विवाद अचानक भीषण हिंसा का रूप ले लेते हैं।