रीवा पुलिस का बड़ा एक्शन: फेसबुक-इंस्टाग्राम पर सामाजिक वैमनस्यता फैलाई तो दर्ज होगा मुकदमा, एडवाइजरी जारी
रीवा पुलिस ने जनहित में एडवाइजरी जारी कर व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जातिगत टिप्पणी करने और सामाजिक वैमनस्यता फैलाने वालों को सख्त चेतावनी दी है।
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून व्यवस्था और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए रीवा पुलिस ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रीवा पुलिस के संज्ञान में आया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इंटरनेट और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसे देखते हुए रीवा पुलिस द्वारा जनहित में एक विस्तृत और सख्त एडवाइजरी जारी की गई है।
इस आधिकारिक निर्देश का मुख्य उद्देश्य डिजिटल दुनिया में फैल रही नफरत, जातिगत विद्वेष और भ्रामक ख़बरों पर पूरी तरह से लगाम लगाना है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर समाज का माहौल खराब करने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जाएगी। इंटरनेट पर आपकी एक गलत टिप्पणी आपको सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है।
जातिगत टिप्पणी और सोशल मीडिया पर ग्रूप बनाने वालों पर पैनी नजर
रीवा पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और एडवाइजरी के अनुसार, पुलिस के संज्ञान में यह बात लगातार आ रही है कि कुछ लोगों द्वारा व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स (पुराना ट्विटर) एवं इंस्टाग्राम जैसे प्रमुख सोशल मीडिया माध्यमों पर विशेष ग्रुप बनाए जा रहे हैं। इन ग्रुप्स के माध्यम से किसी जाति विशेष को निशाना बनाकर अत्यंत आपत्तिजनक और जातिगत टिप्पणियां की जा रही हैं।
इस तरह की गतिविधियों से न केवल आम जनता के बीच सामाजिक दुर्व्यवहार की भावना फैल रही है, बल्कि यह पूरी तरह से समाज और कानून व्यवस्था के स्थापित आधार के खिलाफ है। रीवा पुलिस की सायबर सेल और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम अब ऐसे सभी ग्रुप्स और व्यक्तिगत प्रोफाइल्स पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही है। ग्रुप एडमिन से लेकर भड़काऊ पोस्ट लिखने और उसे आगे फॉरवर्ड करने वाले हर एक यूजर को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
भ्रामक जानकारी और फर्जी खबरों से कैसे बचें
आज के डिजिटल युग में फर्जी खबरें (Fake News) समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं। रीवा पुलिस ने अपनी एडवाइजरी में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि सनसनीखेज दावों, अस्पष्ट तस्वीरों या सालों पुराने वीडियो का इस्तेमाल अक्सर लोगों को भड़काने और समाज में अशांति पैदा करने के लिए किया जाता है।
फर्जी ख़बरों की बनावट इस तरह की होती है कि वे जानबूझकर लोगों में अचानक डर, गुस्सा या अत्यधिक खुशी पैदा कर सकें। ऐसी किसी भी खबर या पोस्ट को बिना सोचे-समझे शेयर करने की आदत समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देती है। पुलिस ने जनता को जागरूक करते हुए कहा है कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। जब तक किसी खबर की पुष्टि आधिकारिक सूत्रों या जिम्मेदार समाचार माध्यमों से न हो जाए, तब तक उस पर विश्वास न करें और न ही उसे किसी अन्य ग्रुप में भेजें।
कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी कठोर वैधानिक कार्रवाई
रीवा पुलिस ने खुले शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी भी सोशल मीडिया माध्यम (जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम आदि) से ऐसी कोई भी सामग्री प्रसारित करता है जिससे सामाजिक वैमनस्यता फैलती हो, तो उसके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इसके तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है, जिसमें गैर-जमानती वारंट और जेल की सजा का प्रावधान है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर समाज का माहौल खराब करने का प्रयास करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। सायबर टीम आधुनिक तकनीकी उपकरणों की मदद से डिलीट किए गए संदेशों और फेक आईडी बनाकर नफरत फैलाने वालों का भी आसानी से पता लगा रही है।
रीवा पुलिस द्वारा आमजन से की गई मुख्य अपीलें
रीवा पुलिस ने नागरिकों की सुरक्षा और शांति के लिए इस महत्वपूर्ण जनहित सलाह में निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है:
- भ्रामक माध्यमों से दूरी बनाएं: आमजन से अपील है कि ऐसी भ्रामक और नफरत फैलाने वाली जानकारी प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया ग्रुप्स और माध्यमों से तुरंत दूर हो जाएं।
- आपत्तिजनक पोस्ट तुरंत डिलीट करें: यदि आप किसी ऐसे ग्रुप के एडमिन या सदस्य हैं जहां सामाजिक वैमनस्यता फैलाने वाले पोस्ट या मैसेज आते हैं, तो उन्हें तुरंत डिलीट करें और आगे शेयर करने से पूरी तरह बचें।
- सतर्कता और जांच जरूरी: किसी भी सनसनीखेज दावे या अस्पष्ट तस्वीरों वाले मैसेज पर बिना प्रामाणिक जांच के भरोसा न करें।
- तुरंत फॉरवर्ड करने से बचें: डर या गुस्सा पैदा करने वाली फर्जी ख़बरों को तुरंत फॉरवर्ड या शेयर करने की जल्दबाजी बिल्कुल न दिखाएं।
सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग कैसे करें
एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें अपने डिजिटल व्यवहार में बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। रीवा पुलिस का यह संदेश "सतर्क रहें, सुरक्षित रहें" के मूल मंत्र पर आधारित है। यदि आपके पास कोई ऐसी पोस्ट आती है जो किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ द्वेष पैदा करती है, तो उसकी रिपोर्ट तुरंत पुलिस के सायबर सेल में करें।
व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन को अपने ग्रुप की सेटिंग्स में 'Only Admins' का विकल्प चुनना चाहिए ताकि कोई बाहरी तत्व भड़काऊ सामग्री न पोस्ट कर सके। याद रखें कि इंटरनेट पर हमारे द्वारा शेयर की गई एक छोटी सी भ्रामक जानकारी किसी बड़ी अप्रिय घटना का कारण बन सकती है। इसलिए सकारात्मकता फैलाएं, नफरत नहीं।