जुगाड़ बनाम ईमानदारी: डीईओ की कुर्सी पर कौन होगा काबिज? सस्पेंस खत्म, डॉ. प्रेमलाल मिश्रा को मिली रीवा की कमान
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा के शिक्षा महकमे में लंबे समय से चली आ रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए रीवा जिले के नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की नियुक्ति की घोषणा कर दी है। अब शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 01, रीवा के प्राचार्य डॉ. प्रेमलाल मिश्रा रीवा शिक्षा विभाग की कमान संभालेंगे।
स्थानांतरण आदेश के मुख्य बिंदु
स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय द्वारा दिनांक 18 जून 2026 को जारी स्थानांतरण सूची में डॉ. प्रेमलाल मिश्रा को प्रभारी सहायक संचालक, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, रीवा के रूप में पदस्थ किया गया है। गौरतलब है कि इससे पूर्व वे सीधी जिले में भी जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जिससे उनके पास प्रशासनिक अनुभवों का एक लंबा दायरा है। शासन ने उन्हें अस्थायी रूप से यह अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
कुर्सी के लिए चल रहे कयासों का अंत
पिछले कुछ समय से डीईओ रामराज मिश्रा के आगामी जुलाई माह में सेवानिवृत्त होने की चर्चाओं के बीच, जिले में नए डीईओ को लेकर भारी खींचतान मची थी। इस दौड़ में कई नाम शामिल थे, जिनमें वरिष्ठता और राजनीतिक सिफारिशों के बीच रस्साकशी जारी थी। विभिन्न कयास लगाए जा रहे थे कि विभाग में किसे मौका मिलेगा, लेकिन शासन के इस निर्णय ने सभी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं को शांत कर दिया है। डॉ. मिश्रा की नियुक्ति ने स्पष्ट कर दिया है कि विभाग ने अनुभव को प्राथमिकता दी है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की नई उम्मीदें
डॉ. प्रेमलाल मिश्रा का शिक्षा क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है, विशेषकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 01 के प्राचार्य के रूप में उनकी कार्यशैली को काफी सराहा गया है। अब जब वे रीवा के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बने हैं, तो शिक्षा विभाग के शिक्षक और कर्मचारी उनसे भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी कार्यप्रणाली की उम्मीद कर रहे हैं। जिले की शिक्षा व्यवस्था, जो पिछले कुछ समय से विवादों और प्रशासनिक फेरबदल के बीच अटकी थी, अब नई दिशा की ओर बढ़ने की संभावना है।
डीईओ की कुर्सी की रेस में शामिल प्रमुख दावेदार
डीईओ रामराज मिश्रा के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद को लेकर कई वरिष्ठ प्राचार्यों और अधिकारियों के बीच लंबी खींचतान चल रही थी। इस दौड़ में शामिल प्रमुख नाम निम्नलिखित थे:
- आरएल दीपांकर: मार्तण्ड उत्कृष्ट क्रमांक-3 के प्राचार्य आरएल दीपांकर का नाम इस दौड़ में काफी चर्चित था। अपनी वरिष्ठता और राजनीतिक गलियारों में मजबूत पकड़ के चलते उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
- सुधा मिश्रा: यदि शासन द्वारा वरिष्ठता को मुख्य मानक बनाया जाता, तो सगरा की प्राचार्य सुधा मिश्रा का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा था।
- अन्य दावेदार: कुर्सी पाने की चाहत में आकांक्षा सोनी, शिव कुमार त्रिपाठी और महेश कुमार तिवारी जैसे नाम भी चर्चाओं में बने हुए थे।
- जेपी जैसवाल और संजय सक्सेना: यदि मामला विधानसभा स्तर तक पहुँचता, तो इन नामों पर भी विचार किए जाने की प्रबल संभावना थी।
- वरुणेन्द्र प्रताप सिंह: पीके स्कूल के प्राचार्य वरुणेन्द्र प्रताप सिंह को अपनी बेदाग कार्यशैली के कारण इस दौड़ में एक 'डार्क हॉर्स' (ईमानदार विकल्प) के रूप में देखा जा रहा था।