व्यवस्था का मजाक: कलेक्टर, कमिश्नर के आदेश पर भी नहीं होती कार्रवाई; अब गंभीर रूप से घायल की FIR क्यों नहीं लिख रही पुलिस?

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा शहर में कानून व्यवस्था पूरी तरह से मज़ाक बन चुकी है। शुक्रवार की रात, 52 वर्षीय रजनीश अग्निहोत्री ने एक पेट्रोल पंप पर चल रहे झगड़े में बीच-बचाव करने की हिम्मत दिखाई, जिसकी कीमत उन्हें लहूलुहान होकर चुकानी पड़ी। झगड़ा मृगेंद्र सिंह नामक व्यक्ति का उसके ड्राइवर बेटू से हो रहा था। रजनीश जी ने सिर्फ़ शांति बनाए रखने की समझाइश दी।

बस इतनी सी बात पर, दबंग मृगेंद्र सिंह ने रजनीश जी पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। सिर, हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आईं और शरीर से काफी खून बह गया। यह घटना बताती है कि रीवा में बीच बचाव क्यों महंगा पड़ा और यहाँ के अपराधियों में कानून का कोई खौफ नहीं बचा है।

मेडिकल रिपोर्ट में 'गंभीर चोट': FIR क्यों नहीं कर रही पुलिस?
घायल रजनीश अग्निहोत्री को आनन-फानन में अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा खुद पीड़ित ने किया है: हमले की गंभीरता को दर्शाती मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद, विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है।

पीड़ित का आरोप है कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट में साफ़-साफ़ लिखा है कि उनके सिर पर गंभीर चोट आई है। कानून के मुताबिक, ऐसी गंभीर चोट का मतलब जानलेवा हमले (IPC 307) का मामला बनता है, फिर भी पुलिस टालमटोल कर रही है। सवाल यह है: पुलिस ने एफआईआर क्यों नहीं की? क्या पुलिस व्यवस्था दबाव में काम कर रही है, या क्या किसी रसूखदार को बचाने की कोशिश हो रही है? गंभीर चोट लगने पर क्या करें, अगर पुलिस ही कार्रवाई न करे?

60 घंटों बाद भी 'जाँच' के नाम पर टालमटोल: न्याय मिलने में क्यों हो रही देरी?
घटना को 60 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय थाना पुलिस केवल "मामले को जाँच में लिया गया है" कहकर पल्ला झाड़ रही है। इस तरह की निष्क्रियता से पुलिस पर कैसे कार्रवाई करें यह सवाल जनता पूछ रही है।

एक तरफ जानलेवा हमला हुआ है।

  • दूसरी तरफ स्पष्ट मेडिकल प्रमाण मौजूद है।
  • तीसरी तरफ, हमलावर का नाम भी ज्ञात है।

इसके बावजूद एफआईआर दर्ज न करना सीधे तौर पर पुलिस की घोर लापरवाही और न्यायिक व्यवस्था का मज़ाक है। पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, जबकि अपराधी खुले घूम रहे हैं। रीवा पुलिस की यह कार्यप्रणाली न सिर्फ पीड़ित को न्याय से वंचित कर रही है, बल्कि शहर की कानून व्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही है। उच्चाधिकारियों को इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।