24 घंटे में हिसाब बराबर! रीवा पुलिस ने उसी जगह सिखाया सबक, जहाँ हुआ था बीती रात हमला

 
 सिविल लाइन पुलिस ने उसी स्थान पर निकाला आरोपियों का पैदल जुलूस जहाँ हुई थी पुलिसकर्मियों से मारपीट। 

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा में कानून को चुनौती देने वाले उपद्रवियों का गुरूर चौबीस घंटे के भीतर ही चकनाचूर हो गया। बीती रात सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत जिस व्यस्त चौराहे पर नशे में धुत युवकों ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की और उन्हें जमीन पर पटककर पीटा था, आज उसी स्थान पर पुलिस ने इन आरोपियों का सार्वजनिक रूप से पैदल जुलूस निकाला। पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया है।

खाकी का खौफ: उपद्रवियों का निकाला गया पैदल जुलूस 
पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों को उसी सड़क पर पैदल चलाया, जहाँ उन्होंने कानून की धज्जियां उड़ाई थीं। इस दौरान पुलिस का सख्त रवैया साफ नजर आया।

  • अपराधियों की परेड: आरोपियों को हाथ बांधकर भीड़भाड़ वाले इलाके से ले जाया गया।
  • कड़ा संदेश: पुलिस का मकसद यह साफ करना था कि वर्दी पर हाथ उठाने वालों का अंजाम क्या होता है।
  • इलाके में दहशत कम करना: स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों के मन से उपद्रवियों का खौफ निकालने के लिए यह कदम उठाया गया।

वायरल वीडियो की हकीकत: सड़क पर हुआ था 'दंगल' 
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। वीडियो में साफ़ दिख रहा था कि नशे में चूर कुछ युवक पुलिसकर्मियों से उलझ रहे थे। स्थिति इतनी भयावह थी कि:

  • युवकों ने पुलिसकर्मियों को बीच सड़क पर पटक दिया और उनसे मारपीट की।
  • गाली-गलौज और धक्का-मुक्की के कारण वहां से गुजर रहे लोग सहम गए।
  • दो-दो जवान एक युवक को काबू करने में नाकाम साबित हो रहे थे, जो पुलिस की ट्रेनिंग और संख्या बल पर भी सवाल खड़ा कर गया।

जनता के गंभीर आरोप: आखिर विवाद की चिंगारी कहाँ से सुलगी? 
इस घटना का एक दूसरा पहलू भी चर्चा में है। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो के बैकग्राउंड में सुनाई दे रही आवाजों के अनुसार, जनता पुलिस के आचरण से भी नाराज थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि:

  • ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी खुद नशे की हालत में थे।
  • बिना किसी ठोस कारण के लोगों को उठाकर ले जाया जा रहा था।
  • भीड़ ने वीडियो में पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और "इनको मारो" जैसे शब्द भी सुनाई दिए।
  • यह आरोप विभाग की छवि पर गहरा दाग लगाते हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होना अनिवार्य है।

पुलिस प्रशासन की 'सर्जिकल स्ट्राइक' और कड़ा संदेश 
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी आरती सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मी चेकिंग अभियान पर थे और असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर विवाद पैदा किया। पुलिस ने अब उन सभी चेहरों को चिन्हित कर लिया है जो वीडियो में हिंसा फैलाते नजर आ रहे थे। जुलूस निकालकर पुलिस ने यह संदेश दिया है कि किसी भी सूरत में वर्दी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कानून के राज में अराजकता की कोई जगह नहीं 
रीवा की यह घटना एक बड़ा सबक है। एक तरफ जहां नशेड़ी युवाओं द्वारा कानून को हाथ में लेना घोर अपराध है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग को भी अपनी कार्यशैली और जनता के बीच अपनी साख को बेहतर बनाने की जरूरत है। जुलूस निकालकर पुलिस ने खौफ तो पैदा किया है, लेकिन असली समाधान शहर में बढ़ती नशाखोरी को जड़ से खत्म करने और पुलिस-जनता के बीच विश्वास बहाली में ही है।