सिस्टम की 'मैय्यत' और RTO दलालों का 'तांडव': NH-30 पर CM के नाक के नीचे 'वसूली गैंग' का कब्जा, क्या दिल्ली तक पहुँच रहा है हिस्सा?"
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे 30 (NH-30) पर इन दिनों कानून का नहीं, बल्कि 'दलालों' का राज चल रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर जुगनिहाई टोल प्लाज़ा के पास अवैध वसूली का एक ऐसा संगठित गिरोह सक्रिय है, जो न केवल आम चालकों को लूट रहा है, बल्कि शासन-प्रशासन की साख पर भी कालिख पोत रहा है।
बिना आईडी और बिना नंबर प्लेट: वसूली का नया 'मॉडल'
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ युवक, जो न तो पुलिस की वर्दी में हैं और न ही उनके पास कोई वैध पहचान पत्र है, बेखौफ होकर ट्रकों और पिकअप गाड़ियों को रोक रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि वसूली के लिए उपयोग की जाने वाली गाड़ियों पर नंबर प्लेट तक नहीं है। यह सीधे तौर पर मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, लेकिन कानून के रखवाले ही मौन साधे हुए हैं।
सिविल ड्रेस में गुंडागर्दी: कौन दे रहा है इन्हें संरक्षण?
स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का आरोप है कि ये तथाकथित 'दलाल' खुद को पुलिस या परिवहन विभाग का खास बताकर धमकाते हैं। जब कोई चालक इनसे अधिकारिक आईडी कार्ड मांगता है, तो ये मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। बिना वर्दी के वसूली करना पूरी तरह गैरकानूनी है, फिर भी जुगनिहाई टोल के आसपास यह खेल सालों से चल रहा है। क्या यह संभव है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन को इसकी भनक तक न हो?
नेशनल हाईवे 30 पर बढ़ते हादसे और दलाली का कनेक्शन
हाइवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के पीछे इन दलालों की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। ये दलाल चलती गाड़ियों के सामने अचानक अपनी गाड़ी लगा देते हैं या मोड़ पर वाहनों को रुकवाते हैं। हाल ही में एक हादसे में तीन बाइक सवारों की मौत ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने इन अवैध नाकों को बंद नहीं किया, तो निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी।
सीसीटीवी और पेट्रोलिंग के बावजूद खुली लूट
सरकार दावा करती है कि नेशनल हाईवे पूरी तरह सीसीटीवी की निगरानी में हैं और 24 घंटे हाईवे पेट्रोलिंग गाड़ियाँ गश्त करती हैं। लेकिन रीवा के इस स्ट्रेच पर ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं। दलाल घंटों तक सड़क किनारे खड़े होकर गाड़ियों को रोकते हैं, मोलभाव करते हैं और पैसे वसूलते हैं, लेकिन पेट्रोलिंग टीम को ये कभी नजर नहीं आते।
जनता में आक्रोश: प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
रीवा की जागरूक जनता अब इस मुद्दे पर मुखर हो रही है। लोगों का सवाल है कि मध्य प्रदेश सरकार जहाँ भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की बात करती है, वहीं रीवा में नेशनल हाईवे पर सरेआम डकैती जैसा माहौल क्यों है? क्या इन दलालों का हिस्सा ऊपर तक जाता है? यही वजह है कि महीनों से वायरल हो रहे सबूतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अवैध वसूली के खिलाफ क्या हो सकते हैं सख्त कदम?
इस समस्या के जड़ से खात्मे के लिए निम्नलिखित कदम उठाने अनिवार्य हैं:
विशेष जांच टीम (SIT) का गठन: उन अधिकारियों की पहचान की जाए जिनके संरक्षण में यह खेल फल-फूल रहा है।
डिजिटल मॉनिटरिंग: टोल प्लाजा और उसके 5 किलोमीटर के दायरे में हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी लगाए जाएं जिसका सीधा एक्सेस राज्य मुख्यालय के पास हो।
अनिवार्य वर्दी और आईडी: किसी भी वाहन की चेकिंग के समय पुलिस या आरटीओ अधिकारी का वर्दी में होना और नेमप्लेट धारण करना अनिवार्य हो।
पब्लिक हेल्पलाइन: हाईवे पर अवैध वसूली की तत्काल शिकायत के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप नंबर जारी किया जाए।
प्रधानमंत्री जी, क्या यही है आपका 'भ्रष्टाचार मुक्त' भारत?
एक तरफ पीएम मोदी 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' का नारा देते हैं, वहीं दूसरी ओर रीवा में बिना नंबर की गाड़ियों में बैठकर गुंडे ट्रकों को लूट रहे हैं। बिना वर्दी, बिना आईडी और बिना किसी डर के ये लोग हाईवे को अपनी जागीर समझ बैठे हैं। क्या केंद्र सरकार के परिवहन मंत्रालय को नहीं दिखता कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) की जमीन पर 'अवैध टैक्स' वसूला जा रहा है?
मुख्यमंत्री की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जनाजा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, आपके प्रशासन के अधिकारी या तो अंधे हो चुके हैं या फिर इस लूट में बराबर के साझीदार हैं। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि सिविल ड्रेस में घूम रहे गुंडे पुलिसिया रौब झाड़ रहे हैं। यह वीडियो प्रमाण है कि रीवा में पुलिस और परिवहन विभाग ने दलालों के सामने घुटने टेक दिए हैं।
वर्दी के पीछे छिपे असली गुनहगार
सवाल यह है कि आखिर इन दलालों की हिम्मत कैसे हुई कि ये चलती हाईवे पर गाड़ियाँ रोककर डराएं-धमकाएं? स्थानीय लोगों का दावा है कि वसूली का एक बड़ा हिस्सा 'ऊपर' तक जाता है, इसलिए ये दलाल बेखौफ हैं। यह सिर्फ वसूली नहीं, बल्कि संगठित अपराध (Organized Crime) है।
"जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता किसके पास जाए? रीवा का यह वायरल सच आज हर उस ईमानदार अधिकारी के मुँह पर तमाचा है जो अपनी कुर्सी पर बैठकर फाइलों में ईमानदारी ढूंढ रहा है।"
हादसों की मंडी बना NH-30
इन दलालों की वजह से हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल रहता है। बिना किसी संकेतक या सुरक्षा मानकों के गाड़ियों को अचानक रोकना हादसों को न्यौता देना है। हाल ही में हुई मौतें हादसा नहीं, बल्कि 'प्रशासनिक हत्याएं' हैं। इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? उन दलालों पर हत्या का केस कब दर्ज होगा?
अब आर-पार की जंग: जनता पूछती है जवाब
- कलेक्टर और एसपी की नाक के नीचे सालों से यह खेल कैसे चल रहा है?
- बिना नंबर की गाड़ियों को हाईवे पर घूमने की इजाजत किसने दी?
- क्या प्रशासन किसी बड़े जन-आंदोलन का इंतजार कर रहा है?
- सावधान प्रशासन! यह सिर्फ एक खबर नहीं, आक्रोश की चिंगारी है। अगर 24 घंटे के भीतर इन दलालों को जेल नहीं भेजा गया, तो जनता का विश्वास इस 'सिस्टम' से हमेशा के लिए उठ जाएगा।
निष्कर्ष: पारदर्शिता ही एकमात्र समाधान
रीवा NH-30 पर चल रहा यह काला खेल न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। एक आम आदमी जो टैक्स भरकर सड़क पर चलता है, उसे इन फर्जी दलालों के डर के साये में नहीं रहना चाहिए। रीवा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजना चाहिए ताकि नेशनल हाईवे पर सफर सुरक्षित और पारदर्शी बन सके।
प्रस्तुति: ग्राउंड रिपोर्ट — रीवा न्यूज़ मीडिया दैनिक समाचार पत्र, रीवा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यदि हाईवे पर कोई बिना वर्दी वाला व्यक्ति गाड़ी रोके तो क्या करें? उत्तर: कानूनन, बिना वर्दी और बिना वैध पहचान पत्र के कोई भी व्यक्ति आपकी गाड़ी नहीं रोक सकता। आप तुरंत इसकी रिकॉर्डिंग करें और पुलिस कंट्रोल रूम (100 या 112) को सूचना दें।
प्रश्न 2: जुगनिहाई टोल प्लाजा पर वसूली की शिकायत कहाँ करें? उत्तर: आप रीवा एसपी कार्यालय, स्थानीय थाना या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
प्रश्न 3: क्या पुलिस प्राइवेट लोगों को चेकिंग के लिए रख सकती है? उत्तर: बिल्कुल नहीं। किसी भी प्रकार की आधिकारिक चेकिंग केवल अधिकृत सरकारी कर्मचारी ही कर सकते हैं। प्राइवेट व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली चेकिंग 'अवैध वसूली' की श्रेणी में आती है।
प्रश्न 4: बिना नंबर प्लेट की गाड़ियों का उपयोग क्यों किया जा रहा है? उत्तर: अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वाले लोग अपनी पहचान छुपाने के लिए बिना नंबर प्लेट या फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पकड़े जाने पर उन पर कार्रवाई न हो सके।