रीवा न्यूज़ मीडिया खुलासा: रीवा के अस्पतालों में मौत का व्यापार! इंश्योरेंस भी हजम, आयुष्मान भी साफ... क्या अब इलाज के लिए गुंडई करेगा 'प्रार्थना हॉस्पिटल'?

 
रीवा के प्रार्थना हॉस्पिटल पर लगा गंभीर आरोप; आयुष्मान और इंश्योरेंस के बाद भी वसूले लाखों। क्या निजी नर्सिंग होम अब डकैती के अड्डे बन गए हैं? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा समेत पूरे विंध्य क्षेत्र में निजी नर्सिंग होम अब 'जीवन रक्षक' कम और 'जेब कतरू' ज्यादा नजर आ रहे हैं। इलाज के नाम पर मरीजों को डराना, फर्जी बिल बनाना और अंत में उनकी जमा-पूंजी छीन लेना यहाँ का नया दस्तूर बन गया है। हालिया मामला समान थाना क्षेत्र के 'प्रार्थना हॉस्पिटल' का है, जहाँ मानवता को शर्मसार करते हुए लूट का ऐसा खेल खेला गया जिसे सुनकर किसी भी रूह कांप जाए।

प्रार्थना हॉस्पिटल का 'मास्टर प्लान': एक मरीज, तीन तरह की लूट
आम तौर पर एक ईमानदार संस्थान या तो मरीज के इंश्योरेंस का लाभ लेता है या आयुष्मान योजना का। लेकिन प्रार्थना हॉस्पिटल के संचालकों ने लालच की सारी हदें पार कर दीं।

  • पहली लूट: मरीज के हेल्थ इंश्योरेंस से मोटी रकम क्लेम की गई।
  • दूसरी लूट: सरकार की आयुष्मान भारत योजना के पोर्टल से भी भुगतान उठा लिया गया।
  • तीसरी लूट: इन सबके बावजूद परिजनों के हाथ में लाखों रुपये का 'एडिशनल बिल' थमा दिया गया।
  • यह सीधे तौर पर सरकारी धन और आम आदमी की मेहनत की कमाई पर डाका है।

ग्राउंड जीरो की हकीकत: पैसा नहीं तो मरीज की छुट्टी नहीं!
जब पीड़ित परिवार ने इस अंधेरगर्दी का विरोध किया, तो अस्पताल प्रबंधन अपनी असली गुंडागर्दी पर उतर आया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें धमकी दी गई कि "जब तक कैश काउंटर पर लाखों रुपये जमा नहीं होंगे, मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा।" यह किसी अस्पताल का व्यवहार नहीं, बल्कि किसी किडनैपिंग गैंग की फिरौती जैसी मांग लगती है। अस्पताल के लोगों ने यहाँ तक कह दिया कि उनकी पहुँच 'ऊपर' तक है, इसलिए सवाल न उठाएं।

संजय गांधी अस्पताल का 'दलाल तंत्र': सरकारी पहचान, निजी दुकान
रीवा में यह चर्चा आम है कि संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) के कुछ सफेदपोश डॉक्टर सरकारी वेतन तो लेते हैं, लेकिन उनकी 'वफादारी' प्रार्थना जैसे निजी अस्पतालों के साथ है। सरकारी अस्पताल में जानबूझकर सुविधाएं कम बताई जाती हैं, डराया जाता है और अंत में मरीज को निजी नर्सिंग होम की तरफ धकेल दिया जाता है। यह एक ऐसा 'नेक्सस' है जो रीवा की गरीब जनता को कर्ज के दलदल में धकेल रहा है।

आयुष्मान और इंश्योरेंस का डबल गेम: कानूनी अपराध या सिस्टम की चूक?
नियम के मुताबिक, कोई भी अस्पताल एक ही इलाज के लिए दो अलग-अलग सरकारी/निजी योजनाओं से लाभ नहीं ले सकता। प्रार्थना हॉस्पिटल ने अगर ऐसा किया है, तो यह धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत एक गंभीर वित्तीय अपराध है। क्या रीवा का स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस बात की जांच करेगा कि कितने मरीजों के साथ ऐसा 'डबल गेम' खेला गया है?

स्वास्थ्य विभाग की 'कुंभकर्णी' नींद: कब तक खामोश रहेंगे जिम्मेदार?
सीएमएचओ (CMHO) रीवा और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अक्सर सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है। जब शहर के बीचों-बीच मरीज को बंधक बनाकर लाखों की वसूली की जा रही है, तो विभाग के उड़नदस्ते कहाँ सो रहे हैं? क्या इन निजी अस्पतालों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखें मूंद लेते हैं?

प्रार्थना हॉस्पिटल जाने से पहले ये खबर जरूर पढ़ें
रीवा की जनता को अब जागरूक होना होगा। इलाज के नाम पर 'प्रार्थना' करने वाले ये संस्थान आपकी जान और माल दोनों के दुश्मन साबित हो सकते हैं। अगर आप या आपका कोई परिचित सड़क हादसे या बीमारी में इन निजी अस्पतालों की ओर जा रहा है, तो संभल जाइए। कहीं ऐसा न हो कि बीमारी से ज्यादा अस्पताल का बिल आपको मार दे।

रीवा न्यूज़ मीडिया का सवाल:  कलेक्टर साहब और स्वास्थ्य मंत्री जी, क्या रीवा की गरीब जनता इसी तरह लुटती रहेगी? इन सफेदपोश डकैतों पर बुलडोजर कब चलेगा? जनता सावधान रहे! किसी भी निजी अस्पताल में भर्ती होने से पहले उसकी साख की जांच जरूर करें।