रीवा ब्रेकिंग: पुलिस की आड़ में उगाही का खेल! तस्कर से लाखों वसूलने वाला आरक्षक पंकज मिश्रा सस्पेंड, सन्न रह गया पुलिस महकमा!

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से पुलिस महकमे को हिला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ सिविल लाइन थाने में पदस्थ एक आरक्षक ने वर्दी की गरिमा को ताक पर रखकर एक फरार अपराधी के साथ लाखों की सौदेबाजी कर डाली। नशीली दवाओं के काले कारोबार में लिप्त आरोपी को जेल भेजने के बजाय, आरक्षक ने उसे रिश्वत लेकर आजाद कर दिया। मामला उजागर होने के बाद पुलिस कप्तान ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी आरक्षक को निलंबित कर दिया है।

नशीली दवाओं के फरार आरोपी से 'लाखों की वसूली' का काला खेल
पूरा मामला नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़ा है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र का एक कुख्यात आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। आरक्षक पंकज मिश्रा ने इस तस्कर को सफलतापूर्वक ट्रैक कर पकड़ तो लिया, लेकिन यहाँ से कानून की प्रक्रिया शुरू होने के बजाय भ्रष्टाचार की पटकथा लिखी गई। आरोप है कि आरक्षक ने आरोपी को कानूनी गिरफ्त से बचाने के बदले लाखों रुपये की नगद राशि की मांग की।

थाने के बजाय होटल में 'प्राइवेट जेल': एक सोची-समझी साजिश
भ्रष्टाचार की यह दास्ताँ किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। आरक्षक पंकज मिश्रा ने पकड़े गए आरोपी को थाने ले जाकर रोजनामचा में दर्ज करने के बजाय, एक निजी व्यक्ति की मदद से शहर के एक होटल में रखा। यहाँ आरोपी को पुलिस ट्रैकिंग से बचाने और उसका मोबाइल वापस करने के नाम पर अतिरिक्त 'सर्विस चार्ज' वसूला गया। जब मोटी रकम हाथ लग गई, तो आरोपी को चुपचाप रफूचक्कर होने का रास्ता दे दिया गया।

एसपी की सीक्रेट जांच में फंसा आरक्षक: एंटी करप्शन सेल ने बिछाया जाल
भ्रष्टाचार की भनक लगते ही रीवा पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह चौहान ने तत्काल एक्शन लिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच जिले के 'भ्रष्टाचार निरोध सेल' (Anti-Corruption Cell) को सौंपी गई। गुप्त तरीके से हुई इस जांच में आरक्षक के खिलाफ चौंकाने वाले साक्ष्य मिले। प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाने पर एसपी ने पंकज मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया। अब पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस वसूली रैकेट में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।

निष्कर्ष: अपराधियों के मददगारों पर कानून का डंडा जरूरी
यह मामला सिर्फ एक आरक्षक के भ्रष्टाचार का नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल है। जब खाकी खुद नशे के सौदागरों के साथ हाथ मिला ले, तो समाज सुरक्षित कैसे रहेगा? रीवा पुलिस अधीक्षक की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश तो दिया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुँचना अभी बाकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: रीवा के किस आरक्षक पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं? उत्तर: सिविल लाइन थाने में पदस्थ आरक्षक पंकज मिश्रा पर तस्कर से रिश्वत लेने के आरोप सिद्ध हुए हैं।
प्रश्न 2: आरोपी आरक्षक ने पकड़े गए तस्कर के साथ क्या किया? उत्तर: आरक्षक ने आरोपी को थाने ले जाने के बजाय एक होटल में रखा और लाखों की रिश्वत लेकर उसे फरार होने में मदद की।
प्रश्न 3: इस मामले में एसपी रीवा ने क्या कार्रवाई की? उत्तर: एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने भ्रष्टाचार निरोध सेल की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षक पंकज मिश्रा को निलंबित कर दिया है।
प्रश्न 4: क्या इस मामले में अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल हैं? उत्तर: वर्तमान में जांच जारी है। आरक्षक के साथ एक निजी व्यक्ति की संलिप्तता भी सामने आई है, और अन्य संभावित कड़ियों की पड़ताल की जा रही है।
प्रश्न 5: क्या रिश्वत की राशि बरामद हुई है? उत्तर: जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, साक्ष्यों और लेन-देन के विवरणों को खंगाला जा रहा है।