कान में ईयरफोन, हाथ में मोबाइल और छात्र से सेवा... क्या इसीलिए सरकारी स्कूल जाते हैं बच्चे? कलेक्टर प्रतिभा पाल ने DEO को सरेआम फटकारा

 
रीवा के त्योंथर में प्रिंसिपल वर्षा मांझी ने छात्र से सेवा कराई, कलेक्टर ने DEO को लगाई फटकार। Rewa Collector Action on School Video.

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के त्योंथर क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने शिक्षा विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक ओर सरकार "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" और "सर्व शिक्षा अभियान" पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग मासूमों को अपनी निजी सेवा में लगा रहे हैं।

त्योंथर के शासकीय स्कूल का मामला: क्या है पूरा घटनाक्रम?
मामला त्योंथर विकासखंड के शासकीय माध्यमिक शाला पनासी का है। मंगलवार के दिन स्कूल परिसर में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने इंसानियत और गुरु-शिष्य की मर्यादा को तार-तार कर दिया। स्कूल की प्रिंसिपल वर्षा मांझी, जो पिछले दो वर्षों से यहाँ पदस्थ हैं, कुर्सी पर बड़े आराम से बैठी थीं। उनके कानों में ईयरफोन लगा था, शायद वह किसी संगीत या बातचीत में मशगूल थीं। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उनके बगल में कक्षा 6 का एक मासूम छात्र खड़ा था, जो अपने हाथों से गत्ते का पंखा बनाकर मैडम को हवा कर रहा था।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
यह वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। जैसे ही स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने इसे देखा, विभाग के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि छात्र को पढ़ाई छोड़कर मैडम की गर्मी दूर करने के काम में लगाया गया है।

कलेक्टर प्रतिभा पाल की सख्त कार्रवाई और DEO को फटकार
जैसे ही यह मामला रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल के संज्ञान में आया, उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया। कलेक्टर ने तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रामराज मिश्रा को तलब किया और इस लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर ने स्पष्ट लहजे में कहा कि स्कूलों में इस तरह का अनुशासनहीन व्यवहार और छात्रों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं और जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

वर्षा मांझी: दो साल से पनासी स्कूल में जमाया है कब्जा
बताया जा रहा है कि प्रिंसिपल वर्षा मांझी पिछले दो वर्षों से इसी स्कूल में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो स्कूल में प्रबंधन की स्थिति पहले भी चर्चा में रही है, लेकिन छात्र से पंखा झलवाने की इस घटना ने प्रशासन की आँखों में धूल झोंकने वाले अधिकारियों की पोल खोल दी है।

शिक्षा के अधिकार (RTE) का उल्लंघन?
भारत में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) छात्रों को गरिमापूर्ण वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है। किसी भी शिक्षक द्वारा छात्र से निजी काम करवाना न केवल अनैतिक है बल्कि कानूनी रूप से भी दंडनीय हो सकता है। छात्र का काम पढ़ना है, न कि गर्मी में शिक्षकों को पंखा झलना।

क्या होगा अगला कदम?
जाँच टीम अब स्कूल का दौरा करेगी और छात्रों व अन्य स्टाफ के बयान दर्ज करेगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रिंसिपल वर्षा मांझी पर निलंबन (Suspension) की गाज गिर सकती है। यह मामला अन्य शिक्षकों के लिए भी एक सबक है कि वे अपने पद की गरिमा को न भूलें।

नैतिक पतन की पराकाष्ठा
एक गुरु का स्थान समाज में सबसे ऊंचा होता है, लेकिन जब वही गुरु एक बच्चे को अपना सेवक समझने लगे, तो समाज का पतन निश्चित है। रीवा प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षक छात्र के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ न कर सके।