BREAKING: रीवा नेशनल हॉस्पिटल में शॉर्ट सर्किट के बाद खूनी संघर्ष, फिर लाठी-डंडों से बरसे डॉक्टर और स्टाफ; वीडियो वायरल

 
रीवा के नेशनल हॉस्पिटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के बाद वीडियो बनाने को लेकर डॉक्टर और परिजनों में खूनी संघर्ष हुआ, पुलिस जांच जारी है।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा शहर से एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रीवा के समान नाका (चौराहे) के पास स्थित नेशनल नर्सिंग होम (नेशनल हॉस्पिटल) में अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर के भीतर अफरा-तफरी और भगदड़ का माहौल निर्मित हो गया। हालांकि, इस हादसे में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आग बुझने के बाद अस्पताल के स्टाफ और मरीजों के अटेंडरों (परिचारकों) के बीच हिंसक झड़प हो गई। लाठी-डंडों से हुई इस मारपीट का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने अस्पताल प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शॉर्ट सर्किट और आग लगने की पूरी कहानी 
रीवा के नेशनल हॉस्पिटल में आग क्यों लगी?
यह पूरी घटना मंगलवार की शाम को घटित हुई। शुरुआती तकनीकी जांच और अस्पताल प्रबंधन के बयानों के अनुसार, उस दिन शहर का तापमान अत्यधिक उच्च (लगभग 45 डिग्री सेल्सियस) था। भयंकर गर्मी के कारण अस्पताल के मेन इलेक्ट्रिकल पैनल पर लोड बढ़ गया, जिसके चलते विद्युत उपकरणों में शॉर्ट सर्किट हो गया।

आग लगने के बाद क्या हुआ?
भगदड़ की स्थिति: जैसे ही शॉर्ट सर्किट के कारण धुआं और आग की लपटें उठीं, अस्पताल के भीतर मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में अपनी जान बचाने की होड़ लग गई।

मरीजों का रेस्क्यू: अस्पताल में उस वक्त भारी संख्या में गंभीर मरीज भर्ती थे। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए अंदर मौजूद लोगों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकालने का काम शुरू किया गया।
आग पर नियंत्रण: राहत की बात यह रही कि नेशनल नर्सिंग होम के पास पर्याप्त मात्रा में अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguishers) उपलब्ध थे। अस्पताल के प्रशिक्षित कर्मचारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत आग पर काबू पा लिया, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा होने से टल गया।

वीडियो बनाने पर विवाद: डॉक्टर और स्टाफ की मारपीट का सच विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
आग लगने के दौरान अस्पताल के भीतर सुनीता मिश्रा नामक एक महिला मरीज भी भर्ती थीं। अपनी मां की जान खतरे में देख उनके पुत्र प्रिंस मिश्रा और उनके दोस्तों ने उन्हें वार्ड से बाहर सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। इसी अफरा-तफरी के बीच, वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था और बदइंतजामी को रिकॉर्ड करने के लिए परिजनों ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

हॉस्पिटल स्टाफ ने मारपीट क्यों की?
अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों को वीडियो बनाया जाना नागवार गुजरा। आरोपों के मुताबिक:

  • फोन छीनना और गाली-गलौज: वीडियो बनता देख वहां मौजूद डॉक्टर अखिलेश पटेल आक्रोशित हो गए। उन्होंने वीडियो बना रहे युवक के साथ गाली-गलौज की और उसका मोबाइल फोन जबरन छीन लिया।
  • लाठी-डंडों से हमला: डॉक्टर के निर्देश पर अस्पताल के अन्य कर्मचारी और बाउंसर लाठी-डंडे लेकर आ गए और मरीजों के परिजनों पर टूट पड़े।
  • गंभीर चोटें: इस हिंसक झड़प में प्रिंस मिश्रा और आशीष पटेल सहित कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल युवाओं के शरीर पर लाठियों और डंडों के गहरे निशान पाए गए हैं। इसके अलावा, डॉक्टर पर यह भी आरोप लगा है कि उन्होंने मोबाइल से रिकॉर्ड किया गया वीडियो जबरन डिलीट करवा दिया।

अस्पताल प्रबंधन बनाम मरीज के परिजन: आरोप-प्रत्यारोप 
इस घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

मरीजों के परिजनों का पक्ष
घायल परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नेशनल हॉस्पिटल का प्रबंधन मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ अमानवीय व्यवहार करता है। आपातकाल के समय सुरक्षा देने के बजाय, वहां के स्टाफ ने गुंडों की तरह व्यवहार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर मारपीट के वीडियो और अपनी चोटों की तस्वीरें सबूत के तौर पर जारी की हैं।

अस्पताल प्रबंधन की सफाई
दूसरी ओर, नेशनल नर्सिंग होम के प्रबंधन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि:

  • शॉर्ट सर्किट एक मामूली तकनीकी खराबी थी, जिसे उनके स्टाफ ने सूझबूझ से तुरंत संभाल लिया था।
  • विवाद करने वाले मरीज के परिजन नशे की हालत में थे और वे जानबूझकर अस्पताल के कार्य में बाधा डाल रहे थे।
  • परिजनों ने पहले स्टाफ के साथ अभद्रता और मारपीट की, जिसके बाद आत्मरक्षा और परिसर की शांति बनाए रखने के लिए उन्हें बाहर निकाला गया। अस्पताल ने इस अभद्रता की सीसीटीवी व अन्य रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी है।

रीवा पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
घटना की गंभीरता को देखते हुए पीड़ितों ने तुरंत समान थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मारपीट और अभद्रता का वीडियो साक्ष्य के रूप में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के दावों, वायरल वीडियो और अस्पताल द्वारा सौंपी गई रिकॉर्डिंग की बारीकी से जांच की जा रही है, और दोषियों के खिलाफ शीघ्र व सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अस्पतालों में सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन पर उठते सवाल 
रीवा की इस घटना ने चिकित्सा क्षेत्र की कुछ गंभीर कमियों को उजागर किया है:

आपातकालीन स्थिति में संयम की कमी: किसी भी अस्पताल में आग लगना एक गंभीर आपदा है। ऐसे समय में स्टाफ का काम मरीजों को ढांढस बंधाना और सुरक्षित करना होता है, न कि उनके साथ मारपीट करना।
सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता: अत्यधिक तापमान (45 डिग्री सेल्सियस) के कारण शॉर्ट सर्किट होना यह दर्शाता है कि अस्पतालों के इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का नियमित ऑडिट नहीं हो रहा है।
मरीजों के अधिकारों का हनन: यदि कोई नागरिक अस्पताल की अव्यवस्था का वीडियो बनाता है, तो उसका फोन छीनना और मारपीट करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

भविष्य में इस तरह के हादसों और हिंसक टकरावों को रोकने के लिए सरकार को निजी अस्पतालों के लिए कड़े दिशा-निर्देश और संकट प्रबंधन (Crisis Management) की ट्रेनिंग अनिवार्य करनी होगी।