रीवा में सरेआम मौत का सौदा! SP ऑफिस भी नहीं बचा सुरक्षित : 'ओरिजिनल माल है, पीकर देखो' – रीवा में सरेआम नशे के सौदागरों का खुला चैलेंज
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति उस समय हास्यास्पद हो गई जब शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके—पुलिस अधीक्षक कार्यालय (SP Office)—के ठीक बगल में नशे का खुला बाजार लगा पाया गया। यह रिपोर्ट केवल एक घटना नहीं, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलती है जो "नशा मुक्त रीवा" का दावा तो करता है, लेकिन अपनी नाक के नीचे हो रहे अपराध को देख नहीं पाता।
SP ऑफिस से मात्र 200 मीटर दूर 'मौत का ठेला' कैसे चल रहा है?
रीवा के पुराना बस स्टैंड और इको पार्क के आसपास का क्षेत्र इन दिनों चर्चा में है। यहाँ फल बेचने वाले सामान्य ठेलों की आड़ में कोरेक्स (कोडीन युक्त सिरप) का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। वीडियो में एक तस्कर सरेआम सड़क पर खड़ा होकर ग्राहकों को माल दिखा रहा है और कहता है, “एक बार पीकर देखो, एकदम ओरिजिनल माल है।” यहाँ धड़ल्ले से एक बोतल सिरप ₹450 में बेची जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यापार छिपकर नहीं, बल्कि पुलिस की पीसीआर वैन के गुजरने के कुछ ही मिनटों बाद फिर से शुरू हो जाता है।
ऑपरेशन प्रहार-2 और पुलिस की संदिग्ध भूमिका
रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत ने साल 2025 में "ऑपरेशन प्रहार" की शुरुआत बड़े जोर-शोर से की थी। उन्होंने कबाड़ी मोहल्ले जैसे संवेदनशील इलाकों का दौरा भी किया था और पुलिसकर्मियों को चेतावनी दी थी कि "तालाब को गंदा करने वाली मछलियां" सुधर जाएं।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है:
- यातायात थाना: कबाड़ी मोहल्ले से मात्र 100 मीटर की दूरी पर है, फिर भी वहाँ नशा बिक रहा है।
- सिविल लाइन थाना: शहर का वीआईपी थाना होने के बावजूद यहाँ के कई मोहल्ले नशे के हब बन चुके हैं।
- बीट प्रणाली: आईजी की चेतावनी के बावजूद बीट प्रभारियों की जानकारी के बिना इतना बड़ा नेटवर्क चलना संभव नहीं लगता।
'कोरेक्स सिटी' का दाग और सियासी रस्साकशी
रीवा की इस बदहाली पर राजनीति भी चरम पर है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और सांसद जनार्दन मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से युवाओं के बर्बाद होते भविष्य पर चिंता जताई है। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर हमलावर है। कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने रीवा को "कोरेक्स सिटी" कहकर संबोधित किया है और पुलिस पर अपराधियों को संरक्षण देने का सीधा आरोप लगाया है।
स्थानीय नागरिक बीके माला ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, "जब पुलिस के आला अधिकारियों के दफ्तर के बाहर ही नशा बिकेगा, तो आम आदमी सुरक्षित महसूस कैसे करेगा?"
बिना पर्चे की बिक्री: कानून की सरेआम धज्जियां
ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के अनुसार, कोडीन युक्त दवाओं को बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के बेचना एक गंभीर अपराध है। इसके बावजूद, रीवा के गुढ़ चौराहा, धोबिया टंकी, बिछिया और चोरहटा जैसे इलाकों में यह सिरप परचून की दुकान की तरह उपलब्ध है।
जानकारों का मानना है कि यह केवल छोटे तस्करों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे दवा विक्रेताओं और माफियाओं का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो थोक में इन दवाओं का डायवर्जन कर रहा है।