"रीवा में कागजी कार्रवाई बनाम जमीनी हकीकत: क्या सो रही है पुलिस और नगर निगम?"
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के प्रमुख केंद्र रीवा शहर में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी को लेकर एक बार फिर तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शहर के प्रमुख और संवेदनशील इलाकों में रात गहराते ही किस तरह के हालात पैदा होते हैं और पुलिसिया गश्त के दावों की जमीनी हकीकत क्या है, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हाल ही में जहां पुलिस ने शहर के नए बस स्टैंड और आसपास के इलाकों में नाइट पेट्रोलिंग के दौरान सख्ती दिखाते हुए दबिश दी और अनावश्यक रूप से घूम रहे लोगों को खदेड़ा, वहीं दूसरी ओर कबाड़ी मोहल्ले जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से आ रही खबरें प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही हैं।
नया बस स्टैंड और अन्य क्षेत्रों में पुलिस का रात्रि भ्रमण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रीवा शहर के नया बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड, समान ओवरब्रिज, धोबिया टंकी, ढेकहा, रेलवे ओवरब्रिज और लाडली पथ जैसे कई व्यस्त हिस्सों में रात के वक्त लगातार लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। इनमें से कई स्थान ऐसे हैं जहां देर रात तक चाय-पान के ठेले और दुकानें खुली रहती हैं। इन दुकानों पर सिगरेट, गुटखा और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नया बस स्टैंड इलाके में पुलिस बल ने रात के वक्त औचक दबिश दी। पुलिस के इस भ्रमण के दौरान कई संदिग्ध लोग मौके से भागने में सफल रहे, जबकि कुछ को पुलिस ने पकड़कर समझाइश दी। सिविल लाइन थाना प्रभारी मनीषा उपाध्याय के अनुसार, रात के समय अनावश्यक रूप से घूमने वाले लोगों को हिदायत दी गई है और नियमों का उल्लंघन कर देर रात तक खुली मिलने वाली दुकानों को बंद कराया गया है ताकि आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।
कबाड़ी मोहल्ला और वैष्णव फ्रूट कंपनी को लेकर उठे बड़े सवाल
एक तरफ जहां पुलिस मुख्य सड़कों और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है, वहीं शहर के भीतरूनी और संवेदनशील हिस्सों, खासकर 'कबाड़ी मोहल्ले' के हालात बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों और जानकारों का कहना है कि इस इलाके में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कबाड़ी मोहल्ला स्थित वैष्णव फ्रूट कंपनी पर आरोप है कि वह पुलिस और प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए नियमों को ताक पर रखकर पूरी रात बेखौफ तरीके से संचालित हो रही है।
बताया जा रहा है कि यह मामला कुछ समय पहले भी शहर में काफी चर्चा और विवाद का विषय बना था, लेकिन कुछ दिन की खामोशी के बाद स्थिति फिर से जस की तस हो गई है। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इस कंपनी के जरिए पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर फलों व अन्य सामग्रियों की आवाजाही और सप्लाई होती है, जिसके चलते कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर कोई भी विभाग इस पर हाथ डालने से कतराता है।
स्थानीय पुलिस की गश्त पर लग रहे ढिलाई के आरोप
कबाड़ी मोहल्ले और उसके आसपास के इलाकों के रहवासियों का खुला आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में पुलिस की गश्त बेहद कमजोर और लचर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस अपनी ही सीमा और बीट क्षेत्र में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम नहीं कर पा रही है, जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं। यदि पुलिस बल समय-समय पर और निष्पक्षता के साथ रात के वक्त इन भीतरी इलाकों में गश्त करे, तो इस तरह की गतिविधियों पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पुलिस की मौजूदगी महज कागजी और औपचारिक बनकर रह गई है।
विभागों की निष्क्रियता और केवल कागजी कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि अन्य जिम्मेदार प्रशासनिक विभागों की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय जनता का आरोप है कि नगर निगम और खाद्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे भी इस मामले में आंखें मूरे बैठे हैं। वैष्णव फ्रूट कंपनी या अन्य संदिग्ध व्यावसायिक गतिविधियों पर ठोस और जमीनी कार्रवाई करने के बजाय केवल कागजी कोरम पूरा किया जाता है। औपचारिकता के नाम पर नोटिस जारी कर फाइलें बंद कर दी जाती हैं, जिससे भ्रष्ट व्यवस्था को और बढ़ावा मिलता है। जनता और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में खानापूर्ति बंद करके कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जाएं, ताकि शहर का माहौल खराब न हो और नियमों का पालन सख्ती से सुनिश्चित किया जा सके।